आध्यात्मिकता और आंतरिक संतुलन

07 मई 2017

आध्यात्मिकता' शायद इस शब्द का अर्थ आजकल की युवा पीढ़ी को ज्ञात भी नहीं होगा। उनकी समझ से आध्यात्मिकता का अर्थ है मंदिर में बैठ कर भगवान के सामने भजन करना या कोई धर्म कांड। लेकिन सच्चाई इस से बहुत अलग है, आध्यात्मिकता का मतलब है अपने अंदर एक संतुलन बना कर रखना और मन में शांति लाना। आज जिसे देखो वो परेशान और अशांत है पर कारण शायद उन्हे भी नहीं पता होगा।  अमेरिकी शोधार्थियों ने आध्यात्मिकता के लिए जिम्मेवार मस्तिष्क के हिस्से की पहचान करने का दावा किया है। वैज्ञानिक काफी समय से मानते रहे हैं कि मस्तिष्क में एक विशेष हिस्सा आध्यात्मिक अनुभूतियों के लिए जिम्मेवार होता है।


हमारा मन बहुत ही चंचल है और वह हर समय विचलित रहता है, मन को काबू करना बहुत ही कठिन है। लेकिन आध्यात्म ही एक ऐसा मार्ग है जिसके द्वारा मन को नियंत्रण में किया जा सकता है। हम जीवन में एकरसता से उब जाते हैं और मनोरंजन के साधन तलाश करने लगते हैं। हम समझ नहीं पाते हैं कि इस खालीपन का कारण क्या है। हम खुद को खुश करने के लिए टी. वी, कम्प्युटर या मनोरंजक किताब का सहारा लेते हैं, इससे कुछ देर के लिए तो हमे राहत मिल जाती है लेकिन धीरे – धीरे तनाव और खालीपन फिर से हमारे मन पर छाने लगता है। यह तनाव और थकान असल में हमारी आत्मा का होता है, जिसे हम समझ ही नहीं पाते हैं। इस तनाव और खालीपन को दूर करने के लिए हमें अपने आप को आध्यात्म को समर्पण कर देना चाहिए।


यदि आप में नकारात्मकता या घृणा है तो आपको समर्पण करना होगा।  संतोष और खुशी जीवन में बहुत महत्वपूर्ण हैं, अन्य बातों का आना जाना लगा रहेगा। सच पूछिये तो आध्यात्म और कुछ भी नहीं, बल्कि आपका अपना ही आन्तरिक संतुलन है और इसे पूरी संवेदनशीलता के साथ बहुत गहराई से महसूस किया जाना चाहिए। और एक बार यदि आपने आन्तरिक संतुलन कायम कर लिया तो आपकी ही जिन्दगी के प्रति आपका नज़रिया एकदम बदल जाता है। आपको जिन्दगी बहुत ही आसान और खुबसूरत नज़र आने लगेगी। बस जरूरत है अपने भीतर छुपे उस ज्ञान को पहचानने की। आज जिनके पास दौलत है दुनिया के सभी सुख आराम है वो भी खुश नहीं हैं, और जिनके पास कुछ नहीं वो भी परेशान हैं। सच कहा जाए तो बस आप जीवन को व्यतीत कर रहे हैं उसे जी नहीं रहे हैं, क्योंकि यदि एक बार आपने जिन्दगी का मज़ा लेना शुरू कर दिया तो हर मुश्किल से मुश्किल काम आपके लिए आसान प्रतीत होने लगेगा।

यदि आपके मन के भीतर ही शांति ही नहीं है, तो बाहर कितना भी ढूंढ लें आप कभी भी खुद को संतुष्ट नहीं कर पाएंगे। आध्यात्मिकता का अर्थ यह बिल्कुल नहीं कि आप बाकी दुनियादारी छोड़ दें और बस अध्यात्म की तलाश में लगे रहें। इसका अर्थ है कि आप एक बार इस बात पर विचार करें कि क्या आप जिन्दगी को उसी तरह से जी रहे हैं जैसा कि आप चाहते हैं। यदि जवाब 'नहीं' है, तो आपको आन्तरिक संतुलन की आवश्यकता है जो केवल ध्यान योग और आध्यात्म के द्वारा ही पाया जा सकता है। परेशानी और मुश्किलें तो जीवन में आती जाती रहेंगी पर आपको अपनी सोच बदलनी होगी। आप हर परेशानी का सामना आसानी के साथ कर लेंगे यदि आपका मन स्थिर और शांत है। केवल एक बार आध्यात्मिकता को जीवन में शामिल कर के देखें, आप आत्मिक ज्ञान का अनुभव करेंगे और हमेशा आनंदित रहेंगे। 

एस्ट्रो लेख

KKR vs RR - कोलकाता नाइट राइडर्स vs राजस्थान रॉयल्स का मैच प्रेडिक्शन

CSK vs KXIP - चेन्नई सुपर किंग्स vs किंग्स इलेवन पंजाब का मैच प्रेडिक्शन

कार्तिक मास 2020 - पवित्र नदी में स्नान औऱ दीपदान का महीना

RCB vs SRH - रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर vs सनराइजर्स हैदराबाद का मैच प्रेडिक्शन

Chat now for Support
Support