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बृहस्पति वक्री 2017 - क्या होगा आपकी राशि पर असर गुरु कन्या में हुए वक्री


बृहस्पति वक्री 2017 - क्या होगा आपकी राशि पर असर गुरु कन्या में हुए वक्री

ज्योतिषशास्त्र के अनुसार ग्रहों का राशि परिवर्तन तो मायने रखता ही है लेकिन ग्रहों का वक्री होना यानि की ग्रहों को विपरीत दिशा में चल पड़ना भी राशिफल को काफी प्रभावित करता है। राशि परिवर्तन से लेकर गोचर में शनि, राहू-केतु व बृहस्पति का वक्री व मार्गी होना बहुत खास गतिविधि मानी जाती हैं। इन ग्रहों की गतिविधियां व्यापक रूप से जातकों के भविष्य को प्रभावित करती हैं। 5 फरवरी को बृहस्पति कन्या में वक्री हो गये हैं। बृहस्पति ज्ञान के कारक माने जाते हैं। देवताओं तक गुरु माने जाते हैं ऐसे में उनका वक्र होना आपके निर्णय लेने की क्षमता, बड़े बुजूर्ग अथवा वरिष्ठ कर्मियों, सहयोगियों या अधिकारियों के सहयोग को प्रभावित कर सकता है। किस राशि के लिये बृहस्पति का कन्या में वक्री होना कैसा रहेगा? इस बारे में अपने पाठकों की जानकारी के लिये एस्ट्रोयोगी ज्योतिषाचार्यों से परामर्श के आधार पर प्रस्तुत है यह लेख। तो आइये जानते हैं वक्री बृहस्पति कैसे करेंगें राशिनुसार आपको प्रभावित।

मेष

मेष राशि वालों के लिये बृहस्पति का वक्र होना रोग आदि की वृद्धि कर सकता है। बृहस्पति ज्ञान के कारक भी माने जाते हैं इसलिये संभव है कि मेष जातक कुछ अहम निर्णय बिना विचार-विमर्श किये, बिना दूरगामी परिणामों के सोचे कुछ मामलों में अपने निर्णय लें। नासमझी में फैसले लेने के कारण भविष्य में आपको हानि उठानी पड़ सकती है। आपके लिये सलाह है कि किसी भी महत्वपूर्ण फैसले को लागू करने से पहले उस पर अच्छे से चिंतन कर लें।

वृषभ

वृष राशि में गुरु के वक्री होने का प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना है। आपकी राशि को बृहस्पति नवम दृष्टि से देख रहे हैं। वक्र दृष्टि मति भ्रम उत्पन्न करती है जिसके कारण आप गलत लोगों की संगत में पड़ सकते हैं। नकारात्मक सोच के लोगों से हुई दोस्ती की कीमत भविष्य में हानि के रूप में आपको उठानी पड़ सकती है। आर्थिक से लेकर भावनात्मक रूप से आपको चोट पंहुच सकती है। आपकी राशि से पंचम भाव में बृहस्पति वक्र होंगे यह आपके लिये संतान, विद्या और प्रेम संबंधो में चिंताजनक स्थितियां पैदा करने वाला हो सकता है।

मिथुन

मिथुन राशि में गुरु के वक्र होने से सामान्य प्रभाव रहने के आसार हैं। आपकी राशि से गुरु चतुर्थ भाव में वक्र होंगे। वक्र समय में ही सुख संबंधी चिंताए रह सकती हैं। माता को कष्ट हो सकता है। इस समय में अपनी के स्वास्थ्य के प्रति विशेष रूप से सचेत रहें। ऐसा कोई भी कदम न उठायें जिससे आपकी माता की भावनाएं आहत हों। गुरु के मार्गी होने पर स्थितियां सामान्य होने के आसार हैं।

कर्क

कर्क राशि का स्वामी चंद्रमा है। चंद्रमा और बृहस्पति का मधुर संबंध माना जाता है। आपकी राशि से तीसरे भाव में बृहस्पति वक्री होंगे। इस समय आप जो भी कार्य कर रहे हैं वह बिना फल की इच्छा किये करते रहें। असल में आपका पराक्रम ही इस समय आपको लाभ दिला सकता है। भाई बहनों के संबंधों में भी कुछ समय के लिये दिक्कतें आ सकती हैं। विवेकपूर्ण और प्रेमवत संबंधों से ही आपके भाई-बहनों के प्रति जुड़ाव बना रह सकता है।

सिंह

सिंह राशि के स्वामी सूर्य के साथ बृहस्पति का संबंध मित्रवत माना जाता है। आपकी राशि से बृहस्पति दूसरे भाव में वक्र होंगे। यह आपके लिये धन संबंधि चिंताएं बढ़ाने वाला हो सकता है। यदि आप किसी नये कार्य का शुभारंभ करने के इच्छुक हैं तो इस समय किसी बाधा के कारण उसमें विलंभ हो सकता है। आपके लिये सलाह है कि इस समय व्यर्थ कि चिंताओं में न पड़ें और अपने भविष्य की योजनाओं पर काम करते रहें। ऐसा करने से भविष्य में आपकी सफलता का मार्ग प्रशस्त होने के आसार हैं।

कन्या

कन्या राशि का स्वामी बुध है जिसके साथ बृहस्पति का मधुर संबंध है। आपकी राशि में ही बृहस्पति वक्री होंगे। यह समय आपके लिये सतर्क रहने का समय है। इस समय अपने प्रतिस्पर्धियों, अपने शत्रुओं की ओर से आपको बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है। आपके कार्य में भी रूकावटें आ सकती हैं। अपने निर्णयों को लेने के लिये दूसरों पर निर्भर न रहें। अपने बुद्धि बल का इस्तेमाल कर आप तमाम मुश्किलों से पार पा सकते हैं।

तुला

तुला राशि का स्वामी शुक्र है। शुक्र और बृहस्पति का एक दूसरे से मित्रवत संबंध माना जाता है। लेकिन तुला राशि से 12वें घर में बृहस्पति के वक्री होने से अनावश्यक खर्चों में बढ़ोतरी हो सकती है। आपसी संबंधों में भी वैचारिक मतभेद पैदा होने की संभावनाएं प्रबल हैं। हालांकि शनि के कारण आपके लिये अच्छे समय की शुरुआत भी होने के आसार हैं। बेहतर होगा बृहस्पति के वक्री समय में खुद अनावश्यक वाद-विवादों से दूर रखें। यदि किसी नई परियोजना या व्यवसाय में पैसा लगाने का मन बना रहे हैं तो एस्ट्रोयोगी ज्योतिषाचार्यों की सलाह है कि जून तक अपने इस फैसले को स्थगित रखें।

वृश्चिक

वृश्चिक राशि का स्वामी मंगल है जो कि बृहस्पति के साथ मित्रता का संबंध रखता है। आपके लिये बृहस्पति का वक्री होना ज्यादा चिंताजनक नहीं है। आपकी राशि से ग्यारहवें घर में बृहस्पति के वक्री होने से कुछ समय के लिये आंशिक लाभ ही मिलने के आसार हैं। बृहस्पति के मार्गी होने पर पुन: यथावत कार्य आरंभ हो सकते हैं। चूंकि आपकी राशि से शनि का स्थान परिवर्तन होने से आप पर बृहस्पति का विशेष प्रभाव नहीं पड़ेगा।

धनु

धनु राशि का स्वामी बृहस्पति जो कि स्वयं वक्र होंगे। आपको सच्चे मित्रों, सगे संबंधियों की पहचान इसी समय में हो सकती है। कुछ समय के लिये समय आपके लिये विपरीत रह सकता है लेकिन अपने परिश्रम और बुद्धिबल से इस समय को अपने अनुकूल भी आप कर सकते हैं। वक्री समय में पेट से संबंधित विकृतियों से प्रभावित हो सकते हैं। खान-पान का ध्यान रखें।

मकर

मकर राशि के स्वामी शनि का संबंध बृहस्पति से सामान्य है। आपकी राशि से नवम घर में बृहस्पति वक्री होंगे जो कि भाग्य का घर माना जाता है। इस समय में आपको भाग्य से ज्यादा अपने कर्म पर ध्यान देने की आवश्यकता होगी। क्योंकि वक्री बृहस्पति होने से भाग्य अनुकूल नहीं रहता। आप पर पहले से शनि की साढ़ेसाती शुरु हो चुकी है। यही समय है जब आप अपने विवेक से काम लेकर अनिष्ट को रोक सकते हैं। आपकी राशि बृहस्पति की नीच राशि भी मानी जाती है। बृहस्पति का पूजन अर्चन करके उन्हें शांत कर सकते हैं।

कुंभ

कुंभ राशि के स्वामी शनि का बृहस्पति के साथ मित्रवत संबंध माना जाता है। यह समय आपके लिये मध्यम लाभकारी रहने के आसार हैं। आपकी राशि से आठवें घर में बृहस्पति वक्री होंगे। पेट संबंधी रोग होने के संकेत हैं सतर्क रहें। व्यर्थ की यात्रा व सामाजिक अपमान का भी सामना करना पड़ सकता है। वक्री समय में विशेष रुप से सावधान रहें।

मीन

मीन राशि का स्वामी बृहस्पति है जो कि वक्री हो रहे हैं। बृहस्पति के वक्री समय में आपको अचानक कोई बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। किसी बड़े व्यक्ति का साथ न मिलने से अपने महत्वपूर्ण निर्णय आपको स्वयं लेने पड़ सकते हैं। अपने आपको साबित करने के लिये यह समय आपके लिये बहुत ही अच्छा है। आपकी राशि से सातवें घर में वक्री होने से दांपत्य जीवन में भी उतार-चढ़ाव आने के संकेत हैं। हालांकि समय के साथ-साथ परिस्थितियां अनुकूल भी होने की संभावना प्रबल है।

वक्री बृहस्पति के नकारात्मक प्रभाव से बचने के लिये एस्ट्रोयोगी पर देश के जाने माने ज्योतिषाचार्यों से परामर्श करें। परामर्श करने के लिये लिंक पर क्लिक करें।

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