निशुल्क रिपोर्ट
 मुख्यपृष्ठ
 राशि मन्डल
 राशिफल
 अंकज्योतिष
 प्रेम
 पर्व त्योहार व्रत
 चौघडिया
  नक्षत्र
 पंचांग
 राशि रत्न
 टैरो
 हस्तरेखा शास्त्र
 
 
नवरात्रि पर्व और माता के नौ रूप

आज से चैत्र माह के नवरात्रि आरम्भ हो चुके हैं और इनके साथ ही भारतीय कैलेन्डर पधति के अनुसार नये साल – विक्रम संवत् 2067 का भी आरम्भ हो चुका है। जैसा कि सर्वविदित है कि वासन्तिक नवरात्रि पर्व के इन नौ दिनों के दौरान आदिशक्ति सृष्टि रचियता माता जगदम्बा के नौ विभिन्न रूपों की आराधना की जाती है।

नवरात्रि पर्व वर्ष में दो बार मनाया जाता है – हिन्दू वर्ष के आरम्भ में अर्थात चैत्र माह के शुक्ल पक्ष के प्रथम दिवस वासन्तिक नवरात्रि (Vaasantik Navratri) आते हैं जबकि शीत ऋतु बीत चुकी होती है और ग्रीष्म ऋतु आरम्भ होने वाली होती है। प्रचलित अंग्रेजी कैलेन्डर के अनुसार ये समय साधारणतः मार्च-अप्रैल के महीनों के दौरान आता है।

दूसरे नवरात्रि जिन्हें शारदीय नवरात्रि (Shardiya Navratri) के नाम से भी जाना जाता है, वर्षा ऋतु बीत जाने के बाद तथा शीत ऋतु के आगमन से पहले अश्विन माह के शुक्ल पक्ष के प्रथम दिन से मनाए जाते हैं। अंग्रेजी कैलेन्डर के अनुसार सितम्बर-अक्तूबर के दौरान शारदीय नावरात्रि का पर्व मनाया जाता है।

ये नौ दिन वर्ष के सर्वाधिक शुद्ध एवं पवित्र दिवस (The Most Auspicious Days of the Year)  माने गए हैं। वर्ष के इन नौ और नौ अर्थात् 18 दिनों का भारतीय धर्म एवं दर्शन (Indian Religion and Philosophy) में विशेष ऐतिहासिक महत्व है और इन्हीं दिनों में बहुत सी दिव्य घटनाओं के घटने की जानकारी हिन्दू पौराणिक ग्रन्थों (Hindu Mythology) में मिलती है।

वासन्तिक नवरात्रि के नौ दिनों में आदिशक्ति माता दुर्गा (Durga Mata) के उन नौ रूपों का भी पूजन किया जाता है जिन्होंने सृष्टि के आरम्भ से लेकर अभी तक इस पृथ्वी लोक पर विभिन्न लीलाएँ की थीं। माता के इन नौ रूपों को नवदुर्गा (Navdurga) के नाम से भी जाना जाता है। वासन्तिक नवरात्रि के इन्हीं नौ दिनों पर मां दुर्गा के जिन नौ रूपों का पूजन किया जाता है वे क्रमशः इस प्रकार हैं – पहला शैलपुत्री (Shailputri), दूसरा ब्रह्माचारिणी (Brahmacharini), तीसरा चन्द्रघन्टा (Chandraghanta), चौथा कूष्माण्डा (Kushmanda), पाँचवा स्कन्द माता (Skand Mata), छठा, कात्यायिनी (Katyayani), सातवाँ कालरात्रि (Kalratri), आठवाँ महागौरी (Mahagauri), नौवां सिद्धिदात्री (Siddhidatri)।



Navratri Festival and Nine Goddesses

 
 
 

अन्य ऍस्ट्रो-लेख
» अतिशुभ नवरात्रों में रखें समृद्धि की नींव » गणेश चतुर्थी
» “व्हाट्स योर राशी?” » शुभ दीपावली: इस बार करें नई शुरुआत
» नैपच्यून ग्रह (वरुण) की उल्टी चाल: » वृश्चिक राशि में बुध का प्रवेश: बुद्धिमानी का दौर
» कन्या राशि में शनि: विश्लेषण, प्रभाव एवं नियंत्रण » यूरेनस का मार्गीय होना: परिवर्तन का समय...
» क्रिसमस डबल धमाका!! » मकर राशि में बुध की उल्टी चाल
» 2010 में भी महँगाई से राहत नहीं! » वृश्चिक राशि में बुध का प्रवेश
» नए साल 2010 का उपहार! » वर्ष 2010 में भारतीय राजनीति का भविष्य – भाग 1
» सोनिया गाँधी – 2010 में और अधिक मजूबत » वर्ष 2010 में भारतीय राजनीति का भविष्य – भाग 2
» वर्ष 2010 में भारतीय राजनीति का भविष्य – भाग 3 » मार्गीय मंगल: आपकी ऊर्जा के नवीनीकरण का समय
» नवरात्रि पर्व और माता के नौ रूप » मां शैलपुत्री
» भविष्य -गणना – भाग 1 » भविष्य -गणना – भाग 2
» क्रिसमस दान का त्योहार » गीता सार
» मां शैलपुत्री

Copyright Netway India Pvt. Ltd. 2001-2010 all rights reserved.