पुखराज के लाभ - कुंडली में कमजोर बृहस्पति को मजबूती देता है पुखराज

जब जातक की कुंडली में ग्रहों की स्थिति कमजोर हो उनके जीवन में उक्त ग्रह के शुभ प्रभाव कम हो जाते हैं जिससे कई बार तो जीवन में उथल-पुथल तक मिल जाती है। ऐसे में कमजोर ग्रहों को मजबूत करने के कुछ ज्योतिषीय उपाय भी ज्योतिष शास्त्र में बताये गये हैं। हर ग्रह के लिये अलग उपाय सुझाये जाते हैं। देव गुरु माने जाने वाले बृहस्पति का हमारे जीवन पर व्यापक प्रभाव पड़ता है। गुरू ज्ञान के कारक हैं। जीवन में सुख-समृद्धि के दाता हैं। सुखद जीवन के लिये कुंडली में इनका मजबूत होना बहुत जरूरी है। यदि आपकी कुंडली में गुरू मजबूत नहीं हैं तो आप गुरु का रत्न पुखराज धारण कर सकते हैं। चलिये आपको बताते हैं येलो सफियरे (Yellow Sapphire) यानि पुखराज के से होने वाले लाभ के बारे में।

क्या है पुखराज

पुखराज दरअसल पीले रंग का एक बहुत ही मूल्यवान और सुंदर रत्न है जो कि बृहस्पति ग्रह की मजबूती के लिये धारण किया जाता है। पुखराज आपके लिये कितना फायदेमंद रहेगा यह इस पर भी निर्भर करता है कि जो रत्न आपने धारण किया है। उसका आकार क्या है? उसका रंग कैसा है तथा वह कितना शुद्ध है। वैसे तो पुखराज भिन्न रंगो के हो सकते हैं लेकिन बृहस्पति के लिये पीले रंग के पुखराज को धारण किया जाता है।

किसको पहनना चाहिये पुखराज रत्न

जिन जातकों की कुंडली में बृहस्पति का शुभ प्रभाव बहुत कम हो उन्हें पुखराज रत्न धारण करने की सलाह दी जाती है। धनु और मीन राशि के जातक जो कि बृहस्पति से प्रभावित होते हैं क्योंकि इन राशियों के स्वामी बृहस्पति माने जाते हैं इसलिये इनके लिये यह विशेष रूप से सौभाग्यशाली हो सकता है।

पुखराज धारण करने के लाभ

मान्यता है कि पुखराज धारण करने से जातक का मान-सम्मान बढ़ने लगता है व धारक के जीवन में धन संपत्ति में भी वृद्धि होने लगती है। बृहस्पति को ज्ञान का कारक भी माना जाता है इसलिये शिक्षा क्षेत्र में पुखराज धारण करने से सफलता मिल सकती है साथ ही पुखराज के प्रभाव से बृहस्पति देव बली होकर जातक की बुद्धि को सत्कर्मों में लगाते हैं और गलत संगत से दूर रखते हैं। यदि किसी जातक के दांपत्य जीवन में दिक्कतें आ रही हों या फिर विवाह में विलंब हो रहा हो या अन्य रूकावटें आ रही हों तो ऐसे जातकों को भी ज्योतिषाचार्य पुखराज धारण करने की सलाह देते हैं जिसके पश्चात उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन देखे जाते हैं। इतना ही नहीं यदि जातक को सीने, श्वास व गले संबंधी रोग हैं तो पुखराज धारण करने से उन्हें राहत मिल सकती है। अल्सर, गठिया अथवा जोड़ों संबंधी दर्द में भी इससे राहत मिलने की मान्यता है।

पुखराज धारण करने की विधि

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार पुखराज धारण करने से पहले बृहस्पति से संबंधित पीली वस्तुओं जैसे केला, हल्दी, पीले वस्त्र आदि का दान करना चाहिये। पुखराज सवा 5, सवा 9 या सवा 12 रत्ती की मात्रा में ही धारण करना चाहिये। धारण करने से पूर्व किसी विद्वान ज्योतिषाचार्य से इसकी विधिवत् पूजा अर्चना अवश्य करवानी चाहिये। इसे धारण करने के लिये गुरु ग्रह बृहस्पति का दिन यानि गुरुवार उचित माना जाता है।

एस्ट्रोयोगी ज्योतिषाचार्यों की सलाह है कि कोई भी रत्न धारण करने से पूर्व अपनी कुंडली किसी विद्वान ज्योतिषाचार्य से अवश्य दिखाएं उसके पश्चात ही किसी रत्न को धारण करने का विचार बनायें।

यदि आप जानना चाहते हैं कि आपकी कुंडली के अनुसार आपको कौनसा रत्न धारण करना चाहिये तो इसके लिये आप एस्ट्रोयोगी पर देश भर के जाने-माने ज्योतिषाचार्यों से परामर्श कर सकते हैं। अभी परामर्श करने के लिये यहां क्लिक करें।

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