Skip Navigation Links
राहु और शनि हैं, ईशांत शर्मा के गुस्से का मुख्य कारण


राहु और शनि हैं, ईशांत शर्मा के गुस्से का मुख्य कारण

सबसे लम्बे भारतीय क्रिकेटरों में से एक तेज गेंदबाज ‘ईशांत शर्मा’ आज अपना 27वां जन्मदिन मना रहे हैं। जहाँ एक तरफ भारतीय क्रिकेट टीम 22 सालों बाद श्रीलंका में टेस्ट सीरीज जितने में कामयाब हुई है वहीँ दूसरी तरफ ईशांत शर्मा को अंतिम टेस्ट के दौरान लगातार विरोधी खिलाडिय़ों से उलझने के कारण आईसीसी आचार संहिता के उल्लंघन के लिए एक टेस्ट के लिए निलंबित भी कर दिया गया है।


अभी तक अपने टेस्ट करियर में ईशांत 200  विकेट ले चुके हैं और ऐसा करने वाले वह भारत के सातवें खिलाड़ी हैं। ईशांत शर्मा ने सात बार एक पारी में पांच विकेट और एक बार टेस्ट मैच में 10 विकेट लेने का कारनामा भी किया है।


लंबे कद और लंबे बालों वाले ईशांत शर्मा का जन्म 02 सितम्बर 1988 को दिल्ली में हुआ था। पिछले कुछ साल ईशांत के लिए बिल्कुल भी सही नहीं गये हैं। कभी फिटनेस की समस्या तो कभी अपने खराब प्रदर्शन की वजह से इनको टीम से बाहर भी रहना पड़ा है। लेकिन वर्तमान समय इनके लिए काफी अच्छा चल रहा है। ईशांत शर्मा के जन्मदिन के मौके पर, आइये एक नजर डालते हैं कि इनका आने वाला समय इनके लिए कैसा रहेगा-

नाम- ईशांत शर्मा

जन्म तिथि- 2 सितंबर 1988

जन्म स्थान- दिल्ली

जन्म समय- ज्ञात नहीं।

लग्न- वृश्चिक, चन्द्र राशि- वृष, महादशा- राहु, अंतरदशा- शनि, प्रत्यांतर दशा- ब्रहस्पति, नक्षत्र- कृत्रिका तीसरा चरण।



वृश्चिक लग्न वाले गर्म स्वभाव के व्यक्ति होते हैं। बात-बात पर आने वाला इनका गुस्सा, इनके लिए एक बड़ी समस्या होती है। इस लग्न का स्वामी मंगल है और मंगल ग्रह का स्वभाव गर्म होता है। अभी ईशांत की कुंडली में मंगल नीच का चल रहा है और साथ ही साथ इनकी कुंडली में मंगल वक्री भी है तो छोटी-छोटी बातों पर इनको बहुत जल्दी गुस्सा आ रहा है।


वृश्चिक लग्न में अगर राहु और शनि चल रहे होते हैं तो यह दोनों ग्रह आदमी को नियंत्रण से बाहर कर देते हैं। अभी ईशांत की कुंडली में राहु की महादशा और शनि की अंतर दशा चल रही है। यह भी इनके लिए सही योग नहीं बना रहे हैं।


हाल ही में श्रीलंका सीरीज में इनका गुस्सा बार-बार देखा गया है और अंत में गुस्से की वजह से ही इनको अगली टेस्ट सीरीज में 1 टेस्ट ना खेल पाने की सजा भी मिली है।


इनकी कुंडली में 15 सितम्बर तक मंगल नीच का ही रहने वाला है उस समय तक ईशांत शर्मा को काफी दिक्कतों का सामना, मात्र अपने गुस्से के कारण हो सकता है।


स्वास्थ्य के लिहाज से जरूर कुछ समस्याओं का सामना, ईशांत को उठाना पड़ सकता है। 25 सितम्बर तक राहु और शनि एक साथ महादशा और अन्तरदशा में चल रहे हैं। तो इस समय में हो सकता है कुछ स्वास्थ्य सम्बंधित समस्याए उभर कर आ सकती हैं। लेकिन 25 सितम्बर के बाद राहु के साथ बुध आ जायेगा जो इनके लिए समय साबित हो सकता है।


इनके करियर की बात करें तो पिछला कुछ समय भले ही इनके लिए सही नहीं गया हो किन्तु अभी आने वाला एक साल इनके करियर के लिहाज से काफी अच्छा हो सकता है। कुंडली में बन रहा गजकेसरी योग इनको अभी से शुभ फल प्रदान कर रहा है। चंद्रमा और ब्रहस्पति का सप्तम(केंद्र) में एक साथ होने से इस योग का निर्माण होता है। इस योग के कारण आगामी सीरीज में भी इनका हरफनमौला प्रदर्शन जारी रह सकता है।


एस्ट्रोयोगी की ईशांत शर्मा को सलाह है कि अपने गुस्से पर काबू रखें। उपाय के लिए मंगल को लाल चीजों का दान व हनुमान चालीसा का प्रतिदिन पाठ, इनकी पीड़ा कम कर सकता है। साथ ही साथ ॐ हमं हनुमते नमः मन्त्र का कम से कम 108 बार प्रतिदिन जप, बेहद उपयोगी साबित हो सकता है।



एस्ट्रोयोगी ईशांत शर्मा को इनके जन्मदिवस की बधाई देता है और उम्मीद करता है कि आगामी समय इनके लिए अच्छा रहेगा।





एस्ट्रो लेख संग्रह से अन्य लेख पढ़ने के लिये यहां क्लिक करें

विजया एकादशी – क्या है इस एकादशी की व्रतकथा व पूजा विधि

विजया एकादशी – क्य...

फाल्गुन मास की कृष्ण एकादशी को विजया एकादशी कहा जाता है। मान्यता है कि इस एकादशी के व्रत से व्रती को हर कार्य में सफलता प्राप्त तो प्राप्त हो...

और पढ़ें...
सूर्य ग्रहण 2017

सूर्य ग्रहण 2017

ग्रहण इस शब्द में ही नकारात्मकता झलकती है। एक प्रकार के संकट का आभास होता है, लगता है जैसे कुछ अनिष्ट होगा। ग्रहण एक खगोलीय घटना मात्र नहीं ह...

और पढ़ें...
महर्षि दयानंद सरस्वती जयंती – वैदिक ज्ञान की अलख जगाने वाला संत

महर्षि दयानंद सरस्...

महर्षि दयानंद सरस्वती का जन्म गुजरात के टकारा गांव में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ। हिंदू पंचाग के अनुसार उस दिन फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की ...

और पढ़ें...
राहू देता है चौंकाने वाले परिणाम

राहू देता है चौंका...

ज्योतिषशास्त्र के अनुसार सभी जातकों का भूत वर्तमान व भविष्य जातक की जन्मकुंडली में ग्रहों की दशाओं से प्रभावित होता है। इसी प्रभाव के कारण कु...

और पढ़ें...
चैत्र मास - पर्व व त्यौहार

चैत्र मास - पर्व व...

चैत्र मास का हिंदू धर्म में धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से बहुत अधिक महत्व है। क्योंकि फाल्गुन और चैत्र ये दो मास प्रकृति के बहुत ही खूबसूरत मा...

और पढ़ें...