कुंडली में ऐसे कई योग बनते हैं जो हमारे जीवन को सवार देते हैं तो कुछ जीवन को बिगाड़ने का कार्य करते हैं आज हम एक ऐसे योग की बात करने जा रहे हैं। जिसका बनना ज्योतिष में बहुत ही शुभ माना गया है। वो योग है बुध आदित्य योग। जिसके बनने से हमारे जीवन में कई तरह के बदलाव आते हैं। बुधादित्य योग हमारे करियर के लेकर वित्तीय पहलू तक सभी पर अपना असर डालता है। तो आइये जानते हैं। बुधादित्य योग के बारे में कि यह कुंडली में कैसे बनता है। इसका ज्योतिष में क्या महत्व है।
ज्योतिषाचार्यों कहना है कि यह योग लगभग लोगों की कुंडली में पाया जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि सौर मंडल में सूर्य से बुध काफी करीब है। इसका असर कुंडली के भाव के अनुसार बदल जाकता है। कहते हैं कि यह योग जिस भाव में होता है उसे प्रबल करने का काम करता है। साथ ही घर के शक्तिनुसार लाभ देता है। सामान्य तौर पर बुधादित्य योग को धन, वैभव, मान सम्मान, कीर्ति प्रसिद्धि से जोड़कर देखा जाता है। ज्योतिषाचार्यों की माने तो यह योग बहुत ही फलदायी है।
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बुधादित्य योग बुध व सूर्य के युति से बनता है। किसी भी भाव में दोनों ग्रहों का एक साथ बैठना इस योग का निर्माण करता है। ज्योतिषीयों का कहना है कि यदि दोनों ग्रह प्रभावी हो तो यह बहुत ही फलदायी योग बन जाता है। तो आइये जानते हैं भाव के अनुसार इस योग का फल –
किसी की कुंडली के लग्न में यदि बुधादित्य योग बना हो तो ऐसे में जातक का स्वभाव उदार, सहनशील तेज दिमाग, विवेकवान, चपल, साहसी व स्वाभिमानी होता है। परंतु जातकों को बचपन में सेहत को लेकर परेशानियों का सामना करना पड़ता है। खास कर आंख, नाक, व पेट से जुड़ी समस्याओं का। जातक जीवन में सफलता हासिल करता है।
जातक की कुंडली में द्वितीय भाव में बुध व सूर्य की युति होने पर वह शांत व संवेदनशील होता है। व्यवहार में कुशल होता है लेकिन अधिक लोगों से मेल जोल नहीं रखता है। इसके साथ ही दूसरों के धन से व्यापार कर सफल होता है। कर्ज बहुत लेता है और उसे चुकाता भी है।
तृतीय भाव में बुधादित्य योग बनने से जातक परिश्रमी व स्वाभिमानी होता है। भाग्योदय के कई मौके पाने के बाद भी ये इन मौकों को गवा देते हैं। फिर भी ये अपने परिश्रम के बल पर सफलता हासिल करते हैं। जातकों को अपने भाई – बहन से सहयोग नहीं मिलता है। पराक्रम भाव में यह योग होने से जातकों को कार्य व व्यवसाय के अवसर प्रदान करता है।
यदि किसी जातक की कुंडली में चतुर्थ भाव में बुधादित्य योग का बनना काफी शुभ माना जाता है। यदि ऐसा होता है तो जातक हर क्षेत्र में सफलता हासिल करता है। जातक किसी संस्थान के प्रधान, इंजिनीयर, कुशल प्रबंधक, कुलपति, सफल राजनेता बनता है। इसके साथ ही योग माता के सेहत में परेशानी लाता है परंतु साथी के भाग्य का सहयोग भी प्राप्त करवाता है।
किसी जातक की कुंडली में यदि पंचम भाव में बुधादित्य योग बनता है तो ऐसे में जातक का अपने बहन तथा भाभी के साथ वैचारिक मतभेद होता है। संतान भी जातक की कम होती है। परंतु बच्चे गुणवान व सफल होते हैं। जातकों का नाम रौशन करते हैं। इसके साथ ही जातकों को उदर संबंधी विकारों का सामना करना पड़ता है।
छठे भाव में सूर्य व बुध की युति पर ज्योतिषियों का कहना है कि इस भाव में बुधादित्य योग के होने से जातक अपने विरोधियों की गतिविधि से थोड़ा चिंतित तो होता है लेकिन व आत्मविश्वास से भरा रहता है। उसके अंदर हर समस्या से निपटने का दम होता है। इसके साथ ही माता के पक्ष से इन्हें लाभ मिलता है।
बुधादित्य योग का सप्तम भाव में बनना जातको का कई क्षेत्र में सफलता हासिल करता है। जातक डॉक्टरी व रत्न व्यवसाय में अच्छी सफलता पाता है। इसके साथ ही राजनेता का सहायक बनकर उन्हें मार्गदर्शित करते हैं। ये एक अच्छे सहालकार होते हैं। समाजसेवा करने में अधिक रूचि रखते हैं।
अष्टम भाव में यदि बुधादित्य योग विद्धमान हो तो जातक हमेशा दूसरों का सहयोग करने के लिए तैयार रहते हैं। इसी दरियादिली के कारण ये दूसरों का सहयोग करने के चक्कर में खुद को परेशानी में डाल देते हैं। इसके साथ ही दुर्घटना घटने का भी खतरा बना रहता है। जातक विदेशी मुद्रा में व्यापार कर सफल होते हैं।
किसी जातक के नवम भाव में इस योग के बनने पर जातक अहंकारी हो जाता है। इसके साथ ही वह निरंकुश भी हो जाते हैं। इसके साथ ही जातक कई अवसरों को गवा देता है। परंतु मेहनत कर सफलता तक पहुंचता है। सफलता मिलने में देरी होती है। लेकिन मिलती है।
दशम भाव में बुधादित्य योग होने पर जातक बुद्धिमान होता है। समय पर विवेक का उपयोग कर बड़ी से बड़ी समस्या हल कर देते हैं। जातक धन कमाने में भी पीछे नहीं रहते हैं। ये चतुर, साहसी एवं संगीत प्रेमी होते हैं। इसके साथ ही ये जातक धार्मिक स्थानों का निर्माण करवाने मंशा भी रखते हैं। क्योंकि धर्म के प्रति इनका अधिक झुकाव होता है।
एकादश भाव एकादश में बुधादित्य योग का होना जातकों को यशस्वी, ज्ञानी, संगीत विद्या में पारंगत बनने में सहायता करता है। जातक का रुझान कला के प्रति अधिक होता है। इसके साथ ही जातक रूपवान एवं धनधान्य से संपन्न होता है। सरकार एवं प्रतिष्ठानों से धन की प्राप्ति होती है।
ज्योतिष में बारहवे भाव को व्यय भाव भी कहा जाता है। ऐसे में इस भाव में बुधादित्य योग का बनना जातक के धन के लिए अच्छा नहीं कहा जा सकता है। धन का अधिक व्यय होता है। धन आता है लेकिन खर्च अधिक होता है। इसके साथ ही जातक जुआ सट्टे में फंस कर धन हानि का सामना करता है। पारिवारिक विवाद भी पैदा करता है।
यह ज्योतिषीय जानकारी सामान्य है। आपके कुंडली के अनुसार इसमें बदलाव हो सकता है। इसलिए सटीक जानकारी के लिए आप अपनी कुंडली का आकलन करवा कर बुधादित्य योग आपके कुंडली के किस भाव में बना है। इसके बारे में जान सकते हैं। कुंडली के अनुसार जानकारी प्राप्त करने के लिए अभी बात करें देश के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्यों से।