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Grah Meaning In Hindi: वैदिक ज्योतिष में नौ ग्रहों को बहुत महत्व दिया जाता है। इन नौ ग्रहों की अपनी विशेषता और प्रभाव हैं। आप यह भी मान सकते हैं कि ज्योतिष मुख्य रूप से ग्रहों और उनकी उनकी दशाओं पर आधारित होती है। ज्योतिषी भी इन्हीं ग्रहों की गणना के आधार पर आपके लिए भविष्यवाणियां तैयार करता है। यहां इस पेज पर आपको ग्रहों से जुड़ी हर जानकारी प्राप्त होगी। जैसे ज्योतिष में नौ ग्रह कौन-से हैं, उनकी क्या भूमिका है, उसका असर और महत्व क्या रहेगा। यहां आपको यह संपूर्ण जानकारी आसान भाषा में समझने को मिलेगी।
वैदिक ज्योतिष में ग्रह सिर्फ आकाश में घूमने वाले पिंड नहीं हैं। आप इनको इस तरह समझ सकते हैं कि यह नौ अलग-अलग प्रकार की ऊर्जाएं हैं जो जीवन पर विभिन्न प्रकार से प्रभाव डालती है। हर ग्रह की अपनी शक्ति, स्वभाव और भूमिका होती है।
जिस समय आप जन्म लेते हैं, उस दौरान ग्रह जहां पर होते हैं, वही आपकी कुंडली बनाते हैं। इसके बाद यही स्थिति आपके व्यक्तित्व, स्वभाव, सोच, रिश्तों, करियर, और जीवन में आने वाले अवसरों पर प्रभाव डालती है।
सरल शब्दों में कहें तो, जीवन के अलग-अलग क्षेत्रों को चलाने में यह महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनमें से कुछ ग्रह आपको ताकत देते हैं, कोई अनुशासन सिखाता है तो कोई आपकी भावनाओं पर असर दिखाता है। कुछ को वैदिक ज्योतिष में बहुत शुभ माना जाता है वहीं कुछ ग्रहों को कम शुभ माना जाता है।
जैसा कि आपने ऊपर जाना वैदिक ज्योतिष में कुल नौ ग्रह माने जाते हैं। इन नौ ग्रहों में से दो को छाया ग्रह का दर्जा प्राप्त है। यानी मुख्य रुप से कुल 7 ग्रहों को अधिक महत्व दिया जाता है। इनके बारे में जानकर और समझकर आप यह अनुभव कर सकते हैं कि आपके जीवन में इस दौरान क्या बदलाव आ सकते हैं।
सबसे पहले जान लेते हैं कि नव ग्रह कौन से हैं-
सूर्य- ग्रहों का राजा सूर्य आत्मविश्वास, पहचान और नेतृत्व से जुड़ा होता है।
चंद्रमा- आपकी मन, भावनाएँ और स्थिरता पर असर डालता है।
मंगल- ऊर्जा, साहस और निर्णय लेने की क्षमता बढ़ाता है।
बुध- ग्रहों का राजकुमार बुद्धि, संवाद और सीखने से जुड़ा होता है।
बृहस्पति- देव गुरु बृहस्पति को ज्ञान, विकास और अवसरों का ग्रह माना जाता है।
शुक्र- आपके जीवन में प्रेम, आकर्षण, कला और सुख-सुविधाओं से संबंधित होता है।
शनि- कर्मफल दाता शनि को अनुशासन, धैर्य और मेहनत का ग्रह माना जाता है।
राहु- इच्छाएँ, बदलाव और नए अनुभव लाता है।
केतु- आध्यात्मिकता, सीख और भीतर की समझ से जुड़ा।
राहु और केतु दो ऐसे ग्रह हैं जिन्हें छाया ग्रह कहा जाता है। ऐसा इसलिए हैं क्योंकि यह ग्रह बाकि ग्रहों की तरह आकाश में दिखाई नहीं देते। यह वास्तविकता में चंद्रमा की कक्षा और सूर्य की कक्षा के मिलने वाले बिंदु हैं। हालांकि फिर भी ज्योतिष में इनकी चाल को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है
छाया ग्रह हमारे जीवन में गहरी मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक परतों को प्रभावित करते हैं। इन्हें समझने से हम अपने डर, इच्छाओं और जीवन में आने वाले बदलावों को बेहतर तरीके से देख पाते हैं।
छाया ग्रह अपने जीवन में मनोवैज्ञानिक और और भावनात्मक कारकों को प्रभावित करते हैं। अगर आप इनको समझेंगे तो आपको अपने डर, इच्छाओं, और जीवन में आने वाले बदलावों के बारे में बेहतर तरीके से पता चल सकता है।
वैदिक ज्योतिष के अनुसार, सभी प्रमुख ग्रह पृथ्वी के चारों ओर घूमते हैं। जिसके चलते इनका प्रभाव सभी जातकों पर पड़ता है। आइए जानते हैं कि सभी नौ ग्रह आपके जीवन पर कैसे प्रभाव डालते हैं-
सबसे पहले हम बात करते हैं, सूर्य ग्रह की। वैदिक ज्योतिष में सूर्य को पिता का कारक माना जाता है। आकाशीय मंत्रिमंडल के अधिपति के रूप में इस ग्रह को जाना जाता है। ज्योतिष में सूर्य को सभी के बीच सबसे गर्म व ऊर्जावान ग्रह कहा गया है। यह प्रतिष्ठा या समाज में आधिकारिक स्थिति को इंगित करता है। यह हमारे आत्मा का प्रतिनिधित्व करता है। यह सभी ग्रहों को ऊर्जा प्रदान करता है। यह अपनी चमक से पूरी दुनिया को रोशन करता है। सूर्य सिंह राशि का स्वामी है और यह...और पढ़ें
वैदिक ज्योतिष में दूसरा ग्रह चंद्रमा है। इसे माता का कारक माना जाता है। इसके साथ ही यह हमारे मन को भी प्रभावित करता है। चंद्रमा का हमारे समुंद्र व जलाशयों व नदियों पर भी काफी प्रभाव है। ज्वार भाटा चंद्रमा के ही कारण आता है। चंद्रमा को सेलेस्टियल कैबिनेट की "रानी" के रूप में भी जाना जाता है। ज्योतिष की माने तो चंद्रमा यदि किसी जातक के जन्म कुंडली में सूर्य के विपरीत सीध में होता है, तो यह एक अच्छा योग बनाता है क्योंकि सूर्य, चंद्रमा की ऊर्जा को बढ़ाने का कार्य करता है। चंद्रमा कर्क राशि स्वामी...और पढ़ें
वैदिक ज्योतिष में बुध ग्रह बैद्धिक की गुणवत्ता का प्रतीक माना जाता है। बुध एक ऐसा ग्रह है जो किसी व्यक्ति की तार्किक क्षमता को प्रदर्शित करता है। कहते हैं जिसका बुध मजबूत होता है उसके अंदर गणना करने के की क्षमता लोगों से भिन्न होती है। क्योंकि बुद्ध गणित से संबंधित है और यह ज्योतिषीय ज्ञान भी प्रदान करता है। यह सूर्य के बहुत करीब है। बुद्ध को ईश्वर का दूत कहा जाता है। इसके साथ ही यह जातक के वाणी को भी प्रभावित करता है और हमारी संचार क्षमता से संबंध रखता है। ज्योतिष शास्त्र में बुद्ध को मिथुन और कन्या राशियों...और पढ़ें
वैदिक ज्योतिष में शुक्र ग्रह वह है जिसे हर कोई चाहता है कि यह प्रबल हो। ज्योतिष में शुक्र प्रेम, रोमांस, सैंदर्य और किसी भी जातक के जीवन में हर प्रकार के संबंधों का कारक है। यह पुरुषों की कुंडली में पत्नी, प्रेमिका या किसी भी लड़की का प्रतिनिधित्व करता है। ज्योतिषियों की माने तो यह विवाह के लिए भी जाना जाता है। इसके साथ ही व्यक्ति के जीवन में सुख समृद्धि का भी प्रतिनिधित्व करता है। शुक्र ज्योतिष में वृषभ और...और पढ़ें
मंगल ग्रह को वैदिक ज्योतिष में क्रोध का कारक माना जाता है। इसके साथ ही यह जातक के पराक्रम को भी बढ़ाने का काम करता है। मंगल हमारी लड़ने की क्षमता और आक्रामकता को दर्शाता है। यह हमें हर प्रकार के परिस्थिति से निपटने के लिए साहस प्रदान करता है। इसी के चलते हम लड़ने के लिए तैयार रहते हैं। कुंडली में मंगल प्रभावी है तो जातक सेना, पुलिस, सुरक्षा व अग्नीशमन दल जैसे क्षेत्र में काम करते हैं। वैदिक ज्योतिष में मंगल मेष और वृश्चिक का स्वामी...और पढ़ें
गुरु ज्ञान व बुद्धि का कारक ग्रह (planet) है। सभी ग्रहों में सबसे ज्यादा शुभ ग्रह है। ज्योतिष के अनुसार जिन लोगों पर गुरु की कृपा होती है उनकी कुंडली में कई अरिष्ट दोषों का प्रभाव कम हो जाता है। गुरु मीन और धनु राशि का स्वामी है, यह कर्क में उच्च और मकर में नीच के होते हैं। स्त्री के कुंडली में गुरू पति का प्रतिनिधित्व करता है। इसके साथ ही जातक के भीतर गुरू आध्यात्म का भी कारक है। यह जातक...और पढ़ें
वैदिक ज्योतिष में शनि ग्रह को न्याय का प्रतिनिधित्व करने वाला ग्रह माना जाता है। इसे कर्म फलदाता भी कहा जाता है। यानी की यह जातक के कर्म के मुताबिक फल प्रदान करता है। यह वह ग्रह है जिसे ज्योतिष शास्त्र में निर्णय के लिए जाना जाता है। शनि जातक को वर्तमान समय में किए गए आपके कर्म के अनुसार न्याय करता है और उसके अनुसार ही फल देता है। शनि अन्य ग्रहों के मुकाबले धीमा ग्रह है और इसी के कारण यह जातक को परिणाम देने में समय लगता है। शनि तुला राशि में उच्च और मेष में नीच का होता है। यह राशि चक्र के मकर...और पढ़ें
वैदिक ज्योतिष में राहु को ग्रह नहीं माना जाता है। ज्योतिष में इसे छाया ग्रह कहा जाता है। यह एक ग्रह नहीं है, मूल रूप से एक ग्रह चंद्रमा का उत्तर नोड है। राहु एक असुर का शीर्ष है। यह हमेशा भौतिकवादी चीजों के बाद चलता है। यह ग्रह शनि की तरह व्यवहार करता है। यह माना जाता है कि यह वृषभ / मिथुन में उच्च का और वृश्चिक / धनु में नीच का होता है। राहु के लिए कोई विशिष्ट संकेत नहीं है क्योंकि यह उस स्थान और ग्रह की तरह व्यवहार...और पढ़ें
जैसा की हमने पहले ही बता दिया है कि केतु एक छाया ग्रह (grah) है। इसे आमतौर पर चंद्रमा के दक्षिण नोड के रूप में जाना जाता है। यह असुर की पुंछ है। केतु सांसारिक प्रसिद्धि और भोग में रुचि नहीं रखता है। यह राहु के विपरीत है। केतु केवल आत्मज्ञान दिलाने का कार्य करता है। ज्योतिष में केतु जातक के पिछले जीवन के कर्मों, संचित कर्म आदि को दर्शाता है। केतु वृश्चिक व धनु में उच्च और वृषभ व मिथुन में ये नीच का होता है।
इसलिए, ज्योतिष में ग्रह बहुत महत्वपूर्ण हैं। यह दर्शाता है कि पृथ्वी पर जीवन का संचालन किस प्रकार से किया जा रहा है। ज्योतिषी को सही भविष्यवाणी प्रदान करने के लिए किसी जातक की कुंडली में विराजे सभी ग्रहों का ध्यान पूर्वक विश्लेषण करना होता है इसके बाद...और पढ़ें
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| दिनाँक | Monday, 05 January 2026 |
|---|---|
| तिथि | कृष्ण तृतीया |
| वार | सोमवार |
| पक्ष | कृष्ण पक्ष |
| सूर्योदय | 7:15:15 |
| सूर्यास्त | 17:38:36 |
| चन्द्रोदय | 19:50:25 |
| नक्षत्र | अश्लेषा |
| नक्षत्र समाप्ति समय | 36 : 19 : 46 |
| योग | विष्कुम्भ |
| योग समाप्ति समय | 22 : 47 : 4 |
| करण I | वणिज |
| सूर्यराशि | धनु |
| चन्द्रराशि | कर्क |
| राहुकाल | 08:33:11 to 09:51:06 |