हनुमान जयंती 04 अप्रैल 2015


हनुमान जयंती पूजा शुभ मुहूर्त: ब्रह्ममुहूर्त 4 बजे अथवा

सूर्योदय से प्रातः 10 बजे तक पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ = 3 अप्रैल, दोपहर 03:18
पूर्णिमा तिथि समाप्त = 4 अप्रैल, सायं 05: 35


04 अप्रैल 2015 को चैत्र मास की पूर्णमासी को हनुमान जयंती का महोत्सव श्रद्धाभाव से मनाया जाएगा| रामभक्ति के लिए प्रसिद्ध श्री हनुमान की जन्मतिथि के रूप में यह पर्व मनाया जाता है| पुराणों में कथित है कि प्रभु शिव के अवतार रूप में हनुमान जी ने माँ अंजना के गर्भ से जन्म लिया| इस वर्ष हनुमान जयंती के दिन चन्द्र ग्रहण भी होगा| चन्द्र ग्रहण का प्रभाव उपासकों पर स्वाभाविक तौर पर रहेगा|


* चूंकि चन्द्र ग्रहण के अवसर पर सूतक लगा हुआ होता है, जिस कारण से पूर्ण रूप से विधिपूर्वक पूजा करना शुभ नहीं माना जाता अतः पूजा नियमित मुहूर्त में ही करें| सूतक के दौरान मंदिरों के कपाट भी बंद कर दिए जाते हैं|

इस दिन भक्तों को विधिपूर्वक हनुमान जी की उपासना करनी चाहिए| चूँकि हनुमान संकट मोचक भी कहे जाते है, इस दिन उनकी पूजा-अर्चना करके भक्तों को अपनी सभी संकट का समाधान मिलता है और उनके कष्ट दूर होते हैं| हनुमान जी के नाम का व्रत रखकर लाभ वृद्धि प्राप्त कर सकते हैं|


हनुमान जयंती की पूजा विधि

हनुमानजी के सभी भक्तों को हनुमान जयंती के दिन प्रातःकाल स्नान आदि काम-काज कर हनुमान जी का ध्यान लगाकर संकल्प ले और पूजा प्रारंभ करे|

  • लाल पुष्पों से पूजा आरंभ करे| गुलाब के पुष्प भी हनुमान जी की मूर्ती पर अर्पित करें|
  • नवैद्य हेतु शुद्ध घी से बने आटे का चूरमा, लड्डू, बूंदी एवं फलों इत्यादि का उपयोग करें|
  • विशेष मन-इच्छा पूर्ण करने हेतु मीठा पूंगी फल यानि पान भी चढ़ाए|
  • हनुमान जी की पूजा करते हुए तेल और सिन्दूर हनुमान जी को अर्पित करे| साथ ही उन्हें वस्त्र भी चढ़ाए|
  • आशीर्वाद प्राप्ति हेतु हनुमान जयंती के पर्व पर सुन्दरकाण्ड अवश्य करें|


हनुमान जयंती व्रत विधि

बजरंग बलि हनुमानजी को प्रसन्न करने हेतु उपासकों को हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए| इस दिन श्री हनुमान जी के मंत्र का पाठ और जाप करना कल्याणकारी माना जाता है| हनुमान जी अपने उपासकों से प्रसन्न होकर उन्हें बल देते है और उनके सभी संकट हर लेते है| इसी लिए उन्हें संकटमोचक भी कहा जाता है|

  • हनुमान जयंती के दिन भक्तजन सिंदुर का चोला, लाल वस्त्र, ध्वजा आदि श्री हनुमान को चढाते है|
  • इसके अलावा केसरयुक्त चंदन, कनेर के फूल, धूप-अगरबती, शुद्ध घी अथवा चमेली के तेल का दीप इत्यादि का भोग भी लगाया जाता है|
  • नारियल और पेड़ों को भोग लगाने से भी रुद्रावतार हनुमान प्रसन्न होते है|
  • प्रसाद के लिए हनुमानजी का प्रिय फल केला और भुने हुए चने अवश्य चढ़ाए|
  • प्रभु राम का भजन-कीर्तन करे और उनके परमभक्त हनुमानजी का आशीर्वाद पायें|
  • ॐ अंजनी सुताय विद्महे वायु पुत्राय धीमहि तन्नौ हनुमत् प्रचोदयात् । इस मंत्र का जाप करे|
  • मनोजवं मारुततुल्यवेगम् जितेँद्रियं बुद्धिमतांवरिष्ठम् । वातात्मजं वानरयूथमुख्यम् श्रीरामदूतं शरणम् प्रपद्ये ॥
  • इस श्लोक का पाठ करे और सुख-समृधि प्राप्त करे|
    हनुमान जयंती का महत्त्व

    पौराणिक गाथाओं के अनुसार हनुमान जी का जन्म प्रभु शिव के अवतार रुप में अंजना माँ के गर्भ से हुआ था| | यह भी माना जाता है कि रामभक्त हनुमान द्वारा लंका दहन भी इसी दिन हुआ था| चैत्र मास में नवरात्रों की समाप्ति के पश्चात ही माता के द्वारपाल हनुमान जी की जन्मतिथि आती है अतः यदि उपासक इस पर्व के अवसर पर गंगा-जमुना जैसी पवित्र नदियों में स्नान करें और दान करे तो पूरा वर्ष शुभ रहता है|



    एस्ट्रोयोगी टीम की ओर से आप सब को हनुमान जयंती की शुभकामनाएं| आपका जीवन मंगलमय हो|

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