Skip Navigation Links
बुलंद हौसलों के साथ बॉलीवुड में छायें हुए हैं रणदीप हुड्डा


बुलंद हौसलों के साथ बॉलीवुड में छायें हुए हैं रणदीप हुड्डा

हरियाणा के जाट परिवार में 1976 को जन्मे रणदीप हुड्डा के पिता रणबीर हुड्डा एक डॉक्टर तथा मां आशा हुड्डा एक राजनैतिक कार्यकर्ता हैं। बॉलीवुड में रणदीप हुड्डा का आगमन किसी बड़ी फ़िल्म या हिट फ़िल्म से तो नहीं हुआ है. सन 2001 में इनकी पहली फ़िल्म ‘मानसून वैडिंग’ थी. साल 2005 तक इनका संघर्ष जारी रहा और इस साल राम गोपाल वर्मा द्वारा लिखित फ़िल्म ‘डी’ में जरुर इनकी अदाकारी को सराहना प्राप्त हुई. अपनी धैर्य शक्ति के साथ काम करते हुए, इनकी ‘किक’ और ‘हाईवे’ जैसी फिल्में जरुर हिट हुईं हैं और आज रणदीप हुड्डा फ़िल्मी दुनिया में अपनी पहचान बनाने में कामयाब हो चुके हैं. 

आगामी 20 अगस्त को रणदीप हुड्डा अपना 39 वां जन्मदिन मनाने जा रहे हैं। रणदीप हुड्डा के जन्मदिन के मौके पर, आइये एक नजर डालते हैं कि इनका आने वाला समय इनके लिए कैसा रहेगा-

नाम- रणदीप हुड्डा

जन्म तिथि- 20 अगस्त 1976 

जन्म स्थान- हरियाणा

जन्म समय- ज्ञात नहीं   


लग्न-तुला, चन्द्र राशि- वृष, महादशा- शनि, अंतर दशा- शनि, प्रत्यांतर- केतु, नक्षत्र- मर्गशिरा नक्षत्र, दूसरा चरण

तुला लग्न वाले जातक सुन्दर, आकर्षित व चलने वाले होते हैं. कहा जाता है कि इन जातकों का कार्य थोड़ा धीमे जरूर हो जाए किन्तु कभी रूकता नहीं है.

रणदीप हुड्डा की बात करें तो इनकी कुंडली में अभी शनि की महादशा चल रही है और तुला लग्न में शनि की महादशा एक योगकारी कारक मानी जाती है. अभी इनकी कुंडली में शनि दसमं भाव में विराजमान है और दसमं भाव कार्य का घर माना जाता है. शनि की तासीर यह होती है कि वह जिस घर में बैठा हुआ होता है उस घर के लिए वह अच्छा करता है. और अभी इनकी कुंडली में शनि कार्य के क्षेत्र में मौजूद है तो काम में यह पूरा सहयोग प्रदान कर रहा है. इसके बाद तुला लग्न में शनि केंद्र त्रिकोण का मालिक होकर, केंद्र में शनि का आना भी शुभ होता है. इन दोनों योगों की वजह से रणदीप हुड्डा का कार्य अभी सही चल रहा है.

इनकी कुंडली में मौजूद कालसर्प दोष जरूर इनको समय-समय पर प्रभावित कर रहा है. यह दोष जातक की प्रसिद्धी को समय-समय पर प्रभावित करता है. कभी यह व्यक्ति को सफलता दिलाता है तो कभी असफलता से मिलवा भी देता है.

अगर हम आगामी समय की बात करें तो आने वाला वर्ष इनके लिए बहुत ही शुभ साबित हो सकता है. इस समय में मान-सम्मान, नाम और धन सभी तरह से इनको लाभ प्राप्त हो सकता है. इनकी आगामी वर्ष कुंडली में मंगल दसमं में और चंद्रमा लग्न में है. इन दोनों ग्रहों का दृष्टि संबंध बन रहा है जो ज्योतिष में लक्ष्मी नारायण योग के नाम से जाना जाता है. लक्ष्मी जी की इस वर्ष इन पर कृपा बनी रह सकती है.

दूसरी तरफ सूर्य और बुध का भी लाभ स्थान में योग होने से (सूर्य ग्यारहवें घर और बुध भाग्य स्थान पर) एक बुधादित्य योग का निर्माण हो रहा है. ऐसा योग जातक को मान-सम्मान और फाइनेंस में लाभ प्रदान करता है.

एस्ट्रोयोगी ज्योतिष के अनुसार रणदीप हुड्डा का आगामी वर्ष तो काफी अच्छा है किन्तु इनकी जन्म कुंडली में मंगल बारहवें स्थान पर विराजित है जो थोड़ा परेशानी का कारण बन सकता है. बारहवें स्थान पर मंगल, तुला लग्न वालों को निजी जीवन और धन संबंधित समस्याओं से समय-समय पर रूबरू करा सकता है. यदि इस साल इनकी कुंडली में लक्ष्मी नारायण योग और बुधादित्य योग नहीं बन रहा होता तो तब उस स्थिति में बारहवें स्थान का मंगल इनको परेशान कर सकता था.

यदि इसके उपाय की बात करें तो नित्य रोज हनुमान पूजा और हनुमान चालीसा का पाठ इनको करना चाहिए. मंगलवार को लाल चीजो के दान और हनुमान जी के उपवास से भी पीड़ा कम हो सकती है.

एस्ट्रोयोगी रणदीप हुड्डा को इनके जन्मदिवस की बधाई देता है और उम्मीद करता है कि आगामी समय इनके लिए अच्छा रहेगा।





एस्ट्रो लेख संग्रह से अन्य लेख पढ़ने के लिये यहां क्लिक करें

शुक्र मार्गी - शुक्र की बदल रही है चाल! क्या होगा हाल? जानिए राशिफल

शुक्र मार्गी - शुक...

शुक्र ग्रह वर्तमान में अपनी ही राशि तुला में चल रहे हैं। 1 सितंबर को शुक्र ने तुला राशि में प्रवेश किया था व 6 अक्तूबर को शुक्र की चाल उल्टी हो गई थी यानि शुक्र वक्र...

और पढ़ें...
वृश्चिक सक्रांति - सूर्य, गुरु व बुध का साथ! कैसे रहेंगें हालात जानिए राशिफल?

वृश्चिक सक्रांति -...

16 नवंबर को ज्योतिष के नज़रिये से ग्रहों की चाल में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव हो रहे हैं। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार ग्रहों की चाल मानव जीवन पर व्यापक प्रभाव डालती है। इस द...

और पढ़ें...
कार्तिक पूर्णिमा – बहुत खास है यह पूर्णिमा!

कार्तिक पूर्णिमा –...

हिंदू पंचांग मास में कार्तिक माह का विशेष महत्व होता है। कृष्ण पक्ष में जहां धनतेरस से लेकर दीपावली जैसे महापर्व आते हैं तो शुक्ल पक्ष में भी गोवर्धन पूजा, भैया दूज ...

और पढ़ें...
गोपाष्टमी 2018 – गो पूजन का एक पवित्र दिन

गोपाष्टमी 2018 – ग...

गोपाष्टमी,  ब्रज  में भारतीय संस्कृति  का एक प्रमुख पर्व है।  गायों  की रक्षा करने के कारण भगवान श्री कृष्ण जी का अतिप्रिय नाम 'गोविन्द' पड़ा। कार्तिक शुक्ल ...

और पढ़ें...
देवोत्थान एकादशी 2018 - देवोत्थान एकादशी व्रत पूजा विधि व मुहूर्त

देवोत्थान एकादशी 2...

देवशयनी एकादशी के बाद भगवान श्री हरि यानि की विष्णु जी चार मास के लिये सो जाते हैं ऐसे में जिस दिन वे अपनी निद्रा से जागते हैं तो वह दिन अपने आप में ही भाग्यशाली हो ...

और पढ़ें...