जानिए मैरिड लाइफ (दांपत्य जीवन) को कैसे प्रभावित करते हैं शनि?

यदि आपके वैवाहिक जीवन में उतार-चढ़ाव आ रहे हैं? साथी के साथ अकारण ही आपका विवाद हो रहा है? संबंधों को लेकर आप असुरक्षित महसूस कर रहे हैं तो यहां आपको सावधान होने की जरूरत है। क्योंकि ये छोटी-छोटी बातें किसी बड़े विवाद का संकेत दे रही हैं जिसे आप समझ नहीं पा रहे हैं। ऐसे में आपके गृहस्थ जीवन में बड़ा भू-चाल आ सकता है। कहते हैं कि अचानक से जीवन में समस्याएं आना कोई आम बात नहीं है। कुछ चीजों को लेकर आप तनाव में आ जाते हैं कि ऐसा क्या हो गया जिससे शांतिपूर्ण जीवन में कोहराम मच गया? कहीं न कहीं इन चीजों के लिए आप खुद को दोषी मानने लगते हैं। लेकिन विश्वास करिए इसमें आपका कोई दोष नहीं है। तो आखिर दोष किसका है? तो यहां हम आपको बता दें कि इसमें दोष आपकी जन्म कुंडली में विराजमान ग्रहों का हो सकता है। कुंडली में विराजमान ग्रहों का? जी बिल्कुल पत्रिका में यदि ग्रह अपने सही स्थान पर न हो तो ये हमें कष्ट देते हैं। ऐसे में शनि का सही स्थान पर होना और भी महत्वपूर्ण बन जाता है। क्योंकि शनि यदि सही स्थिति में हैं तो आपको हर तरह के सुख को भोगने का अवसर प्राप्त होगा लेकिन गलत स्थिति में होने पर सुख आपसे विमुख हो सकते हैं। इसका असर आपके वैवाहिक जीवन पर भी पड़ेगा। कुंडली में शनि की स्थिति जानने के लिए बात करें एस्ट्रोयोगी एस्ट्रोलॉजर से।

शनि ग्रह का वैवाहिक जीवन पर असर

ज्योतिष में शनि ग्रह का खासा महत्व है कहते हैं कि जब शनि की साढ़े साती व ढइया किसी पर चलती है तो व्यक्ति सही मार्ग पर आ जाता है। चूंकि शनि को न्याय करने का अधिकार प्राप्त इसलिए इनके दंड से बचना मुश्किल भी है। परंतु नामुमकिन नहीं, सदकर्म व सच्चे तप से आप शनि देव को प्रसन्न कर सकते हैं। ज्योतिषियों का मानना है कि शनि की स्थिति के आधार पर इनका प्रभाव व फल बदल जाता है। शनि कुंडली के जिस भाव में में होंगे अपने हिसाब से ही परिणाम देंगे। यदि शनि आपकी कुंडली में परिवार भाव में विराजमान हैं तो इसका असर आपकी कुंडली की गणना करने पर ही पता चल सकता है। क्योंकि कुंडली में ग्रहों के योग से फल परिवर्तित हो जाते हैं। शनि के साथ आपके वैवाहिक भाव में कौन सा ग्रह बैठा है यह भी आपकी खुशियों को कम व बढ़ाने में अपनी भूमिका निभाता है। ऐसे में आप आपने कुंडली का आकलन योग्य व अनुभवी ज्योतिषाचार्य से करवाएं।

शनि की स्थिति के अनुसार मैरिज व मैरिड लाइफ

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जन्म कुंडली में शनि सातवें अथवा आठवें भाव में विराजमान हैं तो इस स्थिति में व्यक्ति के विवाह में देरी होती है। इसके साथ ही सातवें घर में शनि के साथ शुक्र बैठें हो तो व्यक्ति के अंदर काम की भावना प्रबल होती है। ऐसे में व्यक्ति सामाजिक एवं आर्थिक दृष्टि से अपने से कमजोर से संबंध बना सकता है। पत्रिका में शनि उच्च राशि में या स्वराशि में विद्धमान हो तो परिणाम अच्छा मिलता है। परंतु यदि सप्तम भाव में शनि अपने शत्रु ग्रह सूर्य के साथ मौजूद है तो यह वैवाहिक जीवन में तनाव का कारण बन सकता है। साथ ही जिनका विवाह नहीं हुआ है उनके विवाह में देरी करवा सकता है। सप्तम भाव को ही परिवार का भाव माना जाता है। तो वहीं आठवें भाव में बैठा शनि शुभ होने पर व्यक्ति को ससुराल से धन और समर्थन दिलाने का कारक बनता है। दांपत्य जीवन में शांति व प्रेम बनाए रखता है। विशेषकर शनि नीच का होकर मंगल के साथ सप्तम में विराजमान हो और इस पर बृहस्पति की दृष्टि पड़ रही हो तो ऐसे में व्यक्ति का विवाह कम उम्र में व जल्दबाजी में होता है। ज्योतिषियों की माने तो आमतौर पर सप्तम में शनि का विराजमान होना पति- पत्नी में से किसी एक को अहंकारी व चिड़चिड़ा बना देता है। जो वैवाहिक जीवन के लिए ठीक नहीं है। लेकिन इन सभी दोषों के बचने का उपाय भी ज्योतिष में सुझाया गया है। आप अपने इस दोष को ज्योतिषीय परामर्श से दूर कर सकते हैं। ऐसे में संकोच किए बिना एक बार ज्योतिषाचार्य से परामर्श जरूर करें। अपने वैवाहिक जीवन में पुनः सुख शांति लाएं। देश के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्यों से बात करने के लिए अभी क्लिक करें।

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