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Skandmata Chalisa: स्कंदमाता चालीसा देवी दुर्गा के पांचवें स्वरूप मां स्कंदमाता को समर्पित एक पवित्र स्तुति है। मां स्कंदमाता भगवान स्कंद (कार्तिकेय) की माता हैं और मातृत्व, करुणा और संरक्षण की देवी मानी जाती हैं।
स्कंदमाता चालीसा का पाठ करने से मन में शांति और भक्ति का भाव बढ़ता है। मान्यता है कि सच्चे मन से मां स्कंदमाता की आराधना करने से परिवार में सुख-समृद्धि और संतुलन बना रहता है।
नवरात्रि के दौरान स्कंदमाता की पूजा और चालीसा का पाठ विशेष फलदायी माना जाता है। जो लोग नियमित रूप से इस चालीसा का पाठ करते हैं, उन्हें मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त होने की मान्यता है। मां स्कंदमाता की कृपा से जीवन में प्रेम, धैर्य और संतुलन का अनुभव हो सकता है।
स्कंद माता चालीसा (Skandmata Chalisa)
॥दोहा॥
सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया।
शुभदास्तु सदा देवी स्कंदमाता यशस्विनी॥
॥चालीसा॥
जयति जयति जगत जननी, जय स्कंद माता। दीनन पर करुणा करति, सदा सुखदाता॥
सिंह वाहिनी दुर्गा, धरी स्कंद रूप। पुत्र कार्तिकेय के कारण, जग में प्रसिद्ध॥
पहाड़ों पर वास करे, सिंह संग सवारी। कमलासन पर विराजती, शुभ्र मूरत प्यारी॥
अत्यन्त मनोहर रूप है, ममता की मूरत। कृपा दृष्टि से भरे सदा, भक्तन के संकट॥
चतुर्भुजा धारी माता, श्वेत कमल पे बैठी। संतान सुख देने वाली, दुख हरण करती॥
कमल पुष्प हाथों में, धरे शांति स्वरूपा। सिंह वाहन पर आरूढ़ा, महिमा अनुपम रूपा॥
जगत पालिका है तू, अघ विनाशिनी माता। तेरे चरणों में नमन, जयति जय माता॥
ध्यान धरें जो भक्त तेरे, सब कष्ट मिट जाते। सकल मनोरथ पूर्ण करें, मनवांछित फल पाते॥
तेरे दर पे जो भी आए, खाली ना जाता। दीन दुखी और निर्धन का, संकट हर जाता॥
शरण में आए जो भी तिहारी, उनको सुख देना। भव सागर से तार कर, भव भय हर लेना॥
कृपा दृष्टि सदा रखना, संकट हारिणी माता। सकल जगत की पालनहारी, जयति जय माता॥
जयति जयति जय स्कंदमाता, हम सबकी अंबा। संतान सुख देने वाली, हमारी तुम शांभवी॥
सिंहासन पर विराजती, श्वेत कमल पे बैठी। दीनन पर कृपा कर, हमारे कष्ट हरती॥
॥दोहा॥
सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया।
शुभदास्तु सदा देवी स्कंदमाता यशस्विनी॥
मां स्कंदमाता नवदुर्गा का पांचवां स्वरूप हैं।
इनकी पूजा से परिवार में सुख-शांति और संतुलन बढ़ता है।
यह चालीसा संतान सुख और पारिवारिक खुशहाली के लिए शुभ मानी जाती है।
नियमित पाठ से मन में शांति और सकारात्मकता का अनुभव होता है।
स्कंद माता चालीसा पाठ की विधि
स्कंदमाता चालीसा का पाठ करने से पहले मन और वातावरण को शांत और पवित्र रखना आवश्यक माना जाता है। सही विधि से पाठ करने पर भक्त अधिक श्रद्धा और एकाग्रता के साथ मां की आराधना कर पाते हैं।
सबसे पहले पूजा स्थान को साफ करें और मां स्कंदमाता की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
दीपक और अगरबत्ती जलाकर मां को प्रणाम करें।
शांत मन से आसन पर बैठकर मां स्कंदमाता का ध्यान करें।
हाथ जोड़कर श्रद्धा के साथ स्कंदमाता चालीसा का पाठ प्रारंभ करें।
पाठ के दौरान मन को एकाग्र रखें और बीच में उठने से बचें।
चालीसा समाप्त होने के बाद “जय मां स्कंदमाता” का जयकारा लगाकर आरती करें।
अंत में मां को फल या मिठाई का नैवेद्य अर्पित करें और अपनी मनोकामनाएं प्रार्थना के रूप में निवेदित करें।
स्कंद माता चालीसा पाठ के नियम
चालीसा पाठ के दौरान कुछ सामान्य नियमों का पालन करना शुभ माना जाता है।
चालीसा का पाठ सुबह सूर्योदय के समय या ब्रह्ममुहूर्त (सुबह लगभग 4 से 6 बजे के बीच) करना शुभ माना जाता है।
नवरात्रि के पांचवें दिन या पूरे नवरात्रि में प्रतिदिन चालीसा पढ़ना विशेष फलदायक माना जाता है।
पाठ से पहले स्नान कर स्वच्छ और साफ वस्त्र धारण करें।
पूजा स्थान को साफ और पवित्र रखें।
मां स्कंदमाता को फूल, दीपक, अगरबत्ती, चंदन और नैवेद्य अर्पित करें।
पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके आसन पर बैठना शुभ माना जाता है।
पाठ शुरू करने से पहले मन में मां स्कंदमाता का ध्यान करें और तीन बार “ॐ देवी स्कंदमातायै नमः” मंत्र का जाप कर सकते हैं।
स्कंद माता चालीसा का पाठ क्यों करें?
जब जीवन में पारिवारिक संतुलन, मानसिक शांति और प्रेम की आवश्यकता महसूस हो, तब मां स्कंदमाता की आराधना विशेष रूप से लाभकारी मानी जाती है।
मां स्कंदमाता मातृत्व का प्रतीक हैं। उनकी आराधना से संतान सुख और परिवार में प्रेम व सहयोग बढ़ने की मान्यता है।
नियमित रूप से चालीसा का पाठ करने से मन शांत होता है और जीवन में सकारात्मक सोच विकसित होती है।
मां स्कंदमाता की भक्ति से व्यक्ति के भीतर भक्ति और आध्यात्मिक जागरूकता बढ़ सकती है।
नवरात्रि का पांचवां दिन मां स्कंदमाता को समर्पित होता है। इस दिन चालीसा का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
श्रद्धा और विश्वास के साथ स्कंदमाता चालीसा का पाठ करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा और शांति बनी रहती है।
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