56 Bhog List for Janmashtami: पूरी सूची और छप्पन भोग की कथा

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56 Bhog List for Janmashtami: पूरी सूची और छप्पन भोग की कथा

56 Bhog List For Janmashtami: ​भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव जन्माष्टमी के रूप में पूरे देश में बड़ी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस शुभ अवसर पर लोग मंदिरों और घरों को सजाते हैं, श्रीकृष्ण का श्रृंगार करते हैं और विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं। पूजा के दौरान भगवान को उनकी प्रिय वस्तुएं अर्पित की जाती हैं, यह भक्तों के प्रेम और समर्पण के भाव को व्यक्त करता है।  

इस परंपरा में 56 भोग का भी विशेष स्थान है। जन्माष्टमी के अवसर पर कई भक्त अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार भगवान श्री कृष्ण को विभिन्न प्रकार के व्यंजन अर्पित करते हैं। अगर आप इस साल जन्माष्टमी पर 56 भोग लगाने की तैयारी कर रहे हैं और जानना चाहते हैं कि इसमें किन-किन व्यंजनों को शामिल किया जाता है तो यह लेख आपके लिए उपयोगी साबित होगा।       

जन्माष्टमी पर 56 भोग की लिस्ट (56 bhog list for janmashtami​)

जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण को अर्पित किए जाने वाले 56 भोग में अलग-अलग स्वाद और प्रकार के व्यंजन शामिल किए जाते हैं। परंपरागत रूप से इसमें छह रस (मीठा, नमकीन, खट्टा, कड़वा, कसैला और अम्लीय) का संतुलन रखने का प्रयास किया जाता है। इन्हीं विविध स्वादों के आधार पर भोग की थाली तैयार की जाती है।

56 भोग में शामिल व्यंजन क्षेत्र, परिवार की परंपरा और उपलब्ध सामग्री के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। इसलिए हर जगह एक जैसी सूची नहीं होती। हालांकि, जन्माष्टमी पर बनाए जाने वाले कुछ प्रमुख भोग इस प्रकार हैं:

  1. माखन-मिश्री

  2. रस मलाई

  3. कचौरी

  4. अनार

  5. बेसन के लड्डू

  6. मखाने की खीर

  7. पराठा

  8. गुलाब जामुन

  9. आम पना

  10. दही बड़े

  11. पेड़ा

  12. तरबूज

  13. काजू कतली

  14. खिचड़ी

  15. पिस्ता रोल

  16. जलेबी

  17. अमरूद

  18. रबड़ी

  19. दाल पूरी

  20. सूजी का हलवा

  21. नारियल बर्फी

  22. केला

  23. मोहनभोग

  24. नमक पारे

  25. कढ़ी

  26. रसगुल्ला

  27. आम

  28. दूध के लड्डू

  29. कचुम्बर सलाद

  30. मालपुआ

  31. नाशपाती

  32. पापड़ी

  33. मूंग दाल का हलवा

  34. पूरी

  35. बेल का शर्बत

  36. बूंदी के लड्डू

  37. श्रीखंड

  38. सेब

  39. पनीर की मिठाई

  40. घेवर

  41. चूरमा

  42. नींबू शर्बत

  43. मोतीचूर के लड्डू

  44. साबूदाना खिचड़ी

  45. अंगूर

  46. मठरी

  47. काजू बर्फी

  48. भुनी हुई मूंगफली

  49. खीर

  50. बालूशाही

  51. दूध की बर्फी

  52. आलू चाट

  53. सेवईं

  54. खरबूजा

  55. गुझिया

  56. बादाम का हलवा

जन्माष्टमी पर क्यों लगाया जाता है 56 भोग ? 

जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण को 56 भोग लगाने के पीछे एक बेहद प्रसिद्ध पौराणिक कथा जुड़ी हुई है। मान्यता है कि एक बार ब्रजवासी अच्छी वर्षा की कामना से देवराज इंद्र की पूजा की तैयारी कर रहे थे। तब बाल स्वरूप श्रीकृष्ण ने नंद बाबा से पूछा कि यह पूजा किसलिए की जा रही है। नंद बाबा ने बताया कि इंद्र देव वर्षा करते हैं, इसलिए उन्हें प्रसन्न करना आवश्यक है।

यह सुनकर श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों को समझाया कि उनका जीवन गोवर्धन पर्वत, गौधन और प्रकृति पर अधिक निर्भर है। गोवर्धन पर्वत से ही पशुओं के लिए चारा, लोगों के लिए फल, सब्जियां और अन्य आवश्यक संसाधन प्राप्त होते हैं। इसलिए इंद्र की जगह गोवर्धन पर्वत की पूजा करनी चाहिए। श्रीकृष्ण की बात मानकर सभी ब्रजवासियों ने गोवर्धन पूजा की।

इससे देवराज इंद्र क्रोधित हो गए और उन्होंने ब्रज में मूसलाधार वर्षा शुरू कर दी। चारों ओर जलभराव होने लगा और लोगों के साथ-साथ गौधन भी संकट में आ गया। तब भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी कनिष्ठा (छोटी) उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठा लिया, ताकि सभी ब्रजवासी और उनके पशु सुरक्षित रह सकें। सात दिनों तक सभी लोग गोवर्धन पर्वत की शरण में रहे और श्रीकृष्ण लगातार पर्वत धारण किए रहे। अंत में इंद्र देव को अपनी भूल का एहसास हुआ। उन्होंने श्रीकृष्ण से क्षमा मांगी और वर्षा रोक दी।

इन सात दिनों के दौरान श्रीकृष्ण ने कुछ भी ग्रहण नहीं किया। जब आठवें दिन सब कुछ सामान्य हुआ, तब माता यशोदा ने अपने लाड़ले कान्हा के लिए विशेष भोजन तैयार कराया। कहा जाता है कि वह श्रीकृष्ण को दिन में आठ बार भोजन कराती थीं। सात दिनों तक भोजन न करने के कारण उन्होंने 7 दिन × 8 बार = 56 प्रकार के व्यंजन भगवान को अर्पित किए। तभी से श्रीकृष्ण को छप्पन भोग लगाने की परंपरा प्रचलित मानी जाती है और आज भी जन्माष्टमी सहित कई विशेष अवसरों पर भक्त श्रद्धापूर्वक 56 भोग अर्पित करते हैं।

56 भोग न हों तो किस चीज का भोग लगाएं ?

जन्माष्टमी पर 56 तरह के व्यंजन तैयार करना हर किसी के लिए संभव नहीं होता। समय की कमी, घर में उपलब्ध सामग्री या अन्य परिस्थितियों के कारण अगर आप पूरा छप्पन भोग नहीं बना पा रहे हैं, तो इसे लेकर चिंता करने की जरूरत नहीं है। भगवान श्रीकृष्ण की पूजा में भोग की संख्या से ज्यादा भक्त की श्रद्धा और भाव को महत्व दिया जाता है।

आप अपनी सुविधा और सामर्थ्य के अनुसार कुछ सात्विक और घर पर आसानी से तैयार होने वाले व्यंजन भगवान को अर्पित कर सकते हैं। माखन-मिश्री, मौसमी फल, पंचामृत, खीर, दूध या घर में बनी कोई मिठाई भी भोग में शामिल की जा सकती है। आप चाहें तो अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार कोई प्रिय व्यंजन भी कान्हा को अर्पित कर सकते हैं।

इसलिए 56 व्यंजन न बन पाने की वजह से जन्माष्टमी की पूजा को अधूरा न समझें। कान्हा के लिए भोग में सबसे जरूरी प्रेम, श्रद्धा और समर्पण का भाव है। अपनी क्षमता के अनुसार प्रेमपूर्वक अर्पित किया गया प्रसाद भी भक्त के लिए उतना ही महत्वपूर्ण है।

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