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क्या आप जानते हैं ‘लॉ आफ अट्रैक्शन` के बारे में? या यह सिर्फ एक रहस्य है ?


क्या आप जानते हैं ‘लॉ आफ अट्रैक्शन` के बारे में? या यह सिर्फ एक रहस्य है ?

घर से ऑफिस के लिए निकलते वक़्त आप सबसे पहले क्या सोचते हैं? यही ना कि “काश आज हम जल्दी ऑफिस पहुँच जायें! यार आज रास्ते में जाम और ट्रेफिक ना मिले.” और यह सोचने से होता क्या है? रास्ते में जाम मिलता है और आप ऑफिस के लिए लेट हो जाते हैं.

यही नहीं हमारे साथ जो भी गलत हो रहा होता है उसके लिए कहीं ना कहीं हम ही जिम्मेवार होते हैं. हम हर कार्य की शुरुआत ही ‘ना’ से करते हैं. जैसे कि कोई व्यवसाय शुरू करने से पहले हम सोचते हैं यार अगर व्यवसाय नहीं चला तो क्या होगा? हम कभी पहले यह नहीं सोचते हैं कि अगर यह काम चल गया तो क्या होगा? और तो और इंटरव्यू पर जाते वक़्त हम सोचते हैं कि भगवान हम फेल ना हो जायें ? इन बातों का तात्पर्य यह नहीं है कि आप भविष्य की तैयारी ना करो. कोई भी व्यवसाय शुरू करते वक़्त जरूर सोचो कि पास होने की स्थिति में आप क्या करोगे और फेल होने पर क्या करोगे. लेकिन उसके बाद बार-बार असफलता को सोचने का अर्थ है कि असफलता को अपने पास बुला रहे हो.


आइये अब आपको बताते हैं कि सब होता कैसे हैं-

क्या आपने कभी लॉ आफ अट्रैक्शन या आकर्षण का सिद्धांत के बारें में सुना है? शुरुआत करते हैं कुछ उदाहरणों से, रामायण के युद्ध में भगवान श्रीराम जी श्रीलंका से ही अपने गुरु से बात किया करते थे. रोज सुबह समुद्र किनारे बैठकर, गुरू का ध्यान करते थे और वहां से बात हो जाती थी. राम भक्त हनुमान जी भी भगवान श्री नाम का जाप करते थे और विराट रूप धारण कर लिया करते थे. महाभारत में भी आँख बंद कर ध्यान करने से हाथों में शस्त्रों को आते हमने देखा है. मशहूर अभिनेता और मार्शल आर्ट कलाकार ब्रूस ली ने खुद को एक चिठ्ठी लिखी थी,  जिसमे उन्होंने अपने सपने तथा लक्ष्य का जिक्र किया था और आगे वह खुद बताते हैं कि वह इसे रोज़ पढ़ा करते थे तथा खुद को प्रेरित रखते थे.

तो ऊपर बताये गये उदाहरणों में एक बात तो कॉमन है और वह है व्यक्ति का मस्तिष्क. पूर्व समय में लोग इंसान के मस्तिष्क की शक्ति को भली-भांति समझते थे. आज विज्ञान भी इस बात को कहता है कि इंसान के दिमाग से हर समय कुछ तरंगे निकलती रहती हैं. हमारे दिमाग में कोई भी विचार चले, वह ब्रह्माण्ड में तरंगों के रूप में जाते है. हम अच्छी या बुरी हर निजी घटना को खुद की ओर आकर्षित करते हैं. इसी को ‘लॉ आफ अट्रैक्शन’ या ‘आकर्षण का सिद्धांत’ कहते हैं.   


क्या है आकर्षण का सिद्धांत?

" अगर किसी चीज़ को दिल से चाहो तो सारी कायनात उसे तुम से मिलाने में लग जाती है". आकर्षण का सिद्धांत यह कहता है कि आप अपने जीवन में हर उस चीज को आकर्षित करते हैं जिसके बारे में आप सोचते हैं. आपकी प्रबल सोच हकीक़त बनने का कोई ना कोई रास्ता निकाल लेती है. हर बड़ी शख्सियत या बड़ा नाम आपको सकारात्मकता से भरा हुआ मिलेगा, बेशक संघर्षों के बिना जीत नहीं मिलती है किन्तु यदि आप सकारात्मक सोच के साथ लड़ते रहते हैं तो निश्चित रूप से जीत भी मिल जाती है.


आकर्षण का सिद्धांत कैसे काम करता है?

आप यदि प्रतिदिन किसी एक चीज पर ध्यान लगाते हैं तो वह वस्तु या विचार आपके पास आने लगता है. विश्व की प्रसिद्ध पुस्तक ‘ दी सीक्रेट्स’ इस बारे में कहती है कि “आकर्षण का यह सिद्धांत आपको सब कुछ देता हैं. हम जो कुछ भी चाहे पा सकते हैं, चाहें वो कितना भी बड़ा क्यों ना हों. बस हमें यह पता होना चाहिए कि आखिर हम चाहतें क्या हैं, यह बिलकुल स्पष्ट होना चाहिए. हमें स्पष्ट पता होना चाहिए कि हमारी असली चाहत क्या हैं?
हम जो भी सोच रहे होते हैं उसे हम अपने ओर अट्रेक्ट कर रहे होते हैं”. हम अपने दिमाग में विचार उत्पन्न करते हैं और फिर हमारा मस्तिष्क उसी हिसाब से काम करता है.


कैसे करें शुरुआत?

सबसे पहले व्यक्ति को सकारात्मक विचारों के साथ जीना सीखना चाहिए. दूसरे स्तर पर हर व्यक्ति को अपना लक्ष्य पता होना चाइये. अपने लक्ष्य को निरंतर अपनी आँखों के सामने रखना चाहिए. उस लक्ष्य के प्रति कभी भी नकारात्मक नहीं सोचना चाहिए. अंतिम बात जो बहुत महत्वपूर्ण है वह है धैर्य. किसी भी स्थिति में धैर्य नहीं खोना चाहिए.

याद रखें कि आपके विचार ही आपकी जिंदगी को बना रहे हैं, आप नकारात्मक सोचते हो तो आप नकारात्मक जीवन पाओगे और अगर सकारात्मक सोचते हो तो आप एक सकारात्मक जीवन का आनंद ले सकते हैं.






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