Skip Navigation Links
जानें 2018 में शारदीय नवरात्रि तिथि


जानें 2018 में शारदीय नवरात्रि तिथि

मां दुर्गा को शक्ति की देवी माना जाता है। इसलिए सर्व इच्छाओं की पूर्ति करने वाली होने से परम पुरुषार्थ मोक्ष की प्राप्ति के लिए नौ दिन तक उनके अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। सनातन धर्म का यह एक महत्वपूर्ण पर्व है जिसे उत्तर भारत के साथ-साथ गुजरात, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और झारखंड में धूमधाम से मनाया जाता है।


शारदीय नवरात्र कब से कब तक

वर्ष 2018 में आश्विन नवरात्र व्रत 10 अक्तूबर से शुरु होकर 19 अक्तूबर तक रहेंगे।


मां दुर्गा के 9 रूप

मां दुर्गा के नौ रूपों में पहला स्वरूप 'शैलपुत्री' के नाम से विख्यात है। कहा जाता है कि पर्वतराज हिमालय के घर पुत्री रूप में उत्पन्न होने के कारण इनका नाम 'शैलपुत्री' पड़ा। दूसरे दिन मां के दूसरे स्वरूप 'ब्रह्मचारिणी' की पूजा अर्चना की जाती है। दुर्गा जी का तीसरा स्वरूप मां 'चंद्रघंटा' का है। तीसरे दिन की पूजा का अत्यधिक महत्व माना गया है। पूजन के चौथे दिन कूष्माण्डा देवी के स्वरूप की उपासना की जाती है। पांचवां दिन स्कंदमाता की उपासना का दिन होता है। स्कंदमाता अपने भक्तों की समस्त इच्छाओं की पूर्ति करती हैं। दुर्गा जी के छठे स्वरूप का नाम कात्यायनी और सातवें स्वरूप का नाम कालरात्रि है। मान्यता है कि सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा से ब्रह्मांड की समस्त सिद्धियों का द्वार खुलने लगता है। दुर्गा जी की आठवें स्वरूप का नाम महागौरी है। यह मनवांछित फलदायिनी हैं। दुर्गा जी के नौवें स्वरूप का नाम सिद्धिदात्री है। ये सभी प्रकार की सिद्धियों को देने वाली हैं।


शारदीय नवरात्र की तिथि

10 अक्तूबर, 2018 - इस दिन घटस्थापना और नवरात्र के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जायेगी। इस दिन दो नवरात्रि का उपवास एक साथ रखा जायेगा माता ब्रह्मचारिणी की पूजा भी 10 अक्तूबर को ही की जायेगी।

11 अक्तूबर, 2018 - नवरात्र के तीसरे दिन देवी दुर्गा के चन्द्रघंटा रूप की आराधना की जायेगी।

12 अक्तूबर, 2018 - नवरात्र पर्व के चौथे दिन मां भगवती के देवी कूष्मांडा स्वरूप की उपासना की जायेगी।

13 अक्तूबर, 2018 - नवरात्र के पांचवे दिन भगवान कार्तिकेय की माता स्कंदमाता की पूजा की जायेगी।

14 अक्तूबर, 2018 - इस दिन में पंचमी तिथि रहेगी जिसमें माता सरस्वती का आह्वान किया जायेगा।

15 अक्तूबर, 2018 -  आश्विन नवरात्र के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा जायेगी।

16 अक्तूबर, 2018 - नवरात्र के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा का विधान है।

17 अक्तूबर, 2018 - नवरात्र के आठवें दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है। इस दिन कई लोग कन्या पूजन भी करते हैं।

18 अक्तूबर, 2018 - नौवें दिन भगवती के देवी सिद्धिदात्री स्वरूप का पूजन किया जाता है। सिद्धिदात्री की पूजा से नवरात्र में नवदुर्गा पूजा का अनुष्ठान पूर्ण हो जायेगा। 

19 अक्तूबर 2018 - इस दिन दुर्गा विसर्जन किया जायेगा व विजयदशमी मनाई जायेगी।


नवरात्र में इंडिया के बेस्ट एस्ट्रोलोजर्स से गाइडेंस लें। अभी बात करने के लिये यहां क्लिक करें।


यह भी पढ़ें

शारदीय नवरात्र - कलश स्थापना मुहूर्त   |   माँ शैलपुत्री - नवरात्रि के पहले दिन की पूजा विधि   |  

 माँ ब्रह्मचारिणी - नवरात्रे के दूसरे दिन की पूजा विधि   |   माता चंद्रघंटा - तृतीय माता की पूजन विधि   |  

कूष्माण्डा माता - नवरात्रे के चौथे दिन करनी होती है इनकी पूजा   |   स्कंदमाता - नवरात्रि में पांचवें दिन होती है इनकी पूजा   |   

माता कात्यायनी - नवरात्रि के छठे दिन की पूजा   |   माता कालरात्रि - नवरात्रे के सातवें दिन होती है इनकी पूजा   |   

माता महागौरी - अष्टमी नवरात्रे की पूजा विधि   |   माता सिद्धिदात्री - नवरात्रे के अंतिम दिन की पूजा 




एस्ट्रो लेख संग्रह से अन्य लेख पढ़ने के लिये यहां क्लिक करें

कुम्भ मेला 2019 - जानें कुम्भ की कहानी

कुम्भ मेला 2019 - ...

कुंभ मेला भारत में लगने वाला एक ऐसा मेला है जिसका आध्यात्मिक व ज्योतिषीय महत्व तो है ही इसके साथ-साथ यह सामाजिक-सांस्कृतिक और वर्तमान में आर्थिक-राजनैतिक रूप से भी म...

और पढ़ें...
कुम्भ मेले का ज्योतिषीय महत्व

कुम्भ मेले का ज्यो...

भारत में कुम्भ मेले का सामाजिक-सांस्कृतिक, पौराणिक व आध्यात्मिक महत्व तो है ही साथ ही ज्योतिष के नज़रिये से भी यह मेला बहुत अहमियत रखता है। दरअसल इस मेले का निर्धारण...

और पढ़ें...
मोक्षदा एकादशी 2018 – एकादशी व्रत कथा व महत्व

मोक्षदा एकादशी 201...

एकादशी उपवास का हिंदुओं में बहुत अधिक महत्व माना जाता है। सभी एकादशियां पुण्यदायी मानी जाती है। मनुष्य जन्म में जाने-अंजाने कुछ पापकर्म हो जाते हैं। यदि आप इन पापकर्...

और पढ़ें...
गीता जयंती 2018 - कब मनाई जाती है गीता जयंती?

गीता जयंती 2018 - ...

कर्मण्यवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन |मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोSस्त्वकर्मणि ||मनुष्य के हाथ में केवल कर्म करने का अधिकार है फल की चिंता करना व्यर्थ अर्थात निस्वार्...

और पढ़ें...
विवाह पंचमी 2018 – कैसे हुआ था प्रभु श्री राम व माता सीता का विवाह

विवाह पंचमी 2018 –...

देवी सीता और प्रभु श्री राम सिर्फ महर्षि वाल्मिकी द्वारा रचित रामायण की कहानी के नायक नायिका नहीं थे, बल्कि पौराणिक ग्रंथों के अनुसार वे इस समस्त चराचर जगत के कर्ता-...

और पढ़ें...