वास्तु में दक्षिण दिशा का महत्व

वास्तु में दक्षिण दिशा का महत्व


इस दिशा के स्वामी यम देव हैं। यह दिशा वास्तु शास्त्र के अनुसार सुख और समृद्धि का प्रतीक है। घर के मुखिया के लिए यह दिशा सर्वाधिक उपयुक्त होती है। इसलिए इस दिशा में मुखिया को निवास करना चाहिए। दक्षिण दिशा में वास्तु दोष होने पर मान- सम्मान, प्रतिष्ठा में कमी आती है एवं रोजगार, व्यवसाय तथा स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

आम तौर पर लोग दक्षिण दिशा के भूखंड व भवन को शुभ नहीं मानते हैं। उसके अलावा वो पूर्व, उत्तर व पश्चिम दिशा को भवन निर्माण के लिए शुभ मानते हैं। क्योंकि दक्षिण दिशा को यम का आधिपत्य वाला दिशा माना जाता है। यम मृत्यु के देव हैं। अतः आम जन इसे मृत्यु तुल्य दिशा मानते हैं। परंतु यह दिशा बहुत ही सौभाग्यशाली है। यह धैर्य व स्थिरता का प्रतीक है। यह दिशा हर प्रकार की बुराइयों को नष्ट करता है। भवन का निर्माण करते समय वास्तु सिद्धांतों व नियमों पर ध्यान दिया जाना चाहिए। निर्माण कार्य के दौरान दक्षिण भाग को पूर्ण रुप से ढककर तथा इस स्थान पर भारी समान व भवन निर्माण साम्रगी को रखना चाहिए। यह दिशा अगर दूषित या खुली होगी तो जीवन में अपयश मिलता है।

दक्षिण मुखी भवन निर्माण में रखे इन बातों का ध्यान

वास्तु में दक्षिण दिशा यम के आधिपत्य और मंगल ग्रह के पराक्रम की दिशा है। यह दिशा पृथ्वी तत्व की प्रधानता वाली है। वास्तु नियमों और सिद्धांतों के अनुसार भवन निर्माण के बाद इसमें निवास करने वाले उन्नतिशील और सुखमय जीवन व्यतीत करते हैं। दक्षिण मुखी भूखंड में मुख्य द्वार दक्षिण- पूर्व दिशा में यानि की आग्नेय दिशा बनवाएं। किसी भी कीमत पर नैऋत्य दिशा में मुख्य द्वार न बनवाएं। क्योंकि नैऋत्य दिशा पितृ की आधिपत्य दिशा है।

दक्षिण मुखी प्लाट में भवन का निर्माण चारदीवारी से सटाकर करवायें। यदि स्थान छोड़ना है तो उत्तर तथा पूर्व की ओर अधिक व पश्चिम-दक्षिण दिशा की ओर कम से कम खुला स्थान छोड़ें। जल संचय का प्रबंध उत्तर, पूर्व और ईशान दिशा में तथा जल निकासी का मार्ग उत्तर व ईशान दिशा में होना चाहिए। इससे भवन में रहने वालों को धन व आरोग्यता की प्राप्ति होती है। यदि यह संभव न होतो प्रबंधन पूर्व की ओर करें। जिससे धन संबंधित समस्याओं से कभी सामना नहीं होगा। बगीचे में छोटे पौधों का रोपण ईशान दिशा में करें। वास्तुशास्त्रियों से दिशाओं के गुणों की जानकारी प्राप्त कर अलग-अलग राशि के जातक इसके आधार पर अलग-अलग दिशा के भूखंड पर भवन का निर्माण करवा सकते हैं। यदि आप दक्षिण मुखी भूखंड में भवन का निर्माण करवा रहे हैं तो एक बार वास्तुविद से संपर्क जरूर करें।

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