Skip Navigation Links
राम नाथ कोविंद की कुंडली में हैं राष्ट्रपति बनने के योग?


राम नाथ कोविंद की कुंडली में हैं राष्ट्रपति बनने के योग?

राष्ट्रपति चुनाव को लेकर काफी गहमागहमी के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की ओर से राष्ट्रपति उम्मीद्वारों के नाम तय हो चुके हैं। राजनीतिक समीकरणों से राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के उम्मीद्वार और बिहार राज्य के पूर्व राज्यपाल राम नाथ कोविंद का राष्ट्रपति बनना लगभग तय माना जा रहा है। राम नाथ कोविंद की कुंडली का ज्योतिषीय अध्ययन करने के पश्चात भी इनके राष्ट्रपति बनने की प्रबल संभावनाएं जताई जा रही हैं। आइये जानते हैं राम नाथ कोविंद की कुंडली में वे कौनसे योग हैं जो राष्ट्रपति उम्मीद्वार के रूप में इनकी दावेदारी को मजबूत बना रहे हैं।

राम नाथ कोविंद की कुंडली

नाम – रामनाथ कोविंद

जन्मतिथि – 5 सितंबर 1946

जन्म समय – 19:46

जन्म स्थान – परोंख, डेरापुर, कानपुर, उत्तर प्रदेश, भारत।

उपरोक्त विवरण के अनुसार राम नाथ कोविंद की जन्म कुंडलिका मीन लग्न व धनु राशि की है। मूल नक्षत्र के चौथे चरण में इनका जन्म हुआ है। वर्तमान में इन पर बृहस्पति की महादशा तो शुक्र का अंतर व चंद्र का प्रत्यंतर चल रहा है।

कुंडली में गुरु-शुक्र की युति बना रही है राष्ट्रपति बनने के योग

इनकी कुंडलिका का आकलन किया जाये तो इनकी कुंडली के अनुसार देव गुरु बृहस्पति इनके लग्न मीन व इनकी चंद्र राशि धनु के स्वामी हैं। लग्नेश व राशेश बृहस्पति शुक्र के साथ युति बनाकर अष्टम भाव में बैठे हुए हैं जो कि इनके लिये राजयोग का निर्माण कर रहे हैं।

शनि की साढ़ेसाती दे सकती है अंतिम चरण में धोखा

कर्मभाव में शनि की साढ़ेसाती भी इन पर चल रही है। इन्हें राष्ट्रपति पद के लिये एक प्रबल दावेदार तो माना जा रहा है लेकिन शनि की साढ़ेसाती कई बार अंतिम चरण में धोखा देने वाली भी साबित होती है। फिर भी ग्रहों की दशा एवं कुंडली में राजयोग के चलते इनका भाग्य प्रबल रहने के आसार हैं। यही कारण है कि कोविंद संघर्षों के बावजूद राष्ट्रपति उम्मीद्वार तक का सफर तय कर पाये हैं।

जन्म तिथि और कुंडली विवरण हैं भिन्न

हालांकि श्री राम नाथ कोविंद जी की कुंडली जो उपरोक्त विवरण के अनुसार बनी है उसकी पुष्टि अन्य ज्योतिषीय पोर्टल से भी हुई है लेकिन वहीं विकिपीडिया सहित उनके जीवन परिचय को प्रकाशित करने वाले विभिन्न वेब पोर्टल से रामनाथ कोविंद की जन्मतिथि का मिलान किया जाये तो वह भिन्न प्राप्त होती है। विकिपीडिया के अनुसार इनका जन्म 1 अक्तूबर 1945 को हुआ था। इस तिथि के अनुसार इनके जन्म का समय उपलब्ध नहीं है। यदि इस जन्मतिथि को आधार मानकर उनकी कुंडलिका का आकलन करें तो विवरण कुछ इस प्रकार होगा।

नाम – रामनाथ कोविंद

जन्मतिथि – 1 अक्तूबर 1945

जन्म समय – 00:00 (अज्ञात)

जन्म स्थान – परोंख, डेरापुर, कानपुर, उत्तर प्रदेश, भारत।

इस विवरण से इनकी कुंडलिका मिथुन लग्न एवं कर्क राशि की बनती है। पुष्य नक्षत्र में इनका जन्म माना गया है। वर्तमान में इन पर मंगल की महादशा, केतु का अंतर तो शुक्र का प्रत्यंतर चल रहा है।

अंगारक दोष है राजनीति के लिये प्रतिकूल

लग्न में मंगल के साथ राहू विराजमान होने से इनके लिये अंगारक दोष बना हुआ है जो कि राजनीति के क्षेत्र में प्रतिकूल माना जाता है इसी पीड़ित मंगल की दशा भी इन पर चल रही है। कर्मेश बृहस्पति सूर्य के साथ अस्त होने से इस कुंडलिका के अनुसार इनके राजयोग में कमी को दर्शाते हैं। भाग्येश शनि भी वर्तमान में वक्र दशा के हैं जो कि पूर्ण रूप से सहायक नहीं माने जा सकते। यदि यह विवरण सत्य माना जाये तो ज्योतिषीय आकलन के अनुसार इनके राष्ट्रपति बनने की संभावनाएं कम नज़र आती हैं।

कुल मिलाकर सटीक जन्मतिथि व जन्मसमय के अभाव में किसी निष्कर्ष पर पंहुचना बहुत मुश्किल है लेकिन अभी तक बने राजनीतिक समीकरणों से रामनाथ कोविंद का विपक्ष की उम्मीद्वार और पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार को पराजित करना तय माना जा रहा है। 

आपकी कुंडली में कौनसे योग हैं जानने के लिये एस्ट्रोयोगी पर भारत के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्यों से परामर्श करें।




एस्ट्रो लेख संग्रह से अन्य लेख पढ़ने के लिये यहां क्लिक करें

देवशयनी एकादशी 2018 – जानें देवशयनी एकादशी की व्रतकथा व पूजा विधि

देवशयनी एकादशी 201...

साल भर में आषाढ़ महीने की शुक्ल एकादशी से लेकर कार्तिक महीने की शुक्ल एकादशी तक यज्ञोपवीत संस्कार, विवाह, दीक्षाग्रहण, ग्रहप्रवेश, यज्ञ आदि धर्म कर्म से जुड़े जितने ...

और पढ़ें...
आषाढ़ पूर्णिमा 2018 – जानें गोपद्म व्रत व पूजा की विधि

आषाढ़ पूर्णिमा 201...

वैसे तो प्रत्येक माह की पूर्णिमा तिथि धार्मिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण होती है लेकिन आषाढ़ माह की पूर्णिमा और भी खास होती है। आषाढ़ पूर्णिमा को ही गुरु पूर्णिमा के ...

और पढ़ें...
चंद्र ग्रहण 2018 - 2018 में कब है चंद्रग्रहण?

चंद्र ग्रहण 2018 -...

चंद्रग्रहण और सूर्य ग्रहण के बारे में प्राथमिक शिक्षा के दौरान ही विज्ञान की पुस्तकों में जानकारी दी जाती है कि ये एक प्रकार की खगोलीय स्थिति होती हैं। जिनमें चंद्रम...

और पढ़ें...
कर्क संक्रांति - कर्क राशि में सूर्य, बुध व राहू का साथ! कैसे रहेंगें हालात? जानिए

कर्क संक्रांति - क...

सूर्य ज्योतिषशास्त्र में बहुत ही प्रभावी ग्रह माने जाते हैं। सूर्य का राशि परिवर्तन करना संक्रांति कहलाता है। 17 जुलाई को सूर्य मिथनु राशि से कर्क में आ गये हैं। कर्...

और पढ़ें...
गुप्त नवरात्र 2018 – जानिये गुप्त नवरात्रि की पूजा विधि एवं कथा

गुप्त नवरात्र 2018...

देवी दुर्गा को शक्ति का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि वही इस चराचर जगत में शक्ति का संचार करती हैं। उनकी आराधना के लिये ही साल में दो बार बड़े स्तर पर लगातार नौ...

और पढ़ें...