ईद - इंसानियत का पैगाम देता है ईद-उल-फ़ितर

भारत में ईद-उल-फ़ितर 5 जून 2019 को मनाया जाएगा। इस्लामी कैलेंडर के नौवें महीने को रमदान का महीना कहते हैं और इस महीने में अल्लाह के सभी बंदे रोज़े रखते हैं। इसके बाद दसवें महीने की ‘शव्वाल रात’ पहली चाँद रात में ईद-उल-फ़ितर मनाया जाता है। इस रात चाँद को देखने के बाद ही ईद-उल-फ़ितर का ऐलान किया जाता है।

ईद-उल-फ़ितर ऐसा त्यौहार है जो सभी ओर इंसानियत की बात करता है। इस दिन सबको एक समान समझना चाहिए और गरीबों को खुशियाँ देनी चाहिए। कहते है कि रमदान के इस महीने में जो नेकी करेगा और रोज़ा के दौरान अपने दिल को साफ़-पाक रखता है, अल्लाह उसे ख़ुशीयां ज़रूर देता है। रमदान महीने में रोज़े रखना हर मुसलमान के लिए एक फ़र्ज़ कहा गया है। भूखा-प्यासा रहकर इंसान को किसी भी प्रकार के लालच से दूर रहने और सही रास्ते पर चलने की हिम्मत मिलती है।

शव्वाल महीने के पहले दिन सभी मुसलमान इबादत करने के बाद ख़ुतबा (उपदेश) सुनते हैं और रमदान के महीने के दौरान ज़कात-उल-फ़ितर देते हैं। इसमें गरीबों को खान-पान की सुविधा दी जाती है। अगर कोई किसी वजह से ज़कात-उल-फ़ितर नहीं दे पाया हो, तो वह ईद--उल-फ़ितर पर यह दान कर सकता है। सभी मुस्लिम इस ख़ास दिन में एक-दूसरें को ‘ईद मुबारक’ कहकर गले मिलते हैं। सेवइयों और शीर-खुरमें से एक दूसरें का मूंह मीठा किया जाता है।

कब दिखेगा ईद का चांद

पूरी दुनिया के मुसलमानों द्वारा ईद-उल-फ़ितर चाँद रात में नये चाँद के दिखने के बाद ही मनाया जाता है। चूंकि दुनिया में जगह-जगह चाँद अलग-अलग वक़्त पर दिखाई देता है, इसलिए ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार ईद-उल-फ़ितर की तारीख भी ऊपर-नीचे हो जाती है। भारत में देश की राजधानी दिल्ली के समयानुसार नया चांद 4 जून को 19:12 से लेकर 20:12 बजे तक दिखाई देगा।

ईद-उल-फ़ितर का एक ही मकसद होता है कि हर आदमी एक दूसरे को बराबर समझे और इंसानियत का पैगाम फैलाए। भाईचारे के इस पर्व पर एस्ट्रोयोगी की ओर से आप सबको ईद मुबारक।

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