Skip Navigation Links
संत सिपाही गुरु गोबिंद सिंह की 350वीं जयंती


संत सिपाही गुरु गोबिंद सिंह की 350वीं जयंती

"जब-जब होत अरिस्ट अपारा। तब-तब देह धरत अवतारा।"

गुरु गोबिंद सिंह जी के यह वचन श्रीमद भगवत गीता के अध्याय 4 के श्लोक 7

यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत ।
अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम् ।।

की याद दिलाते हैं। गुरु गोबिंद सिंह का जन्म जूलियन कलेंडर के अनुसार 22 दिसंबर सन् 1666 को व ग्रेगोरियन कलेंडर के अनुसार 1 जनवरी 1667 को हुआ। हिंदू कलेंडर के अनुसार यह तिथि 1723 विक्रम संवत् के पौष माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी थी। इस वर्ष गुरु गोबिंद सिंह जी की 350वीं जयंती 5 जनवरी को मनायी को जा रही है। जैसा कि खुद गुरु गोबिंद सिंह ने कहा था, कि जब-जब अत्याचार बढता है, तब-तब भगवान मानव देह का धारण कर पीड़ितों व शोषितों के दुख हरने के लिए आते हैं।

गुरु गोबिंद सिंह की उदारता के किस्से बचपन से ही मशहूर हो गए थे। वे एक निस्संतान बुढिया के साथ शरारत करते व उसकी सूत की पिन्नियों को बिखेर देते। बुढिया गुरु माता गुजरी के पास गुरु गोबिंद सिंह की शिकायत लेकर जाती तो माता उन्हें पैसे देकर उन्हें खुश कर देती। माता गुजरी ने एक दिन गुरु साहब से पूछा तो उन्होंने बड़ी मासूमियत से कहा यदि वे उन्हें तंग नहीं करेंगें तो वह आपके पास कैसे आएगी? और जब आपके पास नहीं आएगी तो उसे पैसे कैसे मिलेंगें?


9 साल की उम्र में संभालानी पड़ी गुरु गद्दी

जब गुरु गोबिंद सिंह 9 साल के थे तब पिता गुरु तेग बहादुर जी ने कश्मीरी पंडितों की फरियाद पर दिल्ली के चांदनी चौंक में अपना बलिदान दिया। उसके बाद गुरु गोबिंद सिंह को गद्दी पर बैठाया गया।

9 साल के इस बालक ने गुरु गद्दी की लाज रखते हुए युद्ध कौशल के साथ-साथ संस्कृत, अरबी, फारसी व पंजाबी आदि कई भाषाओं में महारत हासिल की। अत्याचार के खिलाफ विरोध में खड़े हुए।


वाहे गुरु जी का ख़ालसा, वाहे गुरु जी की फतेह

गुरु गोबिंद सिंह के अनुसार जब सारे साधन निष्फल हो जायें, तब तलवार ग्रहण करना न्यायोचित है। गुरु गोबिन्द सिंह ने 1699 ई. में धर्म एवं समाज की रक्षा हेतु ही ख़ालसा पंथ की स्थापना की थी। उनका कहना था देश धर्म व मानवता की रक्षा के लिए जो तन-मन-धन सब न्यौछावर कर दे। जो निर्धनों, असहायों और अनाथों की रक्षा के लिए सदा आगे रहे वही सच्चा ख़ालसा है। ये संस्कार गुरु जी ने, उनकी परीक्षा पर खरे उतरे पंच प्यारों को अमृत छकाकर उनमें भर दिये। गरु जी ने सर्वधर्म समभाव का संदेश दिया। इतना ही नहीं धर्म की रक्षा के लिए गुरु जी के दो बड़े साहिबजादे 17 वर्षीय बाबा अजित सिंह, 15 वर्षीय बाबा जुझार सिंह ने युद्ध भूमि में अपनी शहादत दी तो 7 वर्षीय जोरावर सिंह और 5 वर्षीय फतेह सिंह को सरहंद में नवाब वजीर खां ने धर्मांतरण न करने पर दिवारों में जिंदा चुनवा दिया। माता गुजरी ने भी जो कि वजीर खां की कैद में थी, इसके बाद गुरु को याद कर अपनी देह त्याग दी थी।


महान विद्वान एवं ग्रंथकार

उन्होंने सिख्ख कानून को सूत्रबद्ध किया, काव्य की रचना की, गुरु ग्रंथ साहिब को पूरा किया व इसे गुरु रुप में सुशोभित किया। जफरनामा, विचित्र नाटक, चण्डी चरित्र, जाप साहिब, आदि उनकी महान कृतियां हैं। भाई मणि सिंह ने दसम ग्रंथ में उनकी सभी रचनाओं का संकलन किया।


2017 में गुरु गोबिंद सिंह की जयंती

भारतीय पंचाग के अनुसार गुरु गोबिंद सिंह की जयंती पौष मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी को मनायी जाती है। 2017 में यह तिथि दो बार आयेगी इसलिये यह वर्ष गुरु साहब के अनुयायियों के लिये बहुत ही पावन है। 2017 में संत सिपाही गुरु गोबिंद सिंह की पहली जयंती 5 जनवरी को मनायी जायेगी। इसी वर्ष 25 दिसंबर को भी पौष मास की शुक्ल सप्तमी तिथि है इसलिये इस दिन भी गुरु गोबिंद सिंह की जंयती मनायी जायेगी। 5 जनवरी 2017 को गुरू गोबिंद सिंह की 350वीं जयंती मनायी जायेगी।


संबंधित लेख

गुरु नानक जयंती - सतगुरु नानक प्रगटिया, मिटी धुंध जग चानण होआ   |   गुरु पूर्णिमा - गुरु की पूजा करने का पर्व   |   कबीर जयंती – जात जुलाहा नाम कबीरा

गोस्वामी तुलसीदास – राम के नाम को घर घर पंहुचाने वाला कवि   |   महर्षि वाल्मीकि - विश्व विख्यात ‘रामायण` के रचयिता   ।   महावीर जयंती 




एस्ट्रो लेख संग्रह से अन्य लेख पढ़ने के लिये यहां क्लिक करें

महाशिवरात्रि - देवों के देव महादेव की आराधना पर्व

महाशिवरात्रि - देव...

देवों के देव महादेव भगवान शिव-शंभू, भोलेनाथ शंकर की आराधना, उपासना का त्यौहार है महाशिवरात्रि। वैसे तो पूरे साल शिवरात्रि का त्यौहार दो बार आ...

और पढ़ें...
शिव मंदिर – भारत के प्रसिद्ध शिवालय

शिव मंदिर – भारत क...

सावन का महीना आ चुका है और इस पावन महीने में भगवान शिव की आराधना करने का पुण्य बहुत अधिक मिलता है। शिवभक्तों के लिये तो यह महीना बहुत खास होत...

और पढ़ें...
सूर्य ग्रहण 2017 जानें राशिनुसार क्या पड़ेगा प्रभाव

सूर्य ग्रहण 2017 ज...

26 फरवरी को वर्ष 2017 का पहला सूर्यग्रहण लगेगा। सूर्य और चंद्र ग्रहण दोनों ही शुभ कार्यों के लिये अशुभ माने जाते हैं। पहला सूर्यग्रहण हालांकि...

और पढ़ें...
नटराज – सृष्टि के पहले नर्तक भगवान शिव

नटराज – सृष्टि के ...

भगवान भोलेनाथ, शिव, शंकर, अर्ध नारीश्वर, हरिहर, हर, महादेव आदि अनेक नाम भगवान शिव के हैं। त्रिदेवों में सबसे लोकप्रिय भगवान शिव ही माने जाते ...

और पढ़ें...
सूर्य ग्रहण 2017

सूर्य ग्रहण 2017

ग्रहण इस शब्द में ही नकारात्मकता झलकती है। एक प्रकार के संकट का आभास होता है, लगता है जैसे कुछ अनिष्ट होगा। ग्रहण एक खगोलीय घटना मात्र नहीं ह...

और पढ़ें...