Skip Navigation Links
इच्छित फल प्रदान करेगी, साल 2015 की जन्माष्टमी


इच्छित फल प्रदान करेगी, साल 2015 की जन्माष्टमी

भगवान श्रीकृष्ण का जन्म पृथ्वी वासियों के लिए प्रारंभ से ही शुभ रहा है। जब भी भगवान के भक्तों पर कोई विपत्ति आई है तब-तब कृष्ण भगवान ने उस विपदा को खत्म किया है। इसका एक उदाहरण हम अभी भी देख सकते हैं। पिछले कुछ दिनों से पृथ्वीवासी एक शुभ योग की प्रार्थना कर रहे थे तो भगवान श्रीकृष्ण ने अपने जन्म दिवस के शुभ अवसर पर एक नहीं बल्कि कई शुभ योगों का निर्माण कर दिया है।


आगामी 5 सितम्बर 2015 को वैसे तो जन्माष्टमी का पवित्र त्यौहार है किन्तु इस दिन काफ़ी सालों बाद एक साथ इतने शुभ योगों का भी निर्माण हो रहा है। 5 सितम्बर का दिन, तिथि, वार, नक्षत्र और ग्रहों के अनुसार बहुत खास है। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि और अमृत सिद्धि योग के साथ कई अन्य शुभ योगों का विशेष संयोग बन रहा है।


श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर इस बार रोहिणी नक्षत्र का निर्माण हो रहा है यह नक्षत्र शास्त्रों में शुभ बताया गया है क्योंकि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म इसी नक्षत्र में, भादों के माह में हुआ था। 5 सितम्बर को सुबह 6.10 बजे से सर्वार्थ व अमृत सिद्धि योग भी शुरू होंगे, जो रात्रि 2.05  तक रहेंगे।


इस जन्माष्टमी पर बन रहे सर्वार्थ सिद्धि योग का विशेष महत्त्व है। इस योग में किसी भी कार्य का अगर शुभारंभ किया जाये तो वह शुभ माना जाता है। निश्चित वार और निश्चित नक्षत्र के संयोग से बनने वाले शुभ और अशुभ योगों में सर्वार्थ सिद्धि योग जैसा शुभ योग बनता है। यह योग सभी इच्छाओं तथा मनोकामनाओं को पूरा करने वाला है। ज्योतिषियों के अनुसार कोई भी नया कार्य जोकि सर्वार्थ सिद्धि योग में प्रारम्भ किया जाता है वह निश्चित ही सफलतापूर्वक सम्पन्न होता है तथा इच्छित फल प्रदान करता है। पुराने समय से यदि कोई कार्य रूका हुआ है या उस कार्य में बाधा उत्पन्न हो रही हैं तो भगवान श्रीकृष्ण जी की इस योग में पूजा करने से पीड़ा का अंत किया जा सकता है।


वहीँ दूसरी तरफ अमृत योग धन से संबंधित सभी परेशानियों को खत्म करने वाला माना जाता है। इस अमृत योग में अगर श्रीकृष्ण जी के साथ, धन की देवी लक्ष्मी जी की आराधना अगर कर ली जाये तो यह धन संबंधित समस्याओं का अंत कर सकती है।


इन योग के अलावा इस बार जन्माष्टमी पर, वृषभ राशि के चंद्रमा की साक्षी में हर्षल योग, बालव करण तथा रोहिणी नक्षत्र भी पड़ रहे हैं। 


जन्माष्टमी का शुभ मुहूर्त

पूजा समय - 23:12 से 23:58

अवधि – 0 घंटे 46 मिनट

मध्यरात्रि का क्षण- 23:35 

पारण समय- 06:31 (सूर्योदय के बाद, 6 सितम्बर 2015)

सर्वार्थ व अमृत सिद्धि योग प्रारंभ- 6:10 प्रातः से 02:05 रात्रि तक

अन्य उपयोगी लेख पढ़ने के लिए क्लिक करें।




एस्ट्रो लेख संग्रह से अन्य लेख पढ़ने के लिये यहां क्लिक करें

जगन्नाथ रथयात्रा 2018 - सौ यज्ञों के बराबर पुण्य देने वाली है पुरी रथयात्रा

जगन्नाथ रथयात्रा 2...

उड़िसा में स्थित भगवान जगन्नाथ का मंदिर हिन्दुओं के चार धामों में शामिल है। जगन्नाथ मंदिर, सनातन धर्म के पवित्र तीर्थस्थलों में से एक है। हिन्दू धर्मग्रन्थ ब्रह्मपुर...

और पढ़ें...
जगन्नाथ पुरी मंदिर - जानें पुरी के जगन्नाथ मंदिर की कहानी

जगन्नाथ पुरी मंदिर...

सप्तपुरियों में पुरी हों या चार धामों में धामसर्वोपरी पुरी धाम में जगन्नाथ का नामजगन्नाथ की पुरी भारत में ही नहीं बल्कि दुनिया भर में प्रसिद्ध है। उड़िसा प्रांत के प...

और पढ़ें...
चंद्र ग्रहण 2018 - 2018 में कब है चंद्रग्रहण?

चंद्र ग्रहण 2018 -...

चंद्रग्रहण और सूर्य ग्रहण के बारे में प्राथमिक शिक्षा के दौरान ही विज्ञान की पुस्तकों में जानकारी दी जाती है कि ये एक प्रकार की खगोलीय स्थिति होती हैं। जिनमें चंद्रम...

और पढ़ें...
गुप्त नवरात्र 2018 – जानिये गुप्त नवरात्रि की पूजा विधि एवं कथा

गुप्त नवरात्र 2018...

देवी दुर्गा को शक्ति का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि वही इस चराचर जगत में शक्ति का संचार करती हैं। उनकी आराधना के लिये ही साल में दो बार बड़े स्तर पर लगातार नौ...

और पढ़ें...
तुला राशि में बृहस्पति की बदली चाल – जानिए किन राशियों के करियर में आयेगा उछाल

तुला राशि में बृहस...

ज्ञान के कारक और देवताओं के गुरु माने जाने वाले बृहस्पति की ज्योतिषशास्त्र के अनुसार बहुत अधिक मान्यता है। गुरु बिगड़ी को बनाने, बनते हुए को बिगाड़ने में समर्थ माने ...

और पढ़ें...