ग्राहक सेवा
9999 091 091

राहु गोचर 2022

राहु खगोलीय दृष्टि से कोई ग्रह भले न हो लेकिन ज्योतिष में राहू का बहुत अधिक महत्व है। राहु के साथ केतु का भी नाम लिया जाता है क्योंकि दोनों एक दूसरे के विपरीत बिंदुओं पर समान गति से गोचर करते हैं। राहु को जन्म से ही वक्री ग्रह माना जाता है। पौराणिक ग्रंथों में राहु एक असुर हुआ करता था जिसने समुद्र मंथन के दौरान निकले अमृत की कुछ बूंदे गटक ली थी। सूर्य और चंद्रमा को तुरंत इसकी भनक लगी और सूचना भगवान विष्णु को दी इसके पश्चात अमृत गले से नीचे उतरने से पहले ही भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन से उसका सिर धड़ से अलग कर दिया जिसके कारण उसका सिर अमरता को प्राप्त हो गया और राहु कहलाया। सूर्य व चंद्रमा से राहु की शत्रुता का कारण भी यही माना जाता है। मान्यता है कि इसी शत्रुता के चलते राहु सूर्य व चंद्रमा को समय-समय पर निगलने का प्रयास करता है जिसके कारण इन्हें ग्रहण लगता है। ज्योतिष शास्त्र में भी राहु को छाया ग्रह माना जाता है। राहु एक पाप ग्रह माने जाते हैं। जातक की कुंडली में कालसर्प जैसे दोष राहु के कारण ही मिलते हैं। मिथुन राशि में राहु को उच्च का तो धनु राशि में नीच का माना जाता है। राहु को अनैतिक कृत्यों का कारक भी माना जाता है। शनि के बाद राहु-केतु ऐसे ग्रह हैं जो एक राशि में लंबे समय लगभग 18 महीने तक रहते हैं। ऐसे में राहु का राशि परिवर्तन करना एक बड़ी ज्योतिषीय घटना मानी जाती है क्योंकि राहु को शनि से भी अधिक अशुभ परिणाम देने वाला ग्रह माना जाता है। एस्ट्रोयोगी के इस पृष्ठ पर आपको राहु के गोचर की समस्त जानकारी सहित आपकी राशि पर पड़ने वाले प्रभावों का भी पता चलेगा।

आपकी कुंडली के अनुसार ग्रहों की दशा क्या कहती है, जानें एस्ट्रोयोगी ज्योतिषाचार्यों से। अभी परामर्श करें।
मेष में स्पष्ट गोचर 17 मार्च 2022 05:07 पूर्वाह्न
मेष में गोचर 12 अप्रैल 2022 10:36 पूर्वाह्न

एस्ट्रो लेख

स्वतंत्रता दिवस 2022: जानें क्यों है खास आज़ादी का अमृत महोत्सव

Bhadrapada Month 2022: जानें भाद्रपद मास के व्रत और त्यौहार

जैकलीन फर्नांडिस की कुंडली के कौन-से योग बनाते हैं उन्हें इतना आकर्षक और प्रभावशाली?

Sawan Purnima 2022: सावन पूर्णिमा कब है? जानें शुभ मुहूर्त, व्रत पूजा विधि

Chat now for Support
Support