वास्तु शास्त्र एवं पूर्व दिशा

वास्तु शास्त्र एवं पूर्व दिशा


संपूर्ण वास्तु शास्त्र दिशाओं पर आधारित है। दिशाओं के शुभ-अशुभ परिणामों को ध्यान में रखकर निर्मित किया गया भवन, उसमें निवास करने वालों को सुख, संपदा, सफलता प्रदान करता है। यदि भवन के निर्माण में दिशाओं को महत्व न देते हुए अव्यवस्थित व दोष युक्त निर्माण किया गया तो उस घर में रहने वाले लोग दुखी, रोगी और सदा धन की कमी से जूझते हैं। वास्तु में पूर्व दिशा अत्यंत महत्वपूर्ण मानी गई है क्योंकि यह सूर्योदय की दिशा है। वास्तु में इस दिशा के स्वामी देवता इंद्रदेव हैं। लेकिन आमतौर पर इस दिशा के देवता सूर्यदेव को माना जाता है। भवन के निर्माण के समय इस दिशा को सबसे अधिक खुला छोड़ना चाहिए। पूर्वोन्मुखी भवन में सूर्य की रोशनी सबसे पहले पड़ती है। जिससे भवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। पूर्वोन्मुखी भूखंड व भवन बुद्धिजीवियों जैसे लेखक, शिक्षक, दार्शनिक और छात्रों के निवास लिए विशेषतः उपयुक्त मानी जाती है। क्योंकि यह सुख, शांति और समृद्धि कारक है। इस दिशा में वास्तुदोष होने पर भवन में रहने वाले लोग बीमार व व्याकुल रहते हैं। परिवार में परेशानी और चिंता बनी रहती है और उन्नति के मार्ग में बाधा उत्पन्न होती है।

पूर्व दिशा वास्तु लाभ

वास्तु शास्त्र के अनुसार पूर्वोन्मुखी भूखंड पर बने भवन, कमरों, बरामदों में भी पूर्वी हिस्सा नीचा है तो उस घर में रहने वाले लोग प्रत्येक क्षेत्र में सफलता हासिल करते हैं और स्वस्थ रहते हैं। पूर्व दिशा में निर्मित मुख्य द्वार तथा अन्य द्वार भी केवल पूर्वमुखी हो तो शुभ परिणाम प्राप्त होते हैं। वास्तु सिद्धांत कहता कि घर की पूर्व दिशा में स्थित दीवार जितनी कम ऊंची होगी उतनी ही भवन के मालिक को यश-प्रतिष्ठा, मान-सम्मान प्राप्त होगा। ऐसे मकान में रहने वाले लोगों को आयु और आरोग्य की प्राप्ति होती है। पूर्व दिशा के भवन के मध्य भाग की अपेक्षा नीचे चबूतरे बनाए जाएं तो उसमें रहने वाले लोगों को शांति और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। तो वहीं पूर्व दिशा में बरामदा झुका हुआ बनाया जाए तो घर के पुरुष सुखी एंव धनी होते हैं। वास्तु शास्त्र में पूर्व दिशा की ओर कुआं या पानी की टंकी की उपस्थिति को शुभ फलदायी माना गया है।

पूर्व दिशा वास्तु दोष हानि

वास्तु के अनुसार यदि अन्य दिशाओं की अपेक्षा भवन का पूर्वी हिस्सा ऊंचा है तो गृहस्वामी दुखी और आर्थिक तंगी से जूझता है। तो वहीं ऐसे घर में संतानें रोगी और मंदबुद्धि होती हैं। पूर्व दिशा में खाली जगह छोड़े बिना चारदीवारी से कमरे सटाकर बनाए जाएं तो वंशवृद्धि में बांधा उत्पन्न होती है। इस दिशा में नियमित मुख्य द्वार या अन्य द्वार आग्नेयमुखी हैं तो दरिद्रता, न्यायिक मामले, चोरी एवं अग्नि का भय बना रहता है। भूखंड के पूर्व दिशा में ऊंचे चबूतरें हो तो अकारण अशांति, आर्थिक संकट और परिवार में तनाव बनता है तथा परिवार का मुखिया कर्ज तले दबा रहता है। पूर्वी भाग में कचरा, पत्थर के टीले, मिट्टी के ढेर की उपस्थिति से धन और संतान की हानि होती है। इसलिए पूर्वोन्मुखी भवन के निर्माण से पहले वास्तुविद की सलाह अवश्य लें।

अपने मकान, दुकान, ऑफिस के वास्तु संबंधी पर्सनल गाइडेंस पायें इंडिया के बेस्ट एस्ट्रोलॉजर्स से
Talk to astrologer
Talk to astrologer
एस्ट्रो लेख
नए साल 2021 पर घर में करें 12 बदलाव, पूरे साल मां लक्ष्मी रहेंगी मेहरबान

वास्तु के इन उपायों के साथ करें नये साल 2021 की शुरूआत

धनतेरस, नरक चतुर्दशी और दिवाली को लेकर ना हो कन्फ्यूज, यहां जानिए सही तारीख

कब है दिवाली, धनतेरस और नरक चतुर्दशी? जानिए सही दिन और मुहूर्त

करें ये 10 वास्तु उपाय सुखी-शांत दांपत्य जीवन बिताएं

क्या बेडरूम में अक्सर पार्टनर के साथ होता है झगड़ा, तो अपनाएं ये 10 वास्तु उपाय

Exam Tips - बोर्ड परीक्षा में अच्छे अंक दिला सकते हैं ज्योतिष-वास्तु के ये उपाय

बोर्ड परीक्षा में अच्छे अंक दिला सकते हैं ज्योतिष-वास्तु के ये उपाय

chat support Support
chat support
Chat Now for Support