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स्वतंत्रता दिवस 2016 - आजादी का 70वां साल कैसी रहेगी ग्रहों की चाल


स्वतंत्रता दिवस 2016 - आजादी का 70वां साल कैसी रहेगी ग्रहों की चाल

सोमवार, 15 अगस्त 2016 को पूरा भारत स्वतंत्रता दिवस मनायेगा। यह भारत का 70वाँ स्वतंत्रता दिवस होगा। 15 अगस्त 1947 को भारत में प्रथम स्वतंत्रता दिवस मनाया गया था। तब से लेकर आज तक लगभग सात दशक बीत चुके हैं। इन सत्तर सालों में भारत ने अनेक उपलब्धियां हासिल की हैं। एक समय जो देश सोने की चिड़िया कहलाता था, उस पर मुगलों से लेकर अंग्रेंजों तक ने बहुत जुल्म ढहाये जिससे देश का आर्थिक, राजनीतिक, सामाजिक-सांस्कृतिक ताना बाना बिल्कुल ढहने की कगार पर पंहुच गया। 1947 में 14 अगस्त की रात जब 15 अगस्त में परिवर्तित हुई तो ब्रितानी हुकूमत का परचम नीचे गिरा भारत का तिरंगा शान से लहराने लगा। उस समय देश का नेतृत्व करने वाले लोगों के सामने देश के विकास की बड़ी चुनौति थी और साधन बहुत कम। जैसे तैसे इन सात दशकों में देश ने अपने आप को संभाला है और आज विश्व में अपना अलग मुकाम भी स्थापित किया है। भारत में ज्योतिषशास्त्र को बहुत मान्यता दी जाती है जिसके अनुसार यह माना जाता है कि देश हो या राज्य, समूह हों या व्यक्ति सभी पर उनके पैदा होने के समय ग्रहों की दशा व चाल का बहुत प्रभाव पड़ता है। आधी रात को आजादी दिये जाने के पिछे भी यही कारण है कि तत्कालीन ज्योतिषशास्त्रियों ने देश के नेताओं व अंग्रेज हुकूमत को आगाह किया था कि 15 अगस्त में दिन का समय ज्योतिषीय गणना के हिसाब से अनुकूल नहीं है इसी कारण उनकी राय पर आधी रात को तिरंगा लहराने का फैसला लिया गया। समय-समय पर विद्वान ज्योतिषशास्त्री भारत की कुंडली का आकलन कर देश के भविष्य का पूर्वानुमान लगाते हैं कि आने वाले समय में देश को किन परिस्थितियों से झूझना होगा, उसके सामने क्या चुनौतियां होंगी। एस्ट्रोयोगी ज्योतिषाचार्यों ने भी वर्तमान में ग्रहों की चाल के आधार पर देश की जन्मकुंडली एवं वर्षकुंडली के आधार पर पूर्वानुमान लगाया है कि आने वाला समय भारत के लिये कैसा रहेगा। आइये जानते हैं क्या कहना है एस्ट्रोयोगी ज्योतिषाचार्यों का? देश ही नहीं यदि आपको भी अपने भविष्य को लेकर कुछ शंकाएं हैं तो आप भी ज्योतिषाचार्यों से परामर्श ले सकते हैं। आपको करना सिर्फ यह है कि भारत की पहली एस्ट्रोलॉजर ऐप को यहां क्लिक कर डाउनलोड करें।


तकनीक के क्षेत्र में तरक्की करेगा भारत


भारत की आजादी के समयानुसार भारत की कुंडली वृषभ लग्न चंद्र राशि कर्क है जिसका नक्षत्र पुष्य है। राशि स्वामी चंद्रमा एवं नक्षत्र स्वामी शनि है। इस समय भारत पर चंद्रमा की महादशा चल रही है और अंतर्दशा भी चंद्रमा की ही है। भारत की कुंडली में कुछ अच्छे योग बन रहे हैं जिनमें पंचग्राही योग भारत के पराक्रम व वीरता को बढ़ाने वाला है वर्तमान में जिस प्रकार से भारत विश्व के पटल पर चमक रहा है उससे इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। आगे भी इसमें और वृद्धि होने की संभावना है। आकृति वापी योग से धन, ऐश्वर्य, मान-सम्मान विशेषकर कला क्षेत्र में भारत को मिल सकता है। वहीं बृहस्पति का छठे घर में होना सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह के परिणाम मिलने के संकेत दे रहा है। बृहस्पति के प्रभाव से एक और हमारे शत्रुओं को हानि होगी तो वहीं दूसरी और अपने ही शत्रु भी बन बैठेंगें। देश के अंदर हुई कुछ घटनाओं से बृहस्पति का यह प्रभाव सपष्ट हो जाता है। यही स्थिति फिलहाल आगे भी बनी रह सकती है। हालांकि सातवें स्थान में केतु के प्रभाव से प्रेम की भावना भी प्रबल होगी और भारत को खोयी हुई प्रतिष्ठा वापस मिलने के अवसर भी प्राप्त हो सकते हैं। इस समय भारत पर चंद्रमा की दशा चल रही है जिसके साथ मंगल भी विराजमान है। यह तकनीकी क्षेत्रों के लिये विशेष रुप से लाभकारी साबित हो सकता है। सैन्य बलों की ओर भी भारत विशेष ध्यान दे सकता है। चंद्रमा का स्वभाव ऐसा होता है कि वह किसी को अपना शत्रु नहीं समझता ऐसे में हम शत्रु देशों के प्रति भी मैत्री का हाथ बढ़ाने के लिये प्रयासरत रहें इसकी संभावनाएं हैं। वहीं लग्न कुंडली व लग्न के अनुसार कन्या राशि में गुरु के आने से शैक्षणिक व सांस्कृतिक क्षेत्रों में भी हम वैश्विक स्तर पर कुछ अच्छा कर सकते हैं।


आंतरिक कलह हो सकती है बड़ी चुनौति


भारत की वर्ष कुंडली अनुसार मंगल व शनि का 12वें घर में होना और शनि का मार्गी होना थोड़ा चिंता विषय हो सकता है जिसमें बाहरी शत्रु हम पर हावि हो सकता है, लेकिन इसी स्थान पर मंगल के होने से भारत भी अपने शत्रु को मुंहतोड़ जवाब देने में सक्षम है। वर्ष कुंडली में ही पराक्रम की मुंथा भारत के उत्साह व विश्वास को बढ़ाएगी। लग्न का चंद्रमा मन की गति और नूतन विचारों को सकारात्मक दिशा में ले जायेगा। गुरु का दशम स्थान में होना भारत को एक अच्छे सलाहकार के रुप में स्थापित कर सकता है। वहीं शुक्र, राहु और बुध का योग भाग्य स्थान में होना भारत के लिये परेशानियों का सबब भी हो सकता है। आंतरिक कलह बढ़ने के आसार हैं। बिमारी या आपदा से भी नुक्सान की संभावनाएं हो सकती हैं। सूर्य का अष्टम में होना राजनैतिक तौर पर प्रभावित कर सकता है। हो सकता है विपक्ष सरकार की मुश्किलों को बढ़ा दे या फिर राज्य सरकारों से केंद्र को अपेक्षित सहयोग न मिले। वहीं वृश्चिक राशि वाले देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी वर्तमान में चंद्रमा की दशा चल रही है और चंद्रमा में शनि चल रहा है। यह भी उन्हें लगातार प्रगति के पथ पर अग्रसर करेगा। हालांकि मुश्किलों से तो सभी को गुजरना पड़ता ही है। कुल मिलाकर आने वाला समय भारत के लिए यह बहुत अच्छा है लेकिन आंतरिक कलह और प्राकृतिक आपदाएं सबसे बड़ी चुनौति साबित हो सकती हैं।


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