Navratri Pooja Vidhi: नवरात्रि में कैसे करें पूजा ? जानें नौ दिनों की पूजा विधि।

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Navratri Pooja Vidhi: नवरात्रि में कैसे करें पूजा ? जानें नौ दिनों की पूजा विधि।

Navratri Puja Vidhi: वर्ष भर में चार बार आने वाली नवरात्रियों में से चैत्र और शारदीय नवरात्रि का विशेष महत्व होता है। खासतौर पर चैत्र नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधिपूर्वक पूजा की जाती है। नवरात्रि को सही विधि और पूर्ण श्रद्धा के साथ मनाने के लिए भक्त पहले से ही नवरात्रि पूजा विधि 2026 के बारे में जानना चाहते हैं। मान्यता है कि जो भक्त पूरे समर्पण से मां के नौ रूपों की आराधना करते हैं, उन्हें साहस, शक्ति और सफलता का आशीर्वाद मिलता है।

आइए अब विस्तार से जानते हैं चैत्र नवरात्रि 2026 की संपूर्ण पूजा विधि और नौ दिनों में मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा का महत्व।

नवरात्रि में दुर्गा पूजा की सामान्य विधि (Navratri Puja Vidhi)

नवरात्रि की पूजा शुरू करने से पहले कुछ बुनियादी नियम और सामग्री का ध्यान रखना जरूरी है।

नवरात्रि पूजा की आवश्यक सामग्री (Navratri Puja ki samagri)

  • माता दुर्गा की प्रतिमा या चित्र

  • लाल या पीली चुनरी

  • कलश और नारियल

  • आम के पत्ते

  • गंगाजल

  • रोली, चावल, मौली

  • अगरबत्ती, दीपक, घी

  • पुष्प, फल और मिठाई

  • जौ या गेहूं के दाने (बीज बोने के लिए)

नवरात्रि के नौ दिनों की दुर्गा पूजा विधि (Navratri Puja Vidhi)

पहला दिन – मां शैलपुत्री

पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा होती है। ये पर्वतराज हिमालय की पुत्री हैं और स्थिरता व शक्ति की प्रतीक हैं।

  • पूजा में सफेद फूल अर्पित करें।

  • गाय का घी भोग लगाना शुभ माना जाता है।

  • पूजा से जीवन में साहस और स्थिरता आती है।

दूसरा दिन – मां ब्रह्मचारिणी

दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की आराधना की जाती है। ये तप, संयम और साधना की देवी हैं।

  • मां को सफेद वस्त्र और कमल के फूल अर्पित करें।

  • शुद्ध घी का दीपक जलाएं।

  • इनकी पूजा से मानसिक शांति और धैर्य प्राप्त होता है।

तीसरा दिन – मां चंद्रघंटा

तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा होती है। इनके माथे पर अर्धचंद्र होता है।

  • लाल वस्त्र और लाल फूल अर्पित करें।

  • शहद का भोग लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है।

  • इनकी पूजा से भय और नकारात्मकता दूर होती है।

चौथा दिन – मां कूष्मांडा

मां कूष्मांडा को ब्रह्मांड की सृष्टिकर्त्री माना जाता है।

  • इन्हें पुष्पों की माला अर्पित करें।

  • भोग में मालपुआ या मिठाई अर्पित करें।

  • इनकी पूजा से स्वास्थ्य और समृद्धि मिलती है।

पांचवां दिन – मां स्कंदमाता

मां स्कंदमाता भगवान कार्तिकेय की माता हैं।

  • मां को पीले या सफेद फूल अर्पित करें।

  • भोग में केले अर्पित करना शुभ होता है।

  • इनकी पूजा से परिवार में सुख-शांति आती है।

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छठा दिन – मां कात्यायनी

छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा होती है। विवाह और प्रेम में सफलता के लिए इनकी आराधना की जाती है।

  • मां को गुलाबी या लाल फूल चढ़ाएं।

  • शहद का भोग अर्पित करें।

  • पूजा से विवाह संबंधी बाधाएं दूर होती हैं।

सातवां दिन – मां कालरात्रि

मां कालरात्रि संकटमोचन और शत्रुनाशिनी मानी जाती हैं।

  • मां को लाल फूल चढ़ाएं।

  • दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।

  • इनकी पूजा से भय, रोग और शत्रु नष्ट होते हैं।

आठवां दिन – मां महागौरी

मां महागौरी का स्वरूप श्वेत और शांत है।

  • मां को सफेद वस्त्र और पुष्प अर्पित करें।

  • हलवे का भोग लगाएं।

  • पूजा से मन की पवित्रता और शांति मिलती है।

नौवां दिन – मां सिद्धिदात्री

नवमी के दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा होती है। ये सभी सिद्धियों की दात्री हैं।

  • मां को लाल, पीले और सफेद फूल चढ़ाएं।

  • फल और मिठाई का भोग लगाएं।

  • इस दिन कन्या पूजन का विशेष महत्व है।

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नवरात्रि में ध्यान रखने योग्य बातें

  • पूजा स्थल हमेशा स्वच्छ और पवित्र रखें।

  • नौ दिनों तक व्रत रखें और सात्विक भोजन करें।

  • नकारात्मक विचार और क्रोध से बचें।

  • माता को ताजे फूल और प्रसाद अर्पित करें।

  • मंत्र जाप और दुर्गा सप्तशती का पाठ अवश्य करें।

चैत्र नवरात्रि 2026 सिर्फ उपवास या परंपरा निभाने का पर्व नहीं है, बल्कि यह समय आत्मशुद्धि, साधना और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। यदि नौ दिनों तक मां दुर्गा के प्रत्येक स्वरूप की पूजा शास्त्रों के अनुसार की जाए, तो घर में सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली स्थायी रूप से आती है। नवरात्रि हमें यह संदेश देती है कि जब हम श्रद्धा और विश्वास से माता की आराधना करते हैं, तो वे हमारी हर कठिनाई का समाधान करती हैं और जीवन को नई दिशा देती हैं।

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