धनतेरस के अवसर पर बाज़ार से नई चीजें खरीदने और खास संख्या में दीये जलाने की परंपरा है। इसलिए अक्सर लोगों के मन में ये सवाल उठता है कि आखिर धनतेरस पर कितने दीपक जलाना शुभ माना जाता है? क्या एक दीया जलाना पर्याप्त है या कुछ खास संख्या में दीपक जलाने का विधान है? ऐसा माना जाता है कि धनतेरस की शाम सही स्थान और संख्या में दीपक जलाने से घर में सुख-समृद्धि का वातावरण बनता है और नकारात्मकता दूर होती है।
अगर आप भी इस धनतेरस अपने घर में दीपक जलाने की तैयारी कर रहे हैं, तो यह जानना जरूरी है कि धनतेरस पर कितने दीये जलाएं, इन्हें कहां रखें और किस दिशा में दीपक जलाना शुभ माना जाता है। आइए जानते हैं धनतेरस पर दीपक जलाने से जुड़ी इन खास मान्यताओं और जरूरी बातों के बारे में।
धनतेरस पर कितने दीये जलाने चाहिए?
धनतेरस पर कितने दीये जलाने चाहिए, इसे लेकर अलग-अलग जगहों पर अलग परंपराएं देखने को मिलती हैं।
1 दीपक: कुछ परंपराओं में धनतेरस की शाम यमराज के लिए एक चार मुख वाला दीपक जलाया जाता है। इसे यम दीपक कहा जाता है।
13 दीपक: यह सबसे प्रचलित मान्यता मानी जाती है। इनमें पहला दीपक यमराज को समर्पित किया जाता है और बाकी दीपक घर के अलग-अलग स्थानों पर जलाए जाते हैं।
14 दीपक: कुछ पूजा परंपराओं में 13 छोटे दीपकों के साथ एक बड़ा दीपक गाय के घी का जलाने की बात कही जाती है। इस तरह कुल 14 दीपक होते हैं।
धनतेरस पर यम दीपक कैसे जलाएं?
धनतेरस पर जलाए जाने वाले दीपकों में यम दीपक का विशेष महत्व माना जाता है। यह दीपक भगवान यमराज को समर्पित किया जाता है। इसे श्रद्धा के साथ जलाने से परिवार के सदस्यों की सुख-शांति और मंगल की कामना की जाती है।
यम दीपक जलाने की विधि:
सबसे पहले आटे से चार मुख वाला दीपक तैयार करें।
इसमें सरसों का तेल डालकर चारों मुख में बाती रखें।
प्रदोष काल यानी शाम के समय इस दीपक को घर के बाहर जलाएं।
परंपरा के अनुसार यम दीपक का मुख दक्षिण दिशा की ओर रखा जाता है।
दीपक जलाते समय परिवार के सभी सदस्यों के अच्छे स्वास्थ्य, सुख और लंबी आयु की प्रार्थना करें।
यम दीपक से जुड़ी प्रचलित कथा
यम दीपक से जुड़ी एक लोकप्रिय कथा राजा हेम और उनके पुत्र की है। कहा जाता है कि राजा के पुत्र की कुंडली में विवाह के कुछ ही दिनों बाद मृत्यु का योग बताया गया था। विवाह के बाद जब वह रात आई, तो उसकी पत्नी ने घर के द्वार पर कई दीपक जलाए और उन्हें रातभर कहानियां और गीत सुनाकर जगाए रखा। दीपकों की रोशनी और जागरण के कारण यमराज के दूत उस घर में प्रवेश नहीं कर सके। इसी कथा के आधार पर धनतेरस की रात यमराज के नाम दीपक जलाने की परंपरा बताई जाती है।
धनतेरस पर 13 दीपक कहां-कहां लगाएं?
धनतेरस पर 13 दीपक जलाने की परंपरा का उद्देश्य केवल घर को रोशन करना नहीं, बल्कि घर के अलग-अलग हिस्सों में शुभता और सकारात्मकता का संचार करना भी माना जाता है। यदि आप 13 दीपक जलाना चाहते हैं, तो उन्हें इस तरह अलग-अलग स्थानों पर रख सकते हैं:
मुख्य द्वार पर - घर के प्रवेश द्वार पर दो दीपक जलाएं। इसे घर में शुभ ऊर्जा के स्वागत से जोड़ा जाता है।
तुलसी के पौधे के पास - एक दीपक तुलसी के पास जलाएं। हिंदू परंपरा में तुलसी को पवित्र और मंगलकारी माना गया है।
रसोई में - एक दीपक रसोई में मां अन्नपूर्णा के नाम से जला सकते हैं। इससे घर में अन्न और समृद्धि बनी रहने की कामना की जाती है।
पूजा स्थल पर - लक्ष्मी-गणेश के सामने एक दीपक जलाना शुभ माना जाता है।
तिजोरी या धन रखने के स्थान पर - एक दीपक वहां रखें जहां घर में धन या जरूरी वित्तीय सामान रखा जाता है। मां लक्ष्मी से आर्थिक स्थिरता और समृद्धि की प्रार्थना करें।
आंगन या छत पर - एक दीपक खुले स्थान पर जलाकर घर-परिवार की सुख-शांति की कामना कर सकते हैं।
जल के स्थान के पास - घर में जहां पानी का स्रोत हो, उसके पास एक दीपक रख सकते हैं।
बाथरूम के पास - स्वच्छता और स्वास्थ्य से जुड़ी सकारात्मक भावना के लिए यहां भी एक दीपक रखने की परंपरा कुछ जगहों पर मिलती है।
यम दीपक के रूप में - घर के बाहर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके एक दीपक जलाएं। यह दीपक यमराज को समर्पित माना जाता है।
घर के पास किसी चौराहे पर - परंपरा हो तो एक दीपक चौराहे पर जला सकते हैं। ऐसा संभव न हो, तो पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाने की परंपरा भी कुछ स्थानों पर देखने को मिलती है।
बालकनी या खिड़की के पास - बाहर की ओर मुख करके एक दीपक जलाया जा सकता है।
पूरे घर के मंगल के लिए - घर के किसी खुले और साफ स्थान पर एक दीपक रखकर परिवार की सुख-समृद्धि और शांति की प्रार्थना करें।
कूड़ेदान या घर के कचरे वाले स्थान से दूर - घर के सभी सदस्य वापस आ जाने के बाद, कचरे के स्थान से थोड़ी दूरी पर एक दीपक जलाने की परंपरा भी कुछ जगहों पर बताई जाती है।
धनतेरस पर दीपक लगाते समय ध्यान रखें ये बातें
धनतेरस पर दीपक जलाना शुभ माना जाता है, लेकिन पूजा की सही तैयारी के साथ दीयों की सुरक्षा का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है। दीपक जलाते समय इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखें:
धनतेरस पर आमतौर पर मिट्टी के दीयों का इस्तेमाल किया जाता है। दीया जलाने से पहले उसे साफ करके अच्छी तरह सुखा लें।
पूजा के दौरान घी का दीपक और घर के बाहर या अन्य स्थानों पर सरसों के तेल का दीपक जलाने की परंपरा कई परिवारों में प्रचलित है। हालांकि, अपने परिवार की परंपरा के अनुसार तेल या घी का इस्तेमाल कर सकते हैं।
दीपक प्रदोष काल यानी सूर्यास्त के बाद जलाए जाते हैं। पूजा और यम दीपक के लिए अपने शहर के अनुसार सही प्रदोष काल पंचांग से देखना बेहतर है।
दीपक को ऐसी जगह रखें जहां तेज हवा न हो, ताकि वह बार-बार बुझे नहीं।
दीये रखने वाली जगह साफ-सुथरी और सुरक्षित होनी चाहिए। खासकर घर के बाहर दीपक रखते समय उन्हें ऐसी जगह रखें जहां पैर लगने या गिरने का खतरा न हो।
इस धनतेरस अपने घर की परंपरा के अनुसार दीपक जलाएं और यम दीपक के साथ परिवार के सुख, शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि की प्रार्थना करें। धनतेरस की रोशनी केवल घर को जगमगाने तक सीमित नहीं, बल्कि जीवन में शुभता और सकारात्मकता लाने का प्रतीक भी है।