अमावस्या पर क्या करें और क्या नहीं? जानें पितरों की कृपा पाने के आसान नियम

Tue, May 26, 2026
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अमावस्या पर क्या करें और क्या नहीं? जानें पितरों की कृपा पाने के आसान नियम

हिंदू धर्म में अमावस्या को केवल एक सामान्य तिथि के रूप में नहीं देखा जाता। यह आध्यात्मिक रूप से बेहद पवित्र और महत्वपूर्ण अवसर होता है। अमावस्या का दिन पितरों की पूजा, नकारात्मक ऊर्जा दूर करने और पुण्य प्राप्त करने के लिए खास होता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन किए गए कर्म, पूजा-पाठ, और दान का विशेष फल मिलता है, जिससे घर में सुख-शांति का वास होता है।    

परंतु अगर सही मायनों में आप अमावस्या का शुभ फल प्राप्त करना चाहते हैं, तो इस तिथि पर कुछ खास नियमों का पालन करना जरूरी है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अमावस्या के दिन कुछ ऐसे कार्यों के बारे में बताया गया है जिन्हें करना शुभ होता है और कुछ ऐसे कामों के बारे में भी बताया गया जिनसे बचना जरूरी होता है। 

तो चलिए जानते हैं कि अमावस्या पर क्या करना शुभ रहेगा हुए किन बातों से बचाव करना होगा। 

क्या होती है अमावस्या ?

अमावस्या हिंदू पंचांग की वह तिथि होती है जब चंद्रमा आकाश में दिखाई नहीं देता। यह हर महीने एक बार आती है और धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अमावस्या का संबंध पितरों, आत्मचिंतन और पूजा-पाठ से जुड़ा होता है। इस दिन पितरों का तर्पण, दान-पुण्य और भगवान की आराधना करना शुभ माना जाता है।

कई विशेष अमावस्याएं जैसे Diwali, सोमवती अमावस्या और महालय अमावस्या का अलग धार्मिक महत्व भी बताया गया है।

अमावस्या पर क्या करें ? (Amavasya Ko Kya Karna Chahiye)​

पितरों का तर्पण 

अमावस्या का दिन पितरों को समर्पित माना जाता है। इस दिन श्रद्धा के साथ पितरों का तर्पण करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि जल, तिल और भोजन अर्पित करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। अगर तर्पण की पूरी विधि न जानते हों, तो श्रद्धा से अपने पूर्वजों को याद करके जल अर्पित करना भी लाभकारी माना जाता है।

पवित्र नदी में स्नान 

अमावस्या के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करना शुभ माना जाता है। अगर संभव हो तो किसी पवित्र नदी में स्नान करें, लेकिन घर पर स्नान करके भी मन और शरीर की शुद्धि का संकल्प लिया जा सकता है। माना जाता है कि इससे नकारात्मकता दूर होती है और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।

पीपल के पेड़ की पूजा 

इस दिन पीपल के पेड़ की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। पीपल को जल अर्पित करना, दीपक जलाना और उसकी परिक्रमा करना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार ऐसा करने से पितृ दोष और जीवन की बाधाएं कम हो सकती हैं।

दान-पुण्य 

अमावस्या के दिन जरूरतमंद लोगों को भोजन, कपड़े, तिल, काले चने या अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान करना पुण्यदायी माना जाता है। कहा जाता है कि इस दिन श्रद्धा से किया गया दान कई गुना फल देता है।

व्रत और मंत्र जाप

कई लोग अमावस्या पर व्रत रखते हैं और भगवान के मंत्रों का जाप करते हैं। इससे मन शांत रहता है और आध्यात्मिक ऊर्जा बढ़ती है। आप अपनी श्रद्धा अनुसार भगवान विष्णु, शिव या पितरों की शांति के लिए मंत्र जाप कर सकते हैं।

दीपक जलाना 

अमावस्या की शाम घर के मंदिर, मुख्य द्वार या पीपल के पास दीपक जलाना शुभ माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इससे घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सुख-शांति का वातावरण बना रहता है।

अमावस्या पर किन कामों से बचें (Amavasya Ko Kya Nahi Karna Chahiye​)

मांसाहार से बचें 

अमावस्या को धार्मिक और सात्विक दिन माना जाता है। इसलिए इस दिन मांस, मदिरा या तामसिक भोजन से दूरी बनाने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि सात्विक भोजन करने से मन शांत रहता है और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।

शुभ कार्य न करें 

अमावस्या के दिन विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन या किसी बड़े शुभ कार्य की शुरुआत आमतौर पर नहीं की जाती। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह दिन पूजा-पाठ, आत्मचिंतन और पितरों के स्मरण के लिए अधिक उपयुक्त माना जाता है।

नया काम न करें 

कई लोग अमावस्या के दिन नया व्यापार, नया निवेश या किसी बड़े फैसले की शुरुआत करने से बचते हैं। इस दिन शुरू किए गए कामों में रुकावटें आ सकती हैं। हालांकि, यह पूरी तरह व्यक्ति की मान्यता और परिस्थिति पर भी निर्भर करता है।

बाल या नाखून काटने से बचें 

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अमावस्या के दिन बाल कटवाना या नाखून काटना शुभ नहीं माना जाता। कई घरों में इस परंपरा का पालन आज भी किया जाता है।

क्रोध न करें 

अमावस्या के दिन मन को शांत रखने की सलाह दी जाती है। बेवजह गुस्सा करना, विवाद करना या किसी से कटु बातें बोलने से बचना चाहिए, क्योंकि माना जाता है कि इससे घर की सकारात्मकता प्रभावित हो सकती है।

सुनसान स्थानों पर न जाएं 

लोक मान्यताओं के अनुसार अमावस्या की रात को सुनसान या नकारात्मक वातावरण वाली जगहों पर अकेले जाने से बचना चाहिए। इस दिन घर में रहकर पूजा-पाठ और सकारात्मक कार्यों में समय बिताना बेहतर माना जाता है।

अमावस्या केवल एक तिथि नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, पितरों के स्मरण और सकारात्मक ऊर्जा को अपनाने का अवसर भी मानी जाती है। इस दिन श्रद्धा और नियमों के साथ किए गए छोटे-छोटे कार्य, जैसे दान-पुण्य, दीपक जलान, जप या पितृ तर्पण, मानसिक शांति और आध्यात्मिक संतुलन देने में मदद कर सकते हैं। वहीं, कुछ बातों का ध्यान रखकर और अनावश्यक विवाद या नकारात्मक चीजों से दूरी बनाकर इस दिन को अधिक शुभ बनाया जा सकता है।

हालांकि, अलग-अलग जगहों और परिवारों में अमावस्या से जुड़ी मान्यताएं थोड़ी अलग हो सकती हैं। ऐसे में अपनी श्रद्धा और परंपराओं का सम्मान करते हुए इस दिन को सकारात्मक सोच और अच्छे कर्मों के साथ बिताना सबसे अच्छा माना जाता है।

अगर आपके मन में पितृ दोष, जीवन में बार-बार आ रही रुकावटों या पूजा-विधि को लेकर कोई सवाल है, तो एस्ट्रोयोगी के अनुभवी ज्योतिषियों से बात कर आप सही मार्गदर्शन पा सकते हैं। 

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