कैसे हुई रूद्राक्ष की उत्पत्ति, इसे धारण करने के क्या हैं लााभ

रुद्राक्ष उपयोग आध्यात्मिक कार्यों में किया जाता है। माना जाता है कि रूद्राक्ष की उत्पत्ति भगवान शिव के आंसु से हुई है। रुद्राक्ष का अर्थ है रुद्र अर्थात भगवान शिव और अक्ष का अर्थ है शिव के आंख से निकला आंसू। रुद्राक्ष की उत्पत्ति के संबंध में एक कथा प्रचलित है। कथा के अनुसार, एक बार भगवान शिव ने संसार के कल्याण हेतु सैकड़ों वर्षों तक तप कर रहे थे। एक दिन अचानक उनका मन दु:खी हुआ, जब उन्होंने अपनी आंखें खोलीं तो उनकी आंसूओं की कुछ बूंदें धरती पर आ गिरती हैं। इन्हीं आंसू की बूंदों से रुद्राक्ष नामक वृक्ष उत्पन्न हुआ। इसी वृक्ष की गुठली को रुद्राक्ष के रूप में धारण किया जाता है।

रुद्राक्ष के प्रकार एवं धारण करने के लाभ

शिवपुराण की विद्येश्वर संहिता के अनुसार रुद्राक्ष के कुल 14 प्रकार हैं। सभी का अपना महत्व है। इन्हें पीरो कर माला के रूप में धारण करने से इससे मिलने वाले फल भिन्न होते हैं। धर्म ग्रंथों के अनुसार,  इन रुद्राक्षों को विधि-विधान से धारण करने से विशेष फल प्राप्त होता है।

एकमुखी रुद्राक्ष

ऐसा माना जाता है कि जिस रुद्राक्ष में एक ही आँख अथवा बिंदी हो। वह स्वयं शिव का स्वरूप है। जो धारक को सुख, मोक्ष और उन्नति प्रदान करता है। एकमुखी रुद्राक्ष से मनुष्‍य अपनी इंद्रियों को वश में कर ब्रह्म ज्ञान की प्राप्‍ति की ओर अग्रसर होता है।

द्विमुखी रुद्राक्ष

द्विमुखी रुद्राक्ष हर प्रकार की कामनाओं को पूरा करने के साथ ही दांपत्य जीवन में सुख- शांति प्रदान करता है। यह धारक को धन-धान्य और सत्संगति से शांत व पवित्र गृहस्थ जीवन का आशीर्वाद प्रदान करता है।

त्रिमुखी रुद्राक्ष

जिस व्यक्ति का मन काम में न लगता हो या जीवन जीने का आनन्द समाप्त हो चुका हो और शरीर किसी न किसी प्रकार की पीड़ा हो, तो यह रुद्राक्ष अत्यधिक लाभदायक साबित होता है|

चतुर्थमुखी रुद्राक्ष

चार मुखी रुद्राक्ष धारण करने से मानसिक रोगों में आराम मिलता है तथा धारक का स्वास्थ्य ठीक रहता है| इससे ज्ञान की प्राप्ति तथा सभी प्रकार के मानसिक कष्ट दूर होते हैं।

पंचमुखी रुद्राक्ष

यदि कोई व्यक्ति पंचमुखी रुद्राक्ष धारण करता है तो उसे हर तरह के भौतिक सुख प्राप्त होता है। पंचमुखी रूद्राक्ष रक्तचाप व हृदय संबंधी विकारों को नियंत्रित करने में सहायक है।

षष्ठमुखी रुद्राक्ष

षष्ठमुखी रुद्राक्ष धारण करने से व्यक्ति का सभी कार्यों में सफलता प्राप्त होती है। व्यवसाय और रोजगार में उन्नति प्राप्त होती है। व्यक्ति के भीतर आत्मविश्वास तथा ज्ञान का संचार होता है।

सप्तमुखी रुद्राक्ष

दरिद्रता को दूर करने वाला होता है। नौकरी और व्‍यापार में सफलता पाना चाहते हैं तो सात मुखी रुद्राक्ष से आपको लाभ होगा और भाग्‍योदय होगा।

अष्टमुखी रुद्राक्ष

ज्योतिष के अनुसार रुद्राक्ष प्रतिकूल परिस्थिति को अनुकूल बनाने में काफी प्रभावशाली है। राहु दोष के दुष्प्रभाव दूर करने के लिए अष्टमुखी रुद्राक्ष को गले या हाथ में धारण करने से राहु का दोष समाप्त होता है।

नवममुखी रुद्राक्ष

नवममुखी रुद्राक्ष धारण करने वाले को अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति मिलती है। जीवन में सुख- समृद्धि का वास होता है। सभी इच्छाओं की पूर्ती होती है।

दसमुखी रुद्राक्ष

माना जाता है कि दसमुखी रुद्राक्ष धारण करने से व्यक्ति को शांति एवं सौंदर्य का प्राप्ति होती है। धर्म शास्त्रों के अनुसार दसमुखी रुद्राक्ष धारण कर साधना करने से जल्दी सिद्धि की प्राप्ति होती है।

ग्यारह मुखी रुद्राक्ष

ग्यारह मुखी रुद्राक्ष व्यापारियों के लिए उत्तम फल प्रदान करता है। व्यक्ति को अपने भाग्य वृद्धि व सम्मान की प्राप्ति के लिए इसे जरूर धारण करना चाहिए।

बारह मुखी रुद्राक्ष

धर्म शास्त्रों के अनुसार बारह मुखी रुद्राक्ष धारण करने से तन और मन स्वस्थ होते हैं और एक विशेष प्रकार की शक्ति अनुभूति होती है | राजनीति तथा समाजसेवा करने वाले जातकों के लिए बारह मुखी रुद्राक्ष अत्यंत उत्तम माना जाता है।

तेरह मुखी रुद्राक्ष

ज्योतिष के अनुसार तेरह मुखी रुद्राक्ष ग्रहों को अनुकूल करने के लिए भी धारण किया जाता है। जो तेरह मुखी रुद्राक्ष धारण करता है उस पर महालक्ष्मी जी की कृपा बरसती है।

चौदह मुखी रुद्राक्ष

मान्यता है कि चौदह मुखी रुद्राक्ष धारण करने से व्‍यक्‍ति रुद्रलोक में वास करता है। जो लोग शनि दोष से पीड़ित हैं उन्‍हें भी चौदह मुखी रुद्राक्ष धारण करने से लाभ मिलता है।

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