फिर चमकेंगे धोनी के सितारे

नाम- महेंद्र सिंह धोनी

जन्म स्थान- रांची

जन्म समय- 11:50:00

राशि- सूर्य राशि कर्क


आपका जन्म दिन अगर 7 जुलाई को है तो आप बहुत खुशनसीब हैं कि आप टीम इंडिया के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के साथ अपना जन्मदिन मना रहे हैं। किस्मत के धनी, महेंद्र सिंह धोनी ने अपने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट करियर की शुरूआत, सन 2004 से की थी। इनकी सूर्य राशि कर्क होने के कारण, यह संवेदनशील और भावनात्मक हैं। सन 2007 में आईसीसी ट्वेंटी-20, सन 2011 में आईसीसी विश्व कप और 2013 में आईसीसी चैंपियंस ट्राफी, भारतीय क्रिकेट टीम ने इन्हीं की कप्तानी में अपने नाम किया है। प्रारंभ में कुछ ख़ास नहीं कर पा रहे, धोनी को इनकी असली पहचान सन 2005 में मिली, जब इन्होनें पाकिस्तान के ख़िलाफ़ खेलते हुए 123 गेंदों पर 148 रनों की तूफानी पारी खेली थी। इसके बाद श्रीलंका के ख़िलाफ़ धोनी की 183 रनों की धमाकेदार पारी खेलकर, इन्होनें सभी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया था। एस्ट्रोयोगी ज्योतिष के अनुसार उस समय, इनकी कुंडली के अन्दर लक्ष्मीनारायण योग बना था जो सिर्फ और सिर्फ सौभाग्य का सूचक होता है। लग्न में कहीं भी सूर्य, गुरू और बुध के इस त्रिकोण मिलन से इस योग का उदय होता है।

महेंद्र सिंह धोनी के जन्मदिन के मौके पर, आइये एक नजर डालते हैं कि इनका आने वाला साल इनके लिए कैसा रहेगा। एस्ट्रोयोगी ज्योतिष के अनुसार अभी इन दिनों इनकी कुंडली में शनि ग्रहण योग बना हुआ है। भाग्य का स्थान 9 वां होता है और इस वक़्त 9 वें स्थान पर शनि है। इस कारण से अभी इनका मन विचलित चल रहा है और इनके सभी फैसले गलत सिद्ध हो रहे हैं।

अगर इनकी निजी ज़िन्दगी पर भी निगाह डालें तो राहू की महादशा होने के कारण पर्सनल जिंदगी में भी कुछ समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं।

एस्ट्रोयोगी ज्योतिष के अनुसार जुलाई माह के प्रथम सप्ताह में केतु कुंडली के पंचम भाग में आ जाएगा और फिर से इनका अच्छा समय शुरू होने के आसार हैं। इस जगह से केतु की नज़र सीधे कार्य पर होगी और यह योग धोनी के लिए अत्यंत लाभदायी हो सकता है।

एस्ट्रोयोगी महेंद्र सिंह धोनी को उनके जन्मदिवस की बधाई देता है और उम्मीद करता है कि आगामी समय इनके लिए काफी अच्छा रहेगा।


एस्ट्रो लेख

माँ चंद्रघंटा -...

माँ दुर्गाजी की तीसरी शक्ति का नाम चंद्रघंटा है। नवरात्रि उपासना में तीसरे दिन की पूजा का अत्यधिक महत्व है और इस दिन इन्हीं के विग्रह का पूजन-आराधन किया जाता है। इस दिन साधक का मन ...

और पढ़ें ➜

माँ ब्रह्मचारिण...

नवरात्र पर्व के दूसरे दिन माँ  ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना की जाती है। साधक इस दिन अपने मन को माँ के चरणों में लगाते हैं। ब्रह्म का अर्थ है तपस्या और चारिणी यानी आचरण करने वाली। इस...

और पढ़ें ➜

माँ शैलपुत्री -...

देवी दुर्गा के नौ रूप होते हैं। दुर्गाजी पहले स्वरूप में 'शैलपुत्री' के नाम से जानी जाती हैं। ये ही नवदुर्गाओं में प्रथम दुर्गा हैं। पर्वतराज हिमालय के घर पुत्री रूप में उत्पन्न हो...

और पढ़ें ➜

अखंड ज्योति - न...

नवरात्रि का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। साल में हम 2 बार देवी की आराधना करते हैं। चैत्र नवरात्रि चैत्र मास के शुक्ल प्रतिपदा को शुरु होती है और रामनवमी पर यह खत्म होती है, वहीं ...

और पढ़ें ➜