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मकर संक्रांति पर यहां लगती है, आस्था की डूबकी


मकर संक्रांति पर यहां लगती है, आस्था की डूबकी

मकर संक्रांति के त्यौहार के बारे में तो सभी जानते हैं जो नहीं जानते उनके लिए हमने मकर संक्रांति पर विशेष आलेख भी प्रकाशित किया है। यह तो आपको पता ही है कि मकर संक्रांति पर सूर्यदेव की पूजा और गंगा स्नान का बहुत ज्यादा महत्व है, लेकिन हमारे इस आलेख में हम आपको बताने जा रहे हैं वो पांच महत्वपूर्ण स्थल जहां मकर संक्रांति के अवसर पर स्नान करना बहुत ही लाभकारी माना जाता है।

1. पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के निकट हुगली नदी के तट पर जहां गंगा बंगाल की खाड़ी में मिलती है, मकर संक्रांति के अवसर पर हर साल गंगा सागर मेले का आयोजन किया जाता है। लाखों की संख्या में श्रद्धालु यहां स्नान करने आते हैं, स्नान के पश्चात कपिल मुनि के मंदिर में मुनि, गंगा व भागीरथ की पूजा की जाती है।

पौराणिक कथा

पुराणों के अनुसार मान्यता है कि भागीरथ ने तप करके गंगा को पृथ्वी पर उतारा उनके रथ के पिछे-पिछे कपिल मुनि के आश्रम आयीं और उनके पितरों की राख को स्पर्श किया जिससे सभी राजकुमारों को मोक्ष मिला। वह दिन मकर संक्रांति का दिन था। माना जाता है कि तभी से यहां पर स्नान-दान, पूजा व मेले की परंपरा शुरु हुई।

2. इसके अलावा हरिद्वार में गंगा स्नान को महत्व दिया जाता है। कुंभ का मेला हो या अर्धकुंभ गंगा स्नान का पहला पवित्र स्नान मकर संक्रांति को ही किया जाता है। इस बार भी हरिद्वार में 15 जनवरी को अर्धकुंभ मेले का आयोजन किया जाएगा जिसमें लाखों श्रद्धालु गंगा स्नान कर सूर्य देव को अर्ध्य देंगें व दान करेंगें।                                                                             

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3. तीर्थराज प्रयाग जहां गंगा, यमुना और सरस्वती का संगम होता है इस संगम में आस्था की डूबकी लगाकर भी श्रद्धालु अपने आपको भाग्यशाली समझते हैं। वैसे भी संगम के कारण ही प्रयाग को तीर्थराज कहा जाता है।

4. परशुराम कुंड या कहें प्रभु कुठार अरुणाचल प्रदेश के लोहित जिले में स्थित है। इस कुंड से भगवान परशुराम की कथा जुड़ी है।

पौराणिक कथा

कहते हैं एक बार ऋषि जमादग्नि की पत्नी रेणुका ऋषिराज के नहाने के लिए पानी लेने गई लेकिन आने में उसे देर हो गई। क्रोधित ऋषि ने परशुराम को अपनी माता का वध करने का आदेश दिया। पिता की आज्ञानुसार परशुराम ने अपनी माता का वध कर दिया। परशुराम ने मातृवध के पाप से मुक्त होने के लिए मकर संक्रांति के दिन इस कुण्ड में स्नान किया था।

कहा जाता है तभी से यहां मकर संक्रांति पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं और कुंड में स्नान करते हैं। लोगों का विश्वास है कि इस कुंड में एक डूबकी लगाने से सारे पाप कट जाते हैं।

5.कुरुक्षेत्र के ब्रह्म सरोवर में स्नान को भी पवित्र माना जाता है। कहा जाता है कि भीष्म पितामह को इच्छा मृत्यु का वरदान प्राप्त था। युद्ध समाप्ति के बाद जब भीष्म सर सैय्या पर लेटे हुए थे, तो भगवान श्री कृष्ण सहित सभी पांडव व अनेक ऋषि मुनि उनसे मिलने आए। धर्म-कर्म व भगवान श्री कृष्ण के बारे में भीष्म ने विस्तार से पांडवों को बताया। तभी सूर्य दक्षिणायन से उतरायण में प्रवेश कर रहे थे। भगवान श्री कृष्ण का ध्यान करते हुए मकर संक्रांति के दिन ही भीष्म पितामह ने अपने प्राण त्यागे थे। हरियाणा में तो इस दिन को तभी से रूठों व बड़े-बुजूर्गों को मनाने व उनका आशीर्वाद पाने के दिन के रुप में मनाया जाता है व कुरुक्षेत्र के सरोवरों में पवित्र स्नान कर पिंडदान भी किया जाता है।

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