आईना घर में कहाँ लगाएं? वास्तु से जानें घर सजावट के सही और गलत नियम।

Tue, Feb 10, 2026
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आईना घर में कहाँ लगाएं? वास्तु से जानें घर सजावट के सही और गलत नियम।

जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और संतुलन बनाए रखने के लिए वास्तु शास्त्र को एक बहुत प्रभावी पद्धति माना जाता है। वास्तु में ईमारत की संरचना से लेकर घर में मौजूद सामान तक की दिशा के नियम बताए गए हैं। इसी कड़ी में मिरर यानी आईने की वास्तु को भी बहुत महत्वपूर्ण बताया गया है। वास्तु के अनुसार, आईना केवल एक सजावट की चीज़ नहीं है, बल्कि सही दिशा और तरीके से लगाए गए आईने आपके घर और दफ़्तर की ऊर्जा को संतुलित कर सकते हैं। 

ऐसी मान्यता है कि सही स्थान पर रखा गया दर्पण सकारात्मकता को आकर्षित करता है और नकारात्मक प्रभावों को दूर कर देता है। यह किसी भी स्थान की ऊर्जा को भी कई गुना कर देता है। अगर आप इसे सही दिशा में रखें तो घर में बरकत होती है। वहीं अगर आईने की दिशा गलत हुई तो इसका विपरीत प्रभाव भी हो सकता है। यही कारण है कि वास्तु शास्त्र में आईने को लगाने से जुड़े कई नियम बताए गए हैं। इस ब्लॉग में आप समझ पाएंगे कि घर में आईने कहां लगाएं और इसके क्या-क्या प्रभाव हो सकते हैं।

घर में आईना लगाने के लिए शुभ और अशुभ दिशाएं

वास्तु शास्त्र में हर दिशा का अपना एक तत्व और प्रभाव माना गया है। इसी आधार पर दर्पण की सही दिशा चुनना बेहद ज़रूरी है। सही जगह पर रखा गया आईना जीवन में खुशहाली, स्वास्थ्य और समृद्धि लाता है, जबकि गलत दिशा का चुनाव विपरीत असर भी डाल सकता है।

  • उत्तर दिशा को दर्पण लगाने के लिए सबसे शुभ माना गया है। यह दिशा जल तत्व से जुड़ी हुई है और यहाँ रखा गया दर्पण धन, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है। इस दिशा में आयताकार, गोल या लहरदार डिज़ाइन के आईने खास लाभकारी माने जाते हैं।
  • पूर्व दिशा भी दर्पण के लिए बहुत अच्छी मानी जाती है। यह वायु तत्व से संबंधित है और यहाँ आईना लगाने से स्वास्थ्य में सुधार, घर में खुशियाँ और धूप-रोशनी का संचार होता है। इस स्थान के लिए आयताकार और वेव-शेप आईना अच्छा हैं।
  • उत्तर-पूर्व दिशा भी शुभ मानी जाती है। यह जगह मानसिक शांति और आध्यात्मिक प्रगति को बढ़ावा देती है। यहाँ दर्पण लगाने से घर का वातावरण शांत और सकारात्मक बना रहता है। इस दिशा के लिए गोल, आयताकार और लहरदार दर्पण अच्छे रहते हैं।
  • पश्चिम दिशा में दर्पण लगाना भी ठीक माना गया है। यह दिशा आकाश तत्व का प्रतीक है और यहाँ आईना लगाने से घर की जगह बड़ी और खुली दिखाई देती है। इस स्थान पर चौकोर और गोल आकार के दर्पण अच्छे रहते हैं।

अशुभ दिशाएं- 

  • वैसे तो उत्तर-पश्चिम दिशा में दर्पण रखना सामान्य है, लेकिन यहाँ सावधानी की ज़रूरत है। अगर इस दिशा में दर्पण गलत तरीके से रखा जाए, तो परिवार में विवाद और बहस का माहौल बन सकता है। इस स्थान पर गोल, आयताकार या लहरदार दर्पण लगाने से बचना चाहिए।
  • दक्षिण और दक्षिण-पूर्व दिशा में दर्पण रखना शुभ नहीं माना जाता। ये दिशाएँ अग्नि तत्व से जुड़ी हैं और यहाँ आईना लगाने से कानूनी विवाद, झगड़े या आर्थिक हानि जैसी समस्याएँ पैदा हो सकती हैं। अगर बहुत ज़रूरी हो, तो केवल भूरे फ्रेम वाला आयताकार दर्पण ही इस्तेमाल करें।
  • दक्षिण-पश्चिम दिशा में तो दर्पण बिल्कुल भी नहीं लगाना चाहिए। यह दिशा पृथ्वी तत्व से जुड़ी है और यहाँ रखा गया आईना सकारात्मक ऊर्जा को सोख लेता है। इससे जीवन में कठिनाइयाँ और परेशानियाँ बढ़ सकती हैं। अगर मजबूरी हो तो केवल पीले बॉर्डर वाला चौकोर दर्पण ही लगाया जा सकता है।

घर में कहां लगाएं आईना ?

घर या ऑफिस में हर जगह दर्पण का प्रभाव अलग-अलग तरह से देखा जाता है। इसलिए यह ज़रूरी है कि कमरे के हिसाब से दर्पण की दिशा और स्थिति का ध्यान रखा जाए।

बेडरूम में दर्पण
बेडरूम में आईना लगाने को लेकर वास्तु शास्त्र में खास सावधानियाँ बताई गई हैं। खासतौर पर यह ध्यान रखना चाहिए कि आईना बिस्तर की सीधी परछाईं न दिखाए, वरना इससे बेचैनी, अनिद्रा और रिश्तों में खटास आ सकती है। अगर कमरे में आईना ज़रूरी हो तो उसे उत्तर या पूर्व दीवार पर लगाया जा सकता है। रात में इसे ढक कर रखना बेहतर माना जाता है। शांति और संतुलन बनाए रखने के लिए लकड़ी के फ्रेम वाले या हल्के रंग के दर्पण अच्छे विकल्प माने जाते हैं।

लिविंग रूम में दर्पण
लिविंग रूम में दर्पण का सही इस्तेमाल घर के माहौल को उज्ज्वल बना देता है। यहाँ आईना इस तरह लगाना चाहिए कि वह किसी सुंदर दृश्य, या पौधों को परावर्तित करे। अगर दर्पण उत्तर या पूर्व दीवार पर लगाया जाए और वह समृद्धि के प्रतीक जैसे डाइनिंग टेबल या फलों के कटोरे की झलक दिखाए, तो घर में बरकत और खुशहाली बढ़ती है।

डाइनिंग एरिया में दर्पण
खाने की मेज़ के सामने दर्पण लगाने का विशेष महत्व है। इसे समृद्धि का प्रतीक माना जाता है क्योंकि दर्पण में दिखाई देने वाला भोजन और परिवार का साथ मिलकर सम्पन्नता और खुशी को कई गुना बढ़ा देता है।

मुख्य प्रवेश द्वार पर दर्पण
घर के मेन गेट के सामने सीधे आईना लगाना अशुभ माना जाता है। ऐसा करने से घर में आने वाली सकारात्मक ऊर्जा और अवसर वापस लौट जाते हैं। यदि दरवाज़े के पास आईना लगाना ही हो, तो उसे इस तरह रखें कि वह बाहर की सुंदरता, पौधों या बगीचे का दृश्य दिखाए, न कि मुख्य द्वार को।

शीशा लगाते समय कभी न करें ये गलतियां  

वास्तु शास्त्र में दर्पण का इस्तेमाल जितना शुभ माना गया है, उतना ही इसकी गलत जगह पर मौजूदगी नुकसान भी पहुँचा सकती है। कई बार लोग बिना सोचे-समझे आईना लगा देते हैं और फिर उसके नकारात्मक असर का सामना करते हैं। इसलिए कुछ सामान्य गलतियों से बचना ज़रूरी है।

सबसे पहली गलती है बिस्तर के ठीक सामने आईना लगाना। कहा जाता है कि ऐसा करने से नींद बार-बार बाधित होती है और दिमाग पर तनाव हावी होने लगता है। इससे न केवल थकान बढ़ती है बल्कि मानसिक शांति भी प्रभावित होती है।

दूसरी गलती है दो आईनों को आमने-सामने लगाना। यह स्थिति घर में ऊर्जा के असंतुलन का कारण बनती है क्योंकि आईने लगातार एक-दूसरे की ऊर्जा को परावर्तित करते रहते हैं। इसका परिणाम तनाव और अस्थिरता के रूप में दिखाई दे सकता है।

तीसरी गलती है मुख्य दरवाज़े के ठीक सामने दर्पण लगाना। ऐसा करने से घर में प्रवेश करने वाली शुभ ऊर्जा और अवसर वापस बाहर चले जाते हैं। इसलिए हमेशा ध्यान रखें कि मुख्य प्रवेश द्वार के सामने आईना न हो।

अंत में, टूटा, धुंधला या दाग़-धब्बेदार दर्पण भी अशुभ माना जाता है। ऐसे आईने घर में नकारात्मकता को आमंत्रित करते हैं और सकारात्मक ऊर्जा को रोकते हैं। इसलिए हमेशा साफ़, चमकदार और बिना किसी खामी वाला दर्पण ही इस्तेमाल करना चाहिए।

वास्तु में आईने का महत्व 

आईना केवल चेहरा देखने या घर सजाने का साधन नहीं है, बल्कि वास्तु शास्त्र में इसे ऊर्जा का वाहक माना गया है। यह जिस दिशा में होता है, वहां की ऊर्जा को परावर्तित और कई गुना बढ़ा देता है। इसीलिए इसे सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए, तो यह घर में सकारात्मकता और समृद्धि को आकर्षित करने का एक शक्तिशाली माध्यम बन सकता है।

वास्तु विशेषज्ञों का मानना है कि उचित दिशा में रखा गया दर्पण घर को खुला और रोशन महसूस कराता है। यह न केवल प्राकृतिक रोशनी को बढ़ाता है, बल्कि जगह को बड़ा दिखाने में भी मदद करता है। इतना ही नहीं, सही स्थान पर दर्पण लगाने से घर के भीतर समृद्धि का प्रतीक भी उभर कर सामने आता है और खुशहाली बनी रहती है।

लेकिन, अगर दर्पण गलत जगह या दिशा में लगाया जाए, तो इसके नकारात्मक परिणाम भी झेलने पड़ सकते हैं। अनुचित स्थान पर रखे गए आईने नींद को प्रभावित कर सकते हैं, रिश्तों में दूरी ला सकते हैं और आर्थिक स्थिरता पर भी बुरा असर डाल सकते हैं। यही कारण है कि वास्तु शास्त्र में दर्पण की सही स्थिति और दिशा को बहुत महत्व दिया गया है।

कुल मिलकर, वास्तु आपको यह सिखाता है कि छोटी-सी चीज़ भी यदि सोच-समझकर और नियमों के अनुसार इस्तेमाल की जाए, तो वह आपके घर और जीवन में बड़ा बदलाव ला सकती है। इसलिए अगली बार जब आप अपने घर या ऑफिस में दर्पण लगाएँ, तो वास्तु के इन सरल लेकिन असरदार सिद्धांतों को ज़रूर ध्यान में रखें।

अगर आपको लगता है कि घर का वास्तु ठीक नहीं है और इसकी वजह से जीवन में बार-बार परेशानियाँ आ रही हैं, तो देर न करें। अभी एस्ट्रोयोगी के अनुभवी ज्योतिष और वास्तु विशेषज्ञों से परामर्श लें। 

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