धनतेरस पर दीये कहां और कैसे जलाएं? जानें सही दिशा और नियम

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धनतेरस पर दीये कहां और कैसे जलाएं? जानें सही दिशा और नियम

Dhanteras Par Diya Kaise Jalaye: धनतेरस के दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी, भगवान कुबेर और यमराज की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, धनतेरस पर दीपदान करने से परिवार की सुख-समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और लंबी आयु की कामना की जाती है। धनतेरस के दिन कई घरों में 13 दीपक जलाने की परंपरा है।

धनतेरस पर दीया कैसे जलाएं?

धनतेरस पर दीया जलाने के लिए सबसे पहले घर और पूजा स्थान की सफाई करें। शाम को पूजा की तैयारी करने के बाद मिट्टी के दीपक में घी या तेल डालें और रुई की बत्ती लगाएं। दीपक जलाने के बाद भगवान का ध्यान करें और परिवार की सुख-शांति के लिए प्रार्थना करें।

धनतेरस पर दीया जलाने की सरल विधि इस प्रकार है:

  1. घर की सफाई करें: शाम की पूजा से पहले घर और मुख्य द्वार को साफ करें।
  2. मिट्टी का दीपक लें: दीपक साफ और अच्छी स्थिति में होना चाहिए।
  3. घी या तेल डालें: अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार दीपक में घी या तेल भरें।
  4. बत्ती लगाएं: रुई की बत्ती को दीपक में ठीक से रखें, ताकि वह स्थिर रहे।
  5. दीपक जलाएं: पूजा के समय दीपक जलाकर मां लक्ष्मी, भगवान कुबेर और भगवान धन्वंतरि का स्मरण करें।
  6. मंत्र पढ़ें: अपनी श्रद्धा के अनुसार दीपक का मंत्र या देवी-देवताओं के मंत्र का जाप करें।
  7. सुरक्षित जगह रखें: दीपक को समतल स्थान पर रखें और ज्वलनशील वस्तुओं से दूर रखें।

धनतेरस पर पूजा के बाद घर के अलग-अलग स्थानों पर दीपक जलाए जा सकते हैं। दीपकों की संख्या और उन्हें रखने की विधि परिवार की परंपरा के अनुसार अलग हो सकती है।

धनतेरस पर दीया किस दिशा में जलाना चाहिए?

धनतेरस पर दीपक की दिशा इस बात पर निर्भर करती है कि दीपक किस उद्देश्य से जलाया जा रहा है। सामान्य पूजा के दीपक और यम दीपदान की परंपरा में अंतर होता है।

  • पूजा घर में: मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा के लिए दीपक पूजा स्थान पर रखें। पूजा करते समय पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठना कई परंपराओं में शुभ माना जाता है।
  • मुख्य द्वार पर: घर के प्रवेश द्वार के पास सुरक्षित स्थान पर दीपक जलाएं। ध्यान रखें कि आने-जाने का रास्ता बाधित न हो।
  • यम दीपदान के लिए: प्रचलित परंपरा के अनुसार, यमराज के नाम का दीपक दक्षिण दिशा की ओर जलाया जाता है।

धनतेरस पर दीया घी का जलाएं या तेल का?

धनतेरस पर दीपक जलाने के लिए घी और तेल, दोनों का इस्तेमाल किया जाता है। पूजा घर में घी का दीपक जलाने की परंपरा कई परिवारों में है, जबकि तेल का दीपक भी धार्मिक कार्यों में प्रचलित है।

आप अपनी सुविधा और पारिवारिक परंपरा के अनुसार इनमें से किसी का इस्तेमाल कर सकते हैं। दीपक में इतना ही घी या तेल डालें कि वह सुरक्षित तरीके से जल सके। दीपक को ऐसी जगह न रखें, जहां हवा के तेज झोंके से वह गिर जाए या आग लगने का खतरा हो।

धनतेरस पर किन 5 जगहों पर जलाएं दीया?

धनतेरस पर दीपक जलाने के लिए कुछ स्थानों को धार्मिक परंपराओं में विशेष महत्व दिया जाता है।

1. पूजा घर में जलाएं दीया

धनतेरस की पूजा के बाद घर के मंदिर में मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर के नाम का दीपक जलाएं। इस दौरान धन, सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करें।

मंत्र:

ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः॥

2. घर के मुख्य द्वार पर जलाएं दीया

धनतेरस की शाम घर के मुख्य द्वार के पास दीपक जलाने की परंपरा है। ऐसा करते समय प्रवेश द्वार साफ रखें और दीपक को किसी स्थिर स्थान पर रखें।

3. पानी रखने की जगह के पास जलाएं दीया

कुछ परिवारों में भगवान धन्वंतरि का स्मरण करते हुए पानी रखने की जगह के पास दीपक जलाया जाता है। दीपक को वाटर फिल्टर, बिजली के उपकरण या पानी के छींटों के पास न रखें।

मंत्र:

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥

4. घर के बाहर सुरक्षित स्थान पर करें दीपदान

धनतेरस पर घर के बाहर किसी साफ और सुरक्षित स्थान पर दीपक जलाया जा सकता है। सुनसान सड़क, सूखी घास या ऐसी जगह दीपक न रखें, जहां उससे आग लगने या किसी को चोट लगने का खतरा हो।

5. दक्षिण दिशा में जलाएं यम दीपक

धनतेरस पर यमराज के नाम से दीपदान करने की परंपरा भी है। इसके तहत शाम को दक्षिण दिशा की ओर दीपक जलाकर परिवार के सदस्यों की लंबी आयु और सुरक्षा की कामना की जाती है।

यम दीपदान मंत्र:

मृत्युना दण्डपाशाभ्यां कालेन श्यामया सह।
त्रयोदश्यां दीपदानात् सूर्यजः प्रीयतां मम॥

धनतेरस पर 13 दीये कैसे जलाएं?

धनतेरस पर 13 दीपक जलाने की परंपरा कई परिवारों में प्रचलित है। यदि आप भी 13 दीपक जलाना चाहते हैं, तो अपनी श्रद्धा और घर की परंपरा के अनुसार अलग-अलग स्थानों पर दीपक रख सकते हैं।

उदाहरण के लिए, पूजा घर, मुख्य द्वार, घर के अन्य सुरक्षित स्थानों और यम दीपदान के लिए दीपक रखे जा सकते हैं। ध्यान रखें कि 13 दीपक जलाना हर परिवार के लिए अनिवार्य नहीं है। आप अपनी सुविधा के अनुसार दीपदान कर सकते हैं।

FAQs: धनतेरस पर दीया कैसे जलाएं?

1. धनतेरस पर दीया जलाने का सही तरीका क्या है?

धनतेरस पर घर की सफाई करके शाम को पूजा करें। मिट्टी के दीपक में घी या तेल डालकर बत्ती लगाएं और दीपक जलाने के बाद मां लक्ष्मी तथा भगवान कुबेर का स्मरण करें।

2. धनतेरस पर दीया किस दिशा में जलाना चाहिए?

सामान्य पूजा का दीपक पूजा स्थान पर रखा जा सकता है। यम दीपदान की प्रचलित परंपरा में दीपक दक्षिण दिशा की ओर जलाया जाता है।

3. धनतेरस पर दीया कितने बजे जलाना चाहिए?

धनतेरस पर शाम को पूजा के समय दीपक जलाना प्रचलित है। पूजा का सटीक शुभ समय जानने के लिए अपने शहर के पंचांग के अनुसार मुहूर्त देखें।

4. धनतेरस पर दीया घी का जलाना चाहिए या तेल का?

धनतेरस पर घी और तेल, दोनों के दीपक जलाए जाते हैं। आप अपनी पारिवारिक परंपरा और सुविधा के अनुसार किसी एक का इस्तेमाल कर सकते हैं।

5. धनतेरस पर कितने दीये जलाने चाहिए?

धनतेरस पर 13 दीपक जलाने की परंपरा कई परिवारों में है। हालांकि, दीपकों की संख्या अलग-अलग क्षेत्रीय और पारिवारिक मान्यताओं के अनुसार बदल सकती है।

6. धनतेरस पर यमराज का दीया कैसे जलाएं?

प्रचलित परंपरा के अनुसार, शाम को मिट्टी के दीपक में तेल डालकर यमराज के नाम से दीपदान किया जाता है। दीपक को दक्षिण दिशा की ओर किसी सुरक्षित स्थान पर रखा जाता है।

7. क्या धनतेरस पर मुख्य द्वार पर दीया जलाना जरूरी है?

मुख्य द्वार पर दीपक जलाना एक प्रचलित धार्मिक परंपरा है, लेकिन इसे अनिवार्य नहीं माना जाना चाहिए। आप अपनी श्रद्धा और पारिवारिक रीति के अनुसार पूजा कर सकते हैं।

8. धनतेरस पर दीया जलाते समय कौन सा मंत्र बोलें?

दीपक जलाते समय आप 'ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः॥' मंत्र का जाप कर सकते हैं। यम दीपदान के लिए यमराज से जुड़ा पारंपरिक मंत्र भी पढ़ा जाता है।

9. क्या धनतेरस पर बिना मंत्र के दीया जला सकते हैं?

हां, आप बिना मंत्र के भी श्रद्धापूर्वक दीपक जला सकते हैं। मन से प्रार्थना करना और सुरक्षित तरीके से दीपदान करना महत्वपूर्ण है।

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