Sawan Vrat Food: सावन का महीना शुरू होते ही शिव भक्त भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना में जुट जाते हैं। कोई हर सोमवार व्रत रखता है, तो कोई पूरे महीने सात्विक भोजन करता है। वहीं कुछ भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार फलाहार या निर्जला व्रत भी रखते हैं। ऐसे में खान-पान को लेकर कई सवाल मन में आते हैं। खासकर सावन के व्रत में क्या खाएं, क्या न खाएं, कढ़ी क्यों नहीं खाई जाती और क्या सोमवार के व्रत में नमक खाया जा सकता है?
सावन के व्रत में सामान्य अनाज की जगह फलाहार और व्रत में खाई जाने वाली चीजों का सेवन किया जाता है। इस दौरान फल, दूध, दही, पनीर, मखाना और सूखे मेवे खाए जा सकते हैं। इसके अलावा कुट्टू का आटा, सिंघाड़े का आटा, राजगिरा, साबूदाना और सामक के चावल भी व्रत के भोजन में शामिल किए जाते हैं।
सब्जियों की बात करें तो आलू, शकरकंद, अरबी, लौकी, कद्दू और कच्चे केले का सेवन किया जा सकता है। इन्हें सेंधा नमक, जीरा, काली मिर्च, हरी मिर्च और अदरक के साथ तैयार किया जा सकता है।
अगर आप पहली बार सावन का व्रत रख रहे हैं, तो सुबह फल, दूध या कुछ सूखे मेवों से शुरुआत कर सकते हैं। दिन में साबूदाने की खिचड़ी, मखाना या फल लिया जा सकता है। वहीं शाम को भगवान शिव की पूजा के बाद कुट्टू या सिंघाड़े के आटे की पूरी, आलू की सब्जी या अन्य फलाहारी भोजन किया जा सकता है।
सावन सोमवार के व्रत में सामान्य रूप से साधारण सफेद नमक नहीं खाया जाता। इसकी जगह सेंधा नमक का इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि, कुछ लोग व्रत में किसी भी तरह का नमक नहीं खाते और केवल फल या दूध का सेवन करते हैं।
वहीं निर्जला व्रत रखने वाले भक्त अन्न और जल दोनों का त्याग करते हैं। इसलिए नमक खाना या न खाना इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस तरह का व्रत रख रहे हैं और आपके परिवार में क्या परंपरा चली आ रही है।
सावन के महीने में सात्विक भोजन करने की परंपरा है। खासतौर पर व्रत रखने वाले लोग गेहूं, सामान्य चावल, दाल और बेसन का सेवन नहीं करते। इसके अलावा साधारण नमक, प्याज और लहसुन से भी दूरी बनाई जाती है।
सावन व्रत के दौरान आमतौर पर हल्दी, सरसों, हींग और गरम मसाले का इस्तेमाल भी नहीं किया जाता। मांसाहार और शराब जैसे तामसिक पदार्थों से पूरी तरह परहेज करने की धार्मिक परंपरा है। इसके अलावा बहुत अधिक तले-भुने और बाजार में मिलने वाले नमकीन खाद्य पदार्थों से भी बचना बेहतर माना जाता है।
सावन में कढ़ी क्यों नहीं खाई जाती, इसे लेकर भी कई लोगों के मन में सवाल रहता है। दरअसल, सामान्य कढ़ी को बेसन और दही से तैयार किया जाता है। व्रत के दौरान बेसन नहीं खाया जाता, इसलिए सावन सोमवार का उपवास रखने वाले लोग सामान्य कढ़ी का सेवन नहीं करते।
इसके अलावा सावन वर्षा ऋतु में आता है और इस दौरान कुछ परिवार दही तथा उससे बने खाद्य पदार्थों को खाने से भी बचते हैं। हालांकि, सावन में कढ़ी न खाने का नियम हर जगह एक जैसा नहीं है। कुछ लोग केवल व्रत वाले दिन कढ़ी नहीं खाते, जबकि कुछ लोग पूरे सावन इससे दूरी बनाए रखते हैं।
जी हां, सावन के व्रत में साबूदाना खाया जा सकता है। साबूदाने की खिचड़ी व्रत में सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले व्यंजनों में से एक है। इसे आलू, मूंगफली, जीरा, हरी मिर्च और सेंधा नमक के साथ बनाया जा सकता है।
इसके अलावा साबूदाना वड़ा और साबूदाना खीर भी लोकप्रिय हैं। हालांकि, अगर आप हल्का भोजन करना चाहते हैं तो तले हुए साबूदाना वड़े की जगह कम तेल में बनी साबूदाना खिचड़ी को चुन सकते हैं।
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सावन के व्रत में दही खाना आपकी पारिवारिक और क्षेत्रीय परंपरा पर निर्भर करता है। कई लोग व्रत में दही खाते हैं और इसे फलाहार का हिस्सा मानते हैं। वहीं कुछ परिवार सावन के पूरे महीने दही और उससे बने खाद्य पदार्थों से परहेज करते हैं।
इसलिए अगर आपके परिवार में सावन के दौरान दही न खाने की परंपरा है, तो उसका पालन किया जा सकता है। वहीं अगर ऐसी कोई मनाही नहीं है, तो व्रत के नियमों के अनुसार दही का सेवन किया जा सकता है।
सावन का व्रत रखते समय अपनी शारीरिक क्षमता का ध्यान रखना भी जरूरी है। अगर आपका व्रत निर्जला नहीं है, तो पर्याप्त मात्रा में पानी और अन्य स्वीकार्य तरल पदार्थ लेते रहें। खासतौर पर बारिश के मौसम की उमस में शरीर में पानी की कमी से बचना जरूरी है।
व्रत खोलते समय अचानक बहुत अधिक तला-भुना या भारी भोजन न करें। शुरुआत फल, दूध या किसी हल्के भोजन से की जा सकती है। व्रत का उद्देश्य केवल भूखे रहना नहीं, बल्कि संयम, भक्ति और सात्विकता का पालन करना माना जाता है।
गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों, बच्चों या किसी स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे लोगों को कठोर उपवास करने से पहले योग्य चिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए।
सावन का व्रत भगवान शिव के प्रति श्रद्धा, भक्ति और संयम का प्रतीक माना जाता है। व्रत के दौरान खान-पान के नियम अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में अलग हो सकते हैं। इसलिए अपनी पारिवारिक परंपरा और शारीरिक क्षमता को ध्यान में रखते हुए ही व्रत करना चाहिए।
सावन सोमवार का व्रत रखने वाले लोग अपनी श्रद्धा के अनुसार फलाहार, एक समय भोजन या निर्जला उपवास कर सकते हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि व्रत को श्रद्धा और संयम के साथ रखा जाए।
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