- Home
- Planet
- Retrograde
- Ketu
Ketu Vakri 2026: वैदिक ज्योतिष में केतु को हमेशा से एक रहस्यमयी, गूढ़ और छाया ग्रह के रूप में देखा गया है। आप अगर पुरानी ज्योतिषीय विद्या पढ़ें तो केतु की खासियत यही बताई जाती है कि यह ग्रह हमेशा वक्री अवस्था में ही रहता है। यानी यह अपनी चाल को लेकर सीधा-साधा कोई व्यवहार नहीं करता। इसी वजह से इसके प्रभाव भी सामान्य ग्रहों जैसे नहीं माने जाते। कई बार उलटे असर, कई बार बेहद गहरा आध्यात्मिक प्रभाव और कई बार ऐसे परिणाम कि जातक खुद नहीं समझ पाता कि उसके जीवन में यह बदलाव क्यों आ रहा है।
साल 2026 में केतु की वक्री अवस्था को लेकर यह सवाल उठता है कि आखिर यह समय जातक के लिए क्या लेकर आएगा। क्या यह समय चुनौती वाला होगा या किसी नई आध्यात्मिक दिशा की ओर लेकर जाएगा। इसी पूरे विषय को हम विस्तार से समझते हैं।
वैदिक ज्योतिष में केतु का असर एक ही बात तय करती है कि यह आपकी कुंडली में कहां स्थित है और किन ग्रहों के साथ बैठा है। केतु किसी अकेली ऊर्जा की तरह काम नहीं करता। इसके प्रभाव हमेशा इसके साथी ग्रह, इसकी युति और इसके भाव के अनुसार तय होते हैं। इसी वजह से एक ही केतु किसी जातक को आध्यात्म में रुचि दे देता है और किसी अन्य व्यक्ति को उलझन, भ्रम और जीवन में रुकावटें भी दे सकता है।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार केतु का प्रभाव कुंडली का आकलन करते समय बहुत ही जरूरी माना जाता है। राहु–केतु को छाया ग्रह कहा जाता है, लेकिन इस छाया का असर इतना भारी हो सकता है कि पूरी कुंडली की दिशा बदल जाए। इसलिए भविष्यफल निकालते समय केतु की स्थिति को नजरअंदाज करना कभी भी सही नहीं माना जाता।
लोग अक्सर केतु को केवल अशुभ ग्रह मानकर चल देते हैं, जबकि यह आध्यात्म, ज्ञान, अनुभव और वैराग्य का महत्वपूर्ण कारक भी होता है। अगर आपकी कुंडली में केतु प्रभावी हो जाए तो जातक के भीतर आध्यात्म की ओर झुकाव बढ़ता है। कई लोग जीवन में ऐसे मोड़ पर पहुंच जाते हैं जहां वे सांसारिक शोर-शराबे से दूर होकर मन की शांति खोजने लगते हैं। यह उसी प्रभाव का हिस्सा है।
अच्छी स्थिति में केतु व्यक्ति को आकर्षक व्यक्तित्व, तेज दिमाग, रहस्यमयी आकर्षण और गहरी समझ भी देता है। ऐसे लोग किसी बात को सतही तौर पर नहीं लेते। वे हर विषय को गहराई से समझने की प्रवृत्ति रखते हैं।
अगर कुंडली में केतु मजबूत हो जाए और उससे जुड़ा घर भी सहयोग दे तो व्यक्ति का आध्यात्मिक स्तर बहुत ऊपर उठ सकता है। ऐसे जातक दुनिया की मोह-माया में ज्यादा दिलचस्पी नहीं रखते। उनके लिए ज्ञान, ध्यान, शांति और मन की स्वतंत्रता ज्यादा मायने रखती है। कई बार तो ऐसा भी होता है कि जातक परिवार, प्रेम और रिश्तों से भी दूरी बनाने लगता है।
हालांकि अगर साथ में गुरु का प्रभाव भी हो तो जातक आध्यात्म तो चुनता है, लेकिन संसार से मुंह नहीं मोड़ता। वह अपनी जिम्मेदारियाँ निभाते हुए भी भीतर से एक आध्यात्मिक यात्रा पर चलता है।
अगर कुंडली में केतु कमजोर पड़े या अशुभ ग्रहों के साथ युति बना ले तो इसका असर जातक को क्रूर, कठोर और असंवेदनशील भी बना सकता है। ऐसा व्यक्ति धर्म के रास्ते से भटक सकता है। वह दूसरों का सम्मान करने में कमी दिखाता है। जीवन के कई क्षेत्रों में रुकावटें आ सकती हैं। करियर में आगे बढ़ने के मौके अक्सर हाथ से निकल जाते हैं या बार-बार कोई न कोई समस्या आती रहती है।
परिवार में विवाद, अचानक मानसिक तनाव, निर्णयों में भ्रम और अनिश्चितता भी इसी कमजोर केतु के प्रभाव के परिणाम होते हैं। इसलिए केतु की स्थिति को नजरअंदाज करना ही सबसे बड़ी गलती माना जाता है।
अब बात करते हैं उस असली मुद्दे की, जिसका जवाब हर जातक जानना चाहता है। केतु की वक्री अवस्था 2026 में 12 भावों पर क्या असर डालेगी। हर भाव का अपना महत्व होता है और केतु का प्रभाव उसी अनुसार परिणाम देता है।
ज्योतिष में उल्लेखित 12 भाव के मुताबिक देखा जाए तो वक्री केतु का प्रभाव अलग –अलग होता है।
पहले भाव में केतु का वक्री होकर विराजना जातक के लिए स्वास्थ्य व परिवार के लिए ठीक नहीं माना जाता है। ऐसे में जातक को सेहत व पारिवारिक मामलों में परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
दूसरे भाव में वक्री केतु का बैठना जातक के धन पक्ष के लिए शुभ नहीं होता है। जातक की वाणी कोठोर हो जाती है। ऐसे जातक धन संचय करने में असफल होते हैं। चोट लगने व दुर्घनाएं होने की संभावना बनी रहती है।
तीसरे भाव में केतु यदि वक्री अवस्था में है तो यह जातक के पराक्रम में कमी लाता है। जातक का भाग्य भी उसका साथ नहीं देता है। यानी कि जातक को किसी भी कार्य को सफलता पूर्वक करने में परेशानियां आती हैं।
चौथे भाव का वक्री केतु जातक के सुख को कम करने कार्य करता है। जातक के कार्यक्षेत्र में उतार-चढ़ाव व परिवर्तन होता रहता है। जिसके चलते जातक को स्थिरता नहीं मिलती है। स्थिरता न मिलने से जातक तनाव में आ जाता है।
पंचम भाव में वक्री केतुु (Ketu Retrograde) का होना जातक के परिवार व प्रेम तथा सामाजिक जीवन में परेशानियां लेकर आता है। संतान सुख से भी विमुख हो सकता है। धन के मामले में भी वक्री केतु समस्याएं ले आता है।
छठे भाव में वक्री केतु का होना जातक के लिए रोग व मूत्र संबंधी विकार देने वाला बन जाता है। जातक सेहत बिगड़ता रहता है। इसके साथ ही जातक में आत्मबल व ऊर्जा की कमी रहती है।
सातवें भाव में वक्री केतु का प्रभाव जातक के विवाह में देरी का भी कारण बन सकता है। साथी के अन-बन होने के पीछे भी केतु हो सकता है। साथी के सेहत पर भी यह दुष्प्रभाव डालता है।
पत्रिका के आठवें भाव में वक्री केतु का होना जातक के लिए ठीक नहीं माना जाता है। ऐसे में जातक आकस्मिक दुर्घटना का शिकार हो सकता है। जातक अक्सर कमज़ोरी भी महसूस कर सकता है।
नौंवें भाव में वक्री केतु का प्रभाव जातक के भाग्य पर पड़ता है। जातक को उसके भाग्य का साथ नहीं मिलता है। परिश्रम करने के बाद भी जातक मन मुताबिक परिणाम नहीं पाता है।
दशम भाव में केतु का वक्री होकर बैठना जातक के कार्यक्षेत्र के लिए अशुभ संकेत माना जाता है। ऐसी स्थिति में जातक के कार्य में रुकावटे आती रहती हैं जिसके चलते जातक अपेक्षा से कम तरक्की कर पाता है।
ग्यारहवें भाव का वक्री केतु जातक के धन में कमी, बनते कामों में रुकावटें, प्रेम संबंधों में भी रुकावटें पैदा करने वाला होता है। जातक धन और प्रेम में निर्बल बना रहता है।
बारहवें भाव में वक्री केतु (Ketu Retrograde) जातक के रुके हुए धन को निकालने वाला, फ़िजूल खर्ची करने वाला बनाता है। धन को रहकर भी उसको स्थिर करने वाला नहीं होता है, रोग संबंधी विकार भी बनाता है।
केतु वक्री 2026 की ऊर्जा साधारण नहीं है। यह ग्रह जहां आपकी आत्मा के स्तर पर बड़े बदलाव लाता है, वहीं यह जीवन के व्यावहारिक हिस्सों पर भी सीधा असर डालता है। कुंडली के भाव, युति, और स्थितियां यह तय करती हैं कि यह वक्री अवस्था आपके लिए चुनौती होगी या बदलाव का नया रास्ता।
अगर केतु अनुकूल हो तो जातक को गहरी समझ, आध्यात्मिक जागृति, शांत मन और मजबूत अंतर्ज्ञान देता है। लेकिन अगर यह प्रतिकूल हो तो जीवन में उलझनें, अवरोध और मानसिक तनाव भी पैदा कर सकता है।
इसलिए साल 2026 में केतु वक्री का सही असर समझने के लिए कुंडली की व्यक्तिगत स्थिति देखना सबसे आवश्यक है।