Skip Navigation Links
बुधवार को गणेश जी की पूजा है अतिलाभकारी


बुधवार को गणेश जी की पूजा है अतिलाभकारी

हिन्दू संस्कृति और पूजा में भगवान श्रीगणेश जी को सर्वश्रेष्ठ स्थान दिया गया है। प्रत्येक शुभ कार्य में सबसे पहले भगवान गणेश की ही पूजा की जाती अनिवार्य बताई गयी है। देवता भी अपने कार्यों की बिना किसी विघ्न से पूरा करने के लिए गणेश जी की अर्चना सबसे पहले करते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि देवगणों ने स्वयं उनकी अग्रपूजा का विधान बनाया है। शास्त्रों में एक बार जिक्र आता है कि भगवान शंकर त्रिपुरासुर का वध करने में जब असफल हुए, तब उन्होंने गंभीरतापूर्वक विचार किया कि आखिर उनके कार्य में विघ्न क्यों पड़ा? तब महादेव को ज्ञात हुआ कि वे गणेशजी की अर्चना किए बगैर त्रिपुरासुर से युद्ध करने चले गए थे। इसके बाद शिवजी ने गणेशजी का पूजन करके उन्हें लड्डुओं का भोग लगाया और दोबारा त्रिपुरासुर पर प्रहार किया, तब उनका मनोरथ पूर्ण हुआ।

सनातन एवं हिन्दू शास्त्रों में भगवान गणेश जी को, विघ्नहर्ता अर्थात सभी तरह की परेशानियों को खत्म करने वाला बताया गया है। पुराणों में गणेशजी की भक्ति शनि सहित सारे ग्रहदोष दूर करने वाली भी बताई गई हैं। हर बुधवार के शुभ दिन गणेशजी की उपासना से व्यक्ति का सुख-सौभाग्य बढ़ता है और सभी तरह की रुकावटे दूर होती हैं।


गणेश भगवान की पूजा विधि

प्रातः काल स्नान ध्यान आदि से सुद्ध होकर सर्व प्रथम ताम्र पत्र के श्री गणेश यन्त्र को साफ़ मिट्टी, नमक, निम्बू  से अच्छे से साफ़ किया जाए।  पूजा स्थल पर पूर्व या उत्तर दिशा की और मुख कर के आसान पर विराजमान हो कर सामने श्री गणेश यन्त्र की स्थापना करें। 

शुद्ध आसन में बैठकर सभी पूजन सामग्री को एकत्रित कर पुष्प, धूप, दीप, कपूर, रोली, मौली लाल, चंदन, मोदक आदि गणेश भगवान को समर्पित कर, इनकी आरती की जाती है।

अंत में भगवान गणेश जी का स्मरण कर ॐ गं गणपतये नमः का 108 नाम मंत्र का जाप करना चाहिए।


बुधवार को यहां बताए जा रहे ये छोटे-छोटे उपाय करने से व्यक्ति को लाभ प्राप्त होता है–


बिगड़े काम बनाने के लिए बुधवार को गणेश मंत्र का स्मरण करें-
 त्रयीमयायाखिलबुद्धिदात्रे बुद्धिप्रदीपाय सुराधिपाय। नित्याय सत्याय च नित्यबुद्धि नित्यं निरीहाय नमोस्तु नित्यम्।

अर्थात भगवान गणेश आप सभी बुद्धियों को देने वाले, बुद्धि को जगाने वाले और देवताओं के भी ईश्वर हैं। आप ही सत्य और नित्य बोधस्वरूप हैं। आपको मैं सदा नमन करता हूं।

कम से कम 21 बार इस मंत्र का जप जरुर होना चाहिए।


ग्रह दोष और शत्रुओं से बचाव के लिए-

गणपूज्यो वक्रतुण्ड एकदंष्ट्री त्रियम्बक:।

नीलग्रीवो लम्बोदरो विकटो विघ्रराजक:।।

धूम्रवर्णों भालचन्द्रो दशमस्तु विनायक:।

गणपर्तिहस्तिमुखो द्वादशारे यजेद्गणम्।।


इसमें भगवान गणेश जी के बारह नामों का स्मरण किया गया है। इन नामों का जप अगर मंदिर में बैठकर किया जाए तो यह उत्तम बताया जाता है। जब पूरी पूजा विधि हो जाए तो कम से कम 11 बार इन नामों का जप करना शुभ होता है।


परिवार और व्यक्ति के दुःख दूर करते हैं यह सरल उपाय

- बुधवार के दिन घर में सफेद रंग के गणपति की स्थापना करने से समस्त प्रकार की तंत्र शक्ति का नाश होता है।


- धन प्राप्ति के लिए बुधवार के दिन श्री गणेश को घी और गुड़ का भोग लगाएं। थोड़ी देर बाद घी व गुड़ गाय को खिला दें। ये उपाय करने से धन संबंधी समस्या का निदान हो जाता है।

- परिवार में कलह कलेश हो तो बुधवार के दिन दूर्वा के गणेश जी की प्रतिकात्मक मूर्ति बनवाएं। इसे अपने घर के देवालय में स्थापित करें और प्रतिदिन इसकी विधि-विधान से पूजा करें।

- घर के मुख्य दरवाजे पर गणेशजी की प्रतिमा लगाने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। कोई भी नकारात्मक शक्ति घर में प्रवेश नहीं कर पाती है।


यह भी पढ़ें

गणेश चालीसा का पाठ करें   |   गणेश जी के मंत्रों का उच्चारण करें   |   श्री गणेश आरती   |   श्री गणपति आरती

श्री विनायक आरती   |   गणेश चतुर्थी   |   गणेश परिवार की पूजा से पूरी होंगी मनोकामना





एस्ट्रो लेख संग्रह से अन्य लेख पढ़ने के लिये यहां क्लिक करें

पद्मिनी एकादशी – जानिए कमला एकादशी का महत्व व व्रत कथा के बारे में

पद्मिनी एकादशी – ज...

कमला एकादशी, अधिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी पद्मिनी एकादशी कहलाती है। इसे कमला एकादशी भी कहा जाता है। हिंदू धर्म में व्रत व त्यौहारों की बड़ी मान्यता है। सप्ताह का...

और पढ़ें...
वृषभ राशि में बुध का परिवर्तन – जानिए किन राशियों के लिये लाभकारी है वृषभ राशि में बुधादित्य योग

वृषभ राशि में बुध ...

बुध ग्रह राशि चक्र में तीसरी और छठी राशि मिथुन व कन्या के स्वामी हैं। बुध वाणी के कारक माने जाते हैं। बुध का राशि परिवर्तन ज्योतिष शास्त्र के अनुसार एक बड़ी घटना मान...

और पढ़ें...
अधिक मास - क्या होता है मलमास? अधिक मास में क्या करें क्या न करें?

अधिक मास - क्या हो...

अधिक शब्द जहां भी इस्तेमाल होगा निश्चित रूप से वह किसी तरह की अधिकता को व्यक्त करेगा। हाल ही में अधिक मास शब्द आप काफी सुन रहे होंगे। विशेषकर हिंदू कैलेंडर वर्ष को म...

और पढ़ें...
सकारात्मकता के लिये अपनाएं ये वास्तु उपाय

सकारात्मकता के लिय...

हर चीज़ को करने का एक सलीका होता है। शउर होता है। जब चीज़ें करीने सजा कर एकदम व्यवस्थित रखी हों तो कितनी अच्छी लगती हैं। उससे हमारे भीतर एक सकारात्मक उर्जा का संचार ...

और पढ़ें...
मलमास - जानिए मल मास के बारे में

मलमास - जानिए मल म...

16 मई 2018 से मलमास का आरंभ हो चुका है। ज्येष्ठ मास में पड़ने वाला यह मलमास 16 मई से आरंभ होकर 13 जून 2018 तक रहेगा। प्रत्येक वर्ष हर तीन साल में एक बार अतिरिक्त माह...

और पढ़ें...