वर्ष 2010 में भारतीय राजनीति का भविष्य – भाग 1
Future of Indian Politics in the Year 2010 – Part 1
वर्ष 2010 भारतीय राजनीति के लिए मिश्रित प्रभावों वाला वर्ष है। जहाँ यह वर्ष कुछ राजनैतिक पार्टियों के लिए बेहद सुखद रहेगा तो कुछ अन्यों के लिए बेहद कष्टकारी भी रहेगा। जहाँ तक पूरे देश के राजनैतिक वातावरण की बात है तो व्यवस्था एवं विचारों एवं जनमत में वर्ष 2010 में अनपेक्षित जागृति आएगी और देश विकास अथवा तरक्की की राह पर गति के साथ आगे बढ़ेगा। वहीं विश्व-मंच पर भी भारतीय राजनैतिज्ञों का दबदबा बढ़ेगा और वर्ष 2010 में भारत एक प्रमुख आर्थिक एवं राजनैतिक ताकत बन कर उभरेगा तथा संसार के विभिन्न मसलों जैसे ग्लोबल वॉर्मिंग (Global Warming), विश्व-शांति, सुरक्षा एवं आतंकवाद, आर्थिक असमानता आदि के लिए विकसित देशों के साथ कंधे से कंधा मिला कर काम करेगा। वहीं ये वर्ष भारतवर्ष के लिए वैज्ञानिक, व्यापारिक एवं कलात्मक उपलब्धियों का वर्ष भी रहेगा तथा विज्ञान, चिकित्सा, तकनीकी, व्यापार, कला, खेलकूद एवं संगीत में इस साल भारतवासियों का प्रदर्शन अभूतपूर्व रहेगा।
भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस (Indian National Congress):
वर्ष 2010 भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस के लिए अत्यन्त शुभ रहने वाला है। इस वर्ष दक्षिण, पूर्वी एवं पश्चिमी राज्यों में पार्टी की स्थिति और अधिक मजबूत होगी। पार्टी के सदस्यों में सद्भाव एवं आपसी तालमेल का वातावरण रहेगा। गठजोड़ की राजनीति में भी पार्टी सफलता के नए परचम लहराएगी। कश्मीर, हरियाणा, उत्तरप्रदेश, राजस्थान, मध्यप्रदेश, आंध्रप्रदेश, केरल एवं उत्तरपूर्व में पार्टी की स्थिति सुखद होगी।
भारतीय जनता पार्टी (Bhartiya Janta Party):
वर्ष 2010 में राजनेताओं में आपसी तालमेल एवं नए विचारों की कमी से पार्टी में अस्थिरता का माहौल रहेगा। हरियाणा, राजस्थान, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार और दक्षिण भारत में पार्टी की स्थिति सुखद बनी रहेगी। राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुख नेताओं में मतभेद एवं असक्रियता के कारण पार्टी के जनमत को भारी हानि होने के संकेत हैं। इस वर्ष भारतीय जनता पार्टी बेहद कमजोर स्थिति में रहेगी और अपनी लोकप्रियता बनाने में असफल रहेगी, जिसका सीधा लाभ अन्य दलों को पहुँचेगा।
अन्य क्षेत्रीय दल:
वर्ष 2010 में छोटी पार्टियों के प्रमुख नेताओं में आपसी तनाव रहेगा और राष्ट्रीय स्तर पर पार्टियों के जनमत को हानि होगी। कई पार्टियों में तो विभाजन के योग भी बन रहे हैं। वहीं क्षेत्रीयता के आधार पर कई पार्टियों की स्थिति मजबूत होगी तो कई वरिष्ठ नेताओं का वरचस्व भी कम होगा।
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