वास्तु दोष उपाय

वास्तु दोष उपाय


यदि भवन का निर्माण वास्तु नियमों के अनुसार किसी कारण वश नहीं हो पाता या किसी तरह की कोई कमी रह जाती है तो यह मकान में रहने वालों गंभीर प्रभाव डालता है। जिसके परिणाम स्वरूप मान हानि, पारिवारीक संबंधों में तनाव, आर्थिक रूप से असंतुष्टी, कानूनी विवाद और वैवाहिक जीवन में उतार- चढ़ाव समेत कई अन्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इन समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए कुछ उपाय सुझाएं गए हैं। इन उपायों को करने से वास्तु दोष से बचा जा सकता है।

पूर्व दिशा वास्तु दोष उपाय

भवन में पूर्व दिशा का शुद्ध होना घर, परवारिक तनाव, विवाद  निवारण हेतु एवं परिवार व सदस्यों की वृद्धि हेतु बहुत ही अनिवार्य है | यदि यह बाधित हो जाये तो मान सम्मान में कमी, मानसिक तनाव, गंभीर रोग व बच्चो का विकास बाधित होता है | ऐसे में दोष निवारण के लिए ब्राह्मण को तांबे के पात्र में गेहूं व गुड़ के साथ लाल वस्त्र का दान करे | साथ ही पूर्व में सूर्य यंत्र की स्थापना प्राण प्रतिष्ठित विधि पूर्वक कराये अथवा सूर्योदय के समय तांबे के पात्र से सूर्य देव को सात बार गायत्री मंत्र का जापकर जल में लाल चन्दन या रोली व गुड, लाल पुष्प मिलाकर जल दें।

उत्तर दिशा वास्तु दोष उपाय

भवन के उत्तर दिशा की दीवारों पर सदैव हल्के हरे रंग का पैंट करवाएं, इससे आपके घर में धन एवं अवसर प्रचुर मात्र में उपलब्ध होंगे। भवन का उत्तरी भाग वास्तु दोष से पीड़ित है तो इस दिशा में एक सादे कागज पर 'अ' लिखकर चिपका दें। लक्ष्मी यंत्र व कुबेर यंत्र की स्थापना करवाना शुभफलदायी है।  

दक्षिण दिशा वास्तु दोष उपाय

भवन द्वार के ठीक सामने एक आदमकद दर्पण इस प्रकार लगाएं कि जिससे घर में प्रवेश करने वाले व्यक्ति का पूरा प्रतिबिंब दर्पण में बने। जिससे भवन में प्रवेश करने वाले व्यक्ति के साथ आने वाली नकारात्मक ऊर्जा पलटकर वापस चली जाती है। मुख्य द्वार के ठीक सामने आशीर्वाद मुद्रा में हनुमान जी की मूर्ति की स्थापना अथवा तस्वीर लगाने से भी दक्षिण दिशा का वास्तुदोष दूर होता है। साथ ही मुख्य द्वार के ऊपर पंचधातु का पिरामिड लगवाने से वास्तुदोष समाप्त होता है।

पश्चिम दिशा वास्तु दोष उपाय

पश्चिम दिशा के दोष से सुरक्षा हेतु भवन में वरुण यंत्र स्थापित करे। भवन के पश्चिमी भाग की ओर शनि यन्त्र स्थापित करें। शनि स्त्रोत का पाठ कर भवन के स्वामी को हर शनिवार काले उडद और सरसो के तेल का दान करना चाहिए। शनिवार का व्रत करने से इस दोष का निवारण हो सकता है। हनुमान चालीसा और बजरंग बाण का पाठ करें।

ईशान दिशा वास्तु दोष उपाय

यदि भवन के ईशान क्षेत्र में कोई वास्तु दोष है तो उस कटे हुए भाग पर एक बड़ा शीशा लगाएं। इससे भवन का ईशान क्षेत्र बड़ा हुआ सा प्रतीत होता है। इसके अतिरिक्त किसी साधु महात्मा अथवा देवगुरु बृहस्पति या फिर ब्रह्मदेव का कोई चित्र अथवा मूर्ति को ईशान में स्थापित करें। अगर ईशान कोण में रसोईगृह है तो उस रसोईगृह के अंदर गैस चूल्हे को आग्नेय कोण में और रसोई के ईशान कोण में साफ बर्तन में जल भरकर रखें। अगर ईशान कोण में शौचालय है तो उसके बाहरी दीवार पर एक बड़ा आदमकद शीशा या शिकार करता हुआ शेर का चित्र लगाएं। ईशान में शौचालय होने पर उपाय अवश्य ही करें क्योंकि ईशान कोण में शौचालय होना अत्यंत अशुभ होता है।

नैऋत्य दिशा वास्तु दोष उपाय

भवन के नैऋत्य दिशा में दोष होने पर राहु यंत्र की प्राण प्रतिष्टा कर विधिपूर्वक स्थापना करें। पितृपक्ष अथवा कृष्णपक्ष की चतुर्दशी व अमावस्या को विधिपूर्वक पूरी श्रद्धा से श्राद्धकर्म कर अपने पूर्वजों को संतुष्ट कर कृपा प्राप्त करें। दोष के निवारण हेतु वास्तु यन्त्र की पूरी श्रद्धा से विधिपूर्वक प्राण प्रतिष्टा कर स्थापना करना भी नैऋत्य दिशा के दोष को दूर करने के अत्यंत लाभकारी है| संपूर्ण कुटुंब सदस्यों के साथ भगवान शिव का दुग्धाभिषेक कर महादेव को कांस्य, रजत या स्वर्ण निर्मित नाग - नागिन का जोड़ा अर्पित करें और नैऋत्य दिशा में स्थापित करें |

आग्नेय दिशा वास्तु दोष उपाय

यदि आग्नेय कोण पूर्व दिशा की ओर बढ़ा है तो इसे काटकर वर्गाकार या आयताकार बनाएं। शुद्ध बालू व मिट्टी से आग्नेय क्षेत्र के सभी गड्ढे इस प्रकार भर दें कि यह क्षेत्र ईशान और वायव्य से ऊंचा परंतु नैर्ऋत्य दिशा से नीचा रहे। यदि आग्नेय किसी भी प्रकार से कटा हो अथवा पर्याप्त रूप से खुला न हो, तो इस दिशा में लाल रंग का एक दीपक या बल्ब कम से कम एक प्रहर जलाए रखें। इसके अलावा इस दिशा में अग्नि देव की एक तस्वीर, या संकेत चिह्न या गणेश जी की मूर्ति रखने से भी उक्त दोष दूर होता है।

वाव्यय दिशा वास्तु दोष उपाय

वाव्यय दिशा में वास्तु दोष उपाय के लिए संकट मोचन हनुमान की मूर्ती की स्थापना करें। वाव्यय दिशा में बने कमरे में ताजे फूल से बना गुलदस्ता रखें। इसके इतर नित्य प्रातः गंगा जल में कच्चा दूध मिलाकर शिव लिंग का अभिषेक कर शिव मंत्र का जाप करें। वाव्यय दिशा दोष के निवारण के लिए भवन में प्राण प्रतिष्ठित मारूती यंत्र व चंद्र यंत्र की स्थापना अवश्य करना चाहिए।

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