Kamada Ekadashi 2022: कामदा एकादशी के दिन श्रीहरि को करें इन 108 नामों और मंत्रों से प्रसन्‍न

bell icon Tue, Apr 12, 2022
टीम एस्ट्रोयोगी टीम एस्ट्रोयोगी के द्वारा
हिंदू धर्म में भगवान श्री विष्णु (Lord Shri Vishnu) को त्रिदेवों में से श्रेष्‍ठ माना गया है। कहते हैं कि जगत का पालनहार विष्णु भगवान ही करते हैं।

Kamada Ekadashi 2022: कामदा एकादशी व्रत का विशेष महत्‍व है, यह व्रत चैत्र मास के शुक्‍ल पक्ष की एकादशी को रखा जाता है। हिंदू नववर्ष के पहले माह में पड़ने वाली एकादशी को कामदा एकादशी कहते हैं। कामदा एकादशी (Kamada Ekadashi) व्रत के दिन भगवान विष्णु (Lord Vishnu) की विधि-विधान के साथ पूजा करने से समस्त पापों से मुक्ति मिलती है। इस उपवास से सर्वसिद्ध और मनोकामना की पूर्ति होती है, इस दिन भगवान हरि की विधिवत पूजा अर्जना करने से प्रेत योनि से मुक्‍त‍ि मिल जाती है, घर के सभी कलेश, संकट आर्थिक तंगी दूर हो जाती है। तो चालिए जानते है कि आज हम किन मंत्रों और किन 108 नामों के जप से अपने जीवन में सुश शांति प्राप्‍त कर सकते हैं। 

भगवान विष्‍णु के 10 अवतार:

हिंदु धार्मिक मान्‍यताओं के अनसार, धरती पर बढते पापों का नाश करने के लिए भगवान ने स्‍वयं इस संसार में अपने कई अवतार के रूप में प्रकट हुए, तो चालिए जाते हैं भगवान श्रीहरि के 10 अवतार (Avatars of Lord Vishnu) कौन-कौन से हैं।

  • पहला अवतार - मत्स्य अवतार
  • दूसरा अवतार - कूर्म अवतार
  • तीसरा अवतार - वराह अवतार
  • चौथा अवतार - नृसिंह अवतार
  • पांचवां अवतार- वामन अवतार
  • छठवां अवतार - परशुराम अवतार
  • सातवां अवतार- प्रभु श्रीराम अवतार
  • आठवां अवतार - श्रीकृष्ण अवतार
  • नौवां अवतार- बुद्ध अवतार
  • दसवां अवतार- कल्कि अवतार

श्रीहरि को इन मंत्रों से करें प्रसन्न:

कामदा एकादशी व्रत के दिन भगवान विष्णु (Lord vishnu mantra) को खुश करने और उनसे मनोवांछित फल पाने के लिए नीचे दिए गए मंत्रों का जाप कर सकते हैं।

  • श्री कृष्‍ण गोविन्‍द हरे मुरारे, हे नाथ नारायण वासुदेवा
  • ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्‍नो विष्‍णु प्रचोदयात्
  • ॐ नमोः नारायणाय
  • ॐ नमोः भगवते वासुदेवाय
  • ॐ श्री विष्णवे च विद्महे वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥ मंगलम भगवान विष्णु, मंगलम गरुणध्वज:। मंगलम पुण्डरी काक्ष:, मंगलाय तनो हरि:
  • ॐ नमो नारायण, श्री मन नारायण नारायण हरि हरि
  • ॐ विष्णवे नम:
  • ॐ हूं विष्णवे नम:
  • शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्ण शुभाङ्गम्। लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यम् वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्

श्री हरि की पंचरूप मंत्र से करें पूजा:

  • ॐ अं वासुदेवाय नम:
  • ॐ आं संकर्षणाय नम:
  • ॐ ह्रीं कार्तविर्यार्जुनो नाम राजा बाहु सहस्त्रवान, यस्य स्मरेण मात्रेण ह्रतं नष्‍टं च लभ्यते
  • ॐ अं प्रघुम्‍नाय नम:
  • ॐ नारायणाय नम:

श्री हरि के मंत्र और पूजन विधि:

  • सबसे पहले भगवान विष्‍णु की प्रतिमा को गंगाजल और पंचामृत से स्नान कराएं और पीला वस्त्र धारण करें।
  • जिसके बाद केसर, चंदन, फूल, तुलसी की माला, पीताम्बरी वस्त्र, कलावा, फल चढ़ाएं।
  • उसके बाद भगवान के सामने धूप और दीप जलाकर पीले आसन पर बैठें।
  • तुलसी की माला से विष्णु गायत्री मंत्र का जप करें।
  • इसके बाद भगवान से अपनी मनोकामना कहें।

विष्णु भगवान के 108 नाम:

हिंदू धर्म में भगवान श्री विष्णु (Lord Shri Vishnu) को त्रिदेवों में से श्रेष्‍ठ माना गया है। कहते हैं कि जगत का पालनहार विष्णु भगवान ही करते हैं। मान्‍यता है कि भगवान हरि की पूजा करते समय इन नामों का जप करना चाहिए। शास्त्रों में भगवान विष्णु के अनेकों नाम का वर्णन किया है। तो चालि‍ए जानते है विष्णु भगवान के 108 नाम (Bhagwan Vishnu ke 108 Naam)

  1. नारसिंहवपुष
  2. श्रीमान् 
  3. केशव
  4. पुरुषोत्तम 
  5. सर्व
  6. शर्व
  7. शिव
  8. स्थाणु 
  9. भूतादि
  10. निधिरव्यय
  11. नारायण 
  12. विष्णु
  13. वषट्कार
  14. भूतभव्यभवत्प्रभु
  15. भूतभावन
  16. पूतात्मा
  17. परमात्मा 
  18. मुक्तानां परमागति
  19. अव्यय
  20. पुरुष
  21. साक्षी
  22. क्षेत्रज्ञ
  23. गरुड़ध्वज
  24. योग
  25. योगाविदां नेता
  26. प्रधानपुरुषेश्वर 
  27. भूतकृत
  28. भूतभृत
  29. भाव 
  30. भूतात्मा 
  31. सम्भव 
  32. भावन 
  33. भर्ता
  34. प्रभव
  35. प्रभु
  36. ईश्वर 
  37. स्वयम्भू 
  38. शम्भु 
  39. आदित्य 
  40. पुष्कराक्ष
  41. महास्वण 
  42. अनादिनिधन
  43. धाता 
  44. विधाता 
  45. धातुरुत्तम 
  46. त्रिककुब्धाम 
  47. पवित्रां 
  48. मंगलपरम्
  49. ईशान
  50. प्राणद 
  51. प्राण 
  52. ज्येष्ठ 
  53. अप्रेमय 
  54. हृषीकेशा 
  55. पद्मनाभ
  56. अमरप्रभु 
  57. विश्वकर्मा
  58. मनु
  59. त्वष्टा 
  60. स्थविष्ठ
  61. श्रेष्ठ 
  62. वृषाकपि
  63. अमेयात्मा
  64. सर्वयोगविनि
  65. वसु
  66. वसुमना
  67. सत्य
  68. समात्मा
  69. सममित
  70. प्रजापति 
  71. हिरण्यगर्भ
  72. भूगर्भ 
  73. माधव 
  74. मधुसूदन
  75. ईश्वर
  76. सुरेश
  77. शरणम
  78. शर्म 
  79. विश्वरेता 
  80. प्रजाभव 
  81. अह्र 
  82. सम्वत्सर
  83. व्याल 
  84. प्रत्यय 
  85. सर्वदर्शन 
  86. अज 
  87. सर्वेश्वर 
  88. सिद्ध 
  89. सिद्धि 
  90. सर्वादि 
  91. अच्युत 
  92. विक्रमी 
  93. धन्वी 
  94. मेधावी 
  95. विक्रम 
  96. क्रम 
  97. अनुत्तम 
  98. दुराधर्ष 
  99. कृतज्ञ 
  100. कृति 
  101. आत्मवान 
  102. स्थविरो ध्रुव
  103. अग्राह्य 
  104. शाश्वत 
  105. कृष्ण 
  106. लोहिताक्ष 
  107. प्रतर्दन 
  108. प्रभूत 

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✍️ By- टीम एस्ट्रोयोगी

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