हरतालिका तीज व्रत विधि: जानें व्रत के नियम, पूजा विधि और पूजा की संपूर्ण सामग्री

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हरतालिका तीज व्रत विधि: जानें व्रत के नियम, पूजा विधि और पूजा की संपूर्ण सामग्री

हरतालिका तीज हिंदू धर्म के प्रमुख व्रतों में से एक है, जिसे महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा और हमेशा सुहाग (पति की लम्बी आयु) की कामना के लिए करती हैं। इस दिन व्रत रखने के साथ नियम के अनुसार शिव-पार्वती की पूजा की जाती है। इसलिए इस व्रत को सही तरीके से करने के लिए पूजा की शुरुआत से लेकर कथा, दान और व्रत खोलने तक की जानकारी होना जरूरी है।

हरतालिका तीज व्रत विधि

हरतालिका तीज के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद पूजा की तैयारी शुरू करें। सबसे पहले केले से पूजा के लिए स्थान बनाएं। इसे अलग-अलग रंगों के कपड़ों से सजाएं और उसमें खुशबूदार चंदन लगाएं। इसके बाद बालू से भगवान शिव और माता पार्वती की मूर्ति बनाकर पूजा के स्थान पर रखें। यदि बालू की मूर्ति बनाना संभव न हो तो भगवान शिव और माता पार्वती की तस्वीर भी रख सकते हैं।

पूजा शुरू करने से पहले व्रत रखने वाली महिला पूर्व दिशा की ओर मुख करके आसन पर बैठें। बायें हाथ में जल लेकर दाहिने हाथ से यह मंत्र पढ़ें- 

ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा।
यः स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः ॥

मंत्र पढ़कर अपने शरीर पर जल छिड़कें। इसके बाद दाहिने हाथ में जल लेकर हरतालिका तीज व्रत करने का मन में निश्चय करें। उमा-महेश्वर यानी भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने का निश्चय करके जल भूमि पर छोड़ दें।

इसके बाद गणेशजी की पूजा करें। फिर हाथ में बेलपत्र लेकर, सोने के समान चमक वाली, कमल के आसन पर बैठी और भक्तों को मनचाहा वर देने वाली माता पार्वती का चिंतन करें। इसी तरह बालों में मदार यानी आक के फूलों की माला पहने और सुंदर वस्त्रों से सजी माता पार्वती तथा मुंडों की माला पहने हुए, बिना वस्त्रों के रहने वाले भगवान शिव का चिंतन करते हुए उमा-महेश्वर की मूर्ति पर बेलपत्र चढ़ाएं।

इसके बाद शंख, भेरी, मृदंग आदि वाद्य बजाकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करें। हाथ में साबुत चावल (अक्षत) लेकर उमा-महेश्वर को पूजा में बुलाएं और उन्हें बैठने के लिए स्थान दें। इसके बाद पैर धोने के लिए जल, पूजा का जल, आचमन, पंचामृत और साफ जल से स्नान कराएं। फिर भगवान शिव और माता पार्वती को वस्त्र अर्पित करें।

इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती को चंदन, साबुत चावल, सुहाग का सामान और खुशबूदार फूल चढ़ाएं। हाथ में फूल और साबुत चावल लेकर माता पार्वती को चढ़ाएं। इसके बाद धूप, दीप, भोग, फल, पान, सुपारी और दक्षिणा चढ़ाएं। पूजा में नारियल और मौसम के अनुसार फल भी चढ़ा सकते हैं। इसके बाद कपूर से आरती करें और फूल लेकर उमा-महेश्वर के चरणों में चढ़ाएं।

पूजा के दौरान भगवान शिव को पाँच मुख वाले, शांत रूप और त्रिशूल धारण करने वाले रूप में नमन करें। नंदी, भृंगी और महाकाल आदि गणों के साथ भगवान शिव को प्रणाम करें। इसके बाद माता पार्वती से सौभाग्य, संपत्ति और अपनी सभी इच्छाओं को पूरा करने की प्रार्थना करें।

इसके बाद उमा-महेश्वर की मूर्ति की परिक्रमा करें और नमस्कार करके कहें- हे देव! आप मुझे पुत्र, धन, सौभाग्य तथा मेरी सभी इच्छाओं को पूरा करें। इस प्रकार भगवान शिव और माता पार्वती से प्रार्थना करें।

इसके बाद हाथ में जल लेकर इन श्लोकों का पाठ करें- 

'अन्नं सुवर्णपात्रस्थं सवस्त्र-फल-दक्षिणाम्।
वायनं गौरि ! विप्राय ददामि तव प्रीतये ॥१॥
सौभाग्या-ऽऽरोग्य-कामाय सर्वसम्पत्समृद्धये।
गौरी-गिरीश-तुष्ट्यर्थं वायनं च ददाम्यहम्॥२॥

इन श्लोकों को पढ़कर मन में निश्चय करें और सौभाग्यवायन यानी सोलह श्रृंगार का उपहार ब्राह्मण को दें। इसमें अपनी क्षमता के अनुसार अन्न, वस्त्र, फल, पकवान और दक्षिणा रख सकते हैं।

पूजा पूरी करने के बाद हरतालिका तीज व्रत की कथा पढ़ें या किसी अन्य व्यक्ति से सुनें। कथा के बाद अपनी क्षमता के अनुसार ब्राह्मण को अन्न, वस्त्र और धन का दान करें। इसके बाद दक्षिणा दें। यदि संभव हो तो स्त्रियों को सुहाग का सामान या आभूषण भी दे सकते हैं।

हरतालिका तीज के दिन रात में जागने की भी परंपरा है। व्रत रखने वाली महिला को पूरे दिन श्रद्धा के साथ भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करनी चाहिए। व्रत के दौरान अन्न का सेवन नहीं करना चाहिए।

व्रत की पूजा पूरी होने के बाद चाँदी, सोने, तांबे या इनके न होने पर बाँस की डलिया में वस्त्र, फल, पकवान आदि रखकर दक्षिणा के साथ ब्राह्मण को दान करें। अगले दिन पूजा पूरी करने के बाद व्रत खोलें। इस तरह श्रद्धा और नियम के साथ हरतालिका तीज का व्रत पूरा किया जाता है।

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