रमदान का महत्व - क्यों रखते हैं रोज़ा?

23 अप्रैल 2020

हिजरी या इस्लामी चन्द्र कैलेंडर के नौवें महीने को ‘रमदान-अल-मुबारक’ या रमदान कहा जाता है| इस पूरे महीने में दुनिया भर के मुसलमानों द्वारा रोज़े रखे जाते हैं जिसमें इस दौरान दिनभर कुछ भी खाना या पीना मना होता है| रोज़ा सबके लिए एक फ़र्ज़ है जिसें रखने से आत्मा की शुद्धि, अल्लाह की तरफ पूरा ध्यान, और कुर्बानी का अभ्यास होता हैं और आदमी किसी भी तरह के लालच से खुद को दूर रखने में कामयाब हो पाता है|

 

रमदान का महत्व - क्यों रखते हैं रोज़ा?

इस्लाम के तहत रमदान के वक़्त सभी मुसलमानों को अपनी ज़िन्दगी के मक़सद को फिर से समझने की कोशिश करनी चाहिए| अगर किसी ने हमारे साथ गलत किया है, तो भी उन्हें माफ़ करें| परिवार और दोस्तों के साथ रिश्ता पुख्ता करें और बुरी आदतों को छोड़े| अपनी सोच, अपनी ख्वाहिशों को पाक रखे| अरबी में रोज़ा को ‘सौम’ कहा जाता है जिसका अर्थ है परहेज़ करना – ना केवल खाने-पीने से बल्कि बुरे काम, बुरी सोच और बुरे शब्दों से भी|

 

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रमदान के दौरान शरीर के हर हिस्से से परहेज़ करना चाहिए| जुबान किसी के बारे में बुरा ना बोले, चुगली न करें| आँखों से कुछ भी गलत होता ना देखे, ना नज़रंदाज़ करें| हाथ से किसी दूसरें का कोई भी सामान बिना पूछें ना छुए और ना ही लें| कानों से चोरी-छिपे ना किसी की बात सुने और ना ही कोई भद्दे शब्द सुने| पैरों से किसी भी नापाक जगह ना जाए| इसी तरह से शरीर के हर अंग से परहेज़ कर रोज़ा पूरा किया जाता है|

इसलिए रोज़े सिर्फ शारीरिक परहेज़ नहीं है, बल्कि एक इंसान के शरीर और रूह यानि आत्मा का रोज़े के भाव की तरफ एक ज़िम्मेदारी है| एस्ट्रोयोगी.कॉम की यही दुआ है कि रमदान के इस महीने में अल्लाह की इबादत के लिए सबको हिम्मत मिलें और उनका दिल पाक-साफ रहें|

 

2020 में कब शुरु हो रहे हैं रोज़े

इस साल 23 अप्रैल को चांद दिखाई देने पर 24 अप्रैल को पहला रोजा रखा जायेगा। 30 दिनों तक रोजा रखने का यह पर्व 23 मई तक चलेगा इसके पश्चात 24 मई को ईद का त्यौहार मनाया जायेगा। इस दौरान सहरी का वक्त सुबह 4:31 बजे के आसापास तो इफ्तार का समय 7 बजे के बाद ही रहेगा।

 

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