द्रौपदी स्वयंवर में कर्ण क्यों नहीं ले सके भाग, कौन बनी कर्ण की पत्नी

महाभारत एक महाकाव्य है। एक ऐसा महाकाव्य जिसमें अनेक पौराणिक कथाएं मिलती हैं। महाभारत की कथा में कुछ ऐसे विशेष पात्र हैं जिनमें क्षमता तो इतनी थी कि इनके सामने कोई टिक न सके लेकिन बेबसी भी ऐसी कि उनका कोई वश न चले। कुछ ऐसी ही त्रासदी घटी थी कर्ण के साथ। कर्ण ने जन्म तो सूर्य पुत्र के रूप में कुंती की कोख से लिया था परंतु पले बढ़े वे अधिरथ के घर जिस कारण उन्हें सूत पुत्र माना गया और कदम-कदम पर अपमानित होना पड़ा।

द्रौपदी स्वयंवर

बात द्रौपदी स्वयंवर की है। अब तक कर्ण की क्षमता से सब वाकिफ हो चुके थे। वह दुर्योधन का परम मित्र बन चुका था। दुर्योधन ने उसे अंग देश का राजा बना दिया था। जब सभी देशों से राजाओं को स्वयंवर में भाग लेने का निमंत्रण मिला तो अंग देश का राजा होने की हैसियत से कर्ण भी स्वयंवर में शामिल होने के लिये पंहुचे।

अब अगर कर्ण इस स्वयंवर में हिस्सा लेते तो मछली की आंख को भेदना उनका लिये असंभव नहीं था। जब प्रतियोगिता में भाग लेने के लिये कर्ण की बारी आयी तो ऐन मौके पर उसे भाग लेने से मना कर दिया। कहा गया कि वह एक सूत पुत्र है यानि कि राजघराने से वह ताल्लुक नहीं रखता उसकी परवरिश सूत अधिरथ के यहां हुई है। इस प्रकार सारी क्षमताएं होने के बावजूद कर्ण द्रौपदी को पाने की चाहत पूरी नहीं कर सके और भाग्य ने अर्जुन का साथ दिया।

किससे हुआ कर्ण का विवाह

ऐसा भी नहीं है कि कर्ण ने बिल्कुल हार मान ली हो और जीवन में विवाह ही न किया हो बल्कि कर्ण की तो दो-दो पत्नियां थी। उनकी पहली पत्नी का नाम था रूषाली, जो कि उनके पालक पिता अधिरथ की पसंद थी। अपने पिता का मान रखने के लिये कर्ण ने रूषाली से विवाह स्वीकार किया। रूषाली सूत पुत्री थी। कर्ण की दूसरी पत्नी का नाम सुप्रिया था।

कर्ण पुत्र वृषकेतु को मिला इंद्रप्रस्थ का सिंहासन

कर्ण की दोनों पत्नियों रूषाली और सुप्रिया से 9 पुत्र पैदा हुए जिन्होंने महाभारत के युद्ध में भाग भी लिया। युद्ध समाप्ति पर कर्ण का एक पुत्र वृषकेतु जीवित बचा। जब पांडवों को पता चला कि कर्ण उनका ही बड़ा भाई था तो युद्धिष्ठिर ने राज परंपरा का निर्वाह करते हुए। वर्षकेतु को इद्रप्रस्थ का शासन सौंप दिया।

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