Krishna Mandir: भारत के लोगों में आस्था का रंग बहुत गहराई से देखने को मिलता है। यहां हर शहर, गाँव, या कस्बे में आपको सैंकड़ों मंदिर देखने को मिल सकते हैं। यह दर्शाता है कि भक्ति के मामले में यहां के लोग सबसे आगे हैं। इन मंदिरों में बड़ी संख्या में कृष्ण मंदिर भी शामिल हैं। कृष्ण मंदिरों में आपको ऐसे-ऐसे भक्त देखने को मिलते हैं जो पूरी तरह कृष्ण भक्ति में डूबे रहते हैं।
हिंदुओं में भगवान कृष्ण को सिर्फ देवता के रूप में नहीं बल्कि प्यार, करुणा और जीवन से जुड़ी सीख देने वाले मित्र के रूप में माना जाता है। यही कारण है कि आप जैसे ही उनके मंदिरों में प्रवेश करते हैं तो एक अलग सुकून महसूस होता है। वैसे तो सभी मंदिर खास और पवित्र होते हैं, लेकिन इनमें से कुछ अपने इतिहास, संस्कृति, और खूबसूरत वास्तुकला के कारण बाकियों की तुलना में ज्यादा प्रसिद्धि पाते हैं।
अगर आप भी ऐसे कृष्ण मंदिरों (shree krishna mandir) की खोज में हैं जो आपको बेहतरीन अनुभव दे सकते हैं तो यहां बताए गए मंदिर आपके लिए विशेष हो सकते हैं। यहां आज आप ऐसे ही प्रमुख कृष्ण मंदिरों (hare krishna mandir) के बारे में जानेंगे जो अपने शांत वातावरण और आध्यात्मिक महत्व के लिए जाने जाते हैं।
जो भी लोग कृष्ण भक्त हैं और कृष्ण के समीप रहना चाहते हैं उनके लिए कृष्ण मंदिरों से जुड़ी यह जानकारी बेहद खास हो सकती है।
कृष्ण से जुड़ी हर बात जहाँ दिल को छू जाती है, वहीं मथुरा ऐसा शहर है जहाँ उनकी उपस्थिति आज भी महसूस होती है। इसी शहर में बना श्री कृष्ण जन्मभूमि मंदिर उन लोगों की पहली पसंद है जो कृष्ण को उनके वास्तविक जन्मस्थान पर याद करना चाहते हैं। यहाँ पहुँचकर लगता है जैसे इतिहास, भक्ति और भावनाएं सभी एक साथ मिलकर आपका स्वागत कर रही हों।
क्यों खास है यह जगह
लोग यहाँ इसलिए नहीं आते कि यह सिर्फ एक बड़ा मंदिर है, बल्कि इसलिए कि यही वह स्थान माना जाता है जहाँ देवकी ने कृष्ण को जन्म दिया था। इस वजह से यहाँ की ऊर्जा और माहौल कुछ अलग ही महसूस होता है। जन्माष्टमी के समय तो पूरा क्षेत्र उत्सव में बदल जाता है रोशनी, संगीत और भक्ति से भरा हुआ।
क्या-क्या देख सकते हैं
मंदिर परिसर में कई स्थल हैं जिन्हें देखकर ऐसा महसूस होता है जैसे आप पुरानी कथाओं में चल रहे हों। जन्मस्थल से जुड़ी कारावास की जगह और वहां बनी कलात्मक मूर्तियाँ व चित्र, कृष्ण के बचपन की याद दिलाती हैं। यहाँ घूमते हुए हर कदम पर कुछ नया देखने को मिलता है।
सुझाव
अगर आप कम लोगों के बीच जाना चाहते हैं तो सुबह जल्दी या फिर शाम को जाना बेहतर होता है। उस समय मंदिर काफी शांत रहता है और आप आराम से दर्शन कर सकते हैं। यहाँ की आरती बहुत सुंदर होती है, इसलिए उसे मिस न करें।
समुद्र के किनारे बसा द्वारका शहर कृष्ण भक्तों के लिए किसी खजाने से कम नहीं है। ऐसा कहा जाता है कि कृष्ण ने यहाँ राजा के रूप में अपना राज्य बसाया था, और इसी वजह से द्वारकाधीश मंदिर इस शहर की बहुत बड़ी पहचान है। लोग यहाँ कृष्ण को “द्वारका के राजा” के रूप में याद करते हैं।
क्यों खास है यह स्थान
आमतौर पर आप कृष्ण को प्रेम, स्नेह और बाललीला के रूप में जानते हैं, लेकिन द्वारकाधीश मंदिर आपको उनके एक और रूप एक न्यायप्रिय राजा और रक्षक का एहसास कराता है। इस रूप की भक्ति भी लोगों के दिलों में उतनी ही गहराई से बसी है।
मंदिर की खूबसूरती
मंदिर को देखते ही उसकी ऊँची शिखरें ध्यान खींच लेती हैं। लगभग 78 मीटर ऊँचा यह ढाँचा हिंदू वास्तुकला का सुंदर उदाहरण है। बाहर की दीवारों पर देवताओं की बारीक नक्काशी है और मंदिर के ऊपर लहराता लगभग 60 फीट लंबा ध्वज दिन में कई बार बदला जाता है। भक्तों का मानना है कि यह ध्वज कृष्ण की उपस्थिति का निरंतर संकेत है।
सुझाव:
जन्माष्टमी और दीपावली के समय यहां जरूर आएं। इस दौरान मंदिर में अद्भुत रौनक रहती है। हजारों लोग यहाँ आते हैं, भजन गूँजते हैं और पूरा परिसर उत्सव में डूब जाता है। समुद्र के किनारे होने के कारण यहाँ घूमते हुए एक अलग ही शांति महसूस होती है। यह यात्रा आध्यात्मिक होने के साथ-साथ प्रकृति के करीब ले जाने वाली भी बन जाती है।
वृंदावन में घूमते हुए एक जगह ऐसी है जहाँ हर तरफ बस खूबसूरती, शांति और भक्ति ही महसूस होती है, यह है प्रेम मंदिर। नाम ही बताता है कि यह मंदिर कृष्ण के दिव्य प्रेम को समर्पित है। इसे जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज ने बनवाया था और आज यह वृंदावन की सबसे आकर्षक जगहों में गिना जाता है।
क्यों जाएं प्रेम मंदिर
पूरे मंदिर में सफेद संगमरमर का इस्तेमाल किया गया है, और इसकी दीवारों पर की गई नक्काशियाँ इतनी बारीक हैं कि देखते ही मन ठहर जाता है। यहाँ चलते-चलते आपको कृष्ण की लीलाएँ, गोपियों का स्नेह और भक्ति के कई रूप कला के ज़रिए दिखाई देते हैं।
जाने का सबसे खास समय
अगर मौका मिले तो शाम के बाद यहाँ ज़रूर जाएं। मंदिर परिसर रंग-बिरंगी रोशनियों से चमक उठता है। म्यूज़िकल फाउंटेन और रोशनी का मेल इतना सुंदर लगता है कि लोग देर तक वहीं बैठे रह जाते हैं। यह अनुभव हर उम्र के व्यक्ति को खुशी देता है।
सुझाव
मंदिर में कुछ देर ध्यान में बिताएं। मंदिर परिसर में बैठकर ध्यान करने की जगहें हैं और समय-समय पर आध्यात्मिक कार्यक्रम भी होते रहते हैं। भीड़भाड़ के बावजूद परिसर बड़ा होने के कारण यहाँ आराम से घूमने का अवसर मिलता है।
वृंदावन में अगर किसी जगह पर सबसे ज़्यादा रौनक और भक्ति का रंग एक साथ दिखाई देता है, तो वह है बाँके बिहारी मंदिर। यहाँ आने वाले लोग कृष्ण को उनके चंचल, बाल सुलभ और मोहक रूप में महसूस करते हैं। मंदिर का माहौल ऐसा होता है कि भक्त अपने आप ही भजन, ताल और प्रेम-भाव में खो जाते हैं।
किस रूप में विराजमान है भगवान कृष्ण
यहां मौजूद मूर्ति में कृष्ण की हल्की झुकी हुई मुद्रा दिखाई देती है। ‘बाँके’ का मतलब है तिरछा या मुड़ा हुआ, और ‘बिहारी’ यानी आनंद देने वाले। यह रूप कृष्ण की मधुरता, शरारत और गोपियों से जुड़े प्रेम भाव को दर्शाता है। यहाँ पूजा-पाठ भी इसी प्रेम रस से भरपूर होता है।
जाने का सबसे खास समय
होली और जन्माष्टमी के समय मंदिर बिल्कुल अलग ही जीवन्त हो उठता है। चारों तरफ रंग, संगीत, नृत्य और उत्साह फैल जाता है। कई भक्त तो इन्हीं दिनों यहाँ विशेष दर्शन के लिए आते हैं क्योंकि अनुभव सच में यादगार होता है।
सुझाव
मंदिर में पूजा और दर्शन की अपनी विशिष्ट व्यवस्था है, इसलिए भीड़ से बचना हो तो सुबह जल्दी या फिर दोपहर बाद जाना बेहतर है। इससे आप आराम से दर्शन कर पाएँगे।
कर्नाटक के समुद्र तट के पास बसे उडुपी शहर में कृष्ण का यह प्रसिद्ध मंदिर लोगों को अपनी अनोखी परंपराओं और शांत वातावरण की वजह से तुरंत आकर्षित कर लेता है। यहाँ की भक्ति, संस्कृति और इतिहास तीनों मिलकर एक ऐसा अनुभव देते हैं जो कहीं और कम मिलता है। संत माध्वाचार्य का भी इस मंदिर से गहरा संबंध रहा है, जिनकी शिक्षाएँ आज भी यहाँ की दिनचर्या में दिखाई देती हैं।
क्यों जाएं उडुपी मंदिर?
यहाँ कृष्ण के दर्शन सीधे सामने से नहीं, बल्कि एक छोटी-सी खिड़की से होते हैं, जिसे नवग्रह किटिकी कहा जाता है। भक्त लाइन में खड़े होकर इसी खिड़की से दर्शन करते हैं, और इस खास तरीके की वजह से यह मंदिर अलग पहचान रखता है।
मंदिर की खास विशेषताएं
इस मंदिर की पूजा-पद्धति भी अलग है। हर दो साल में एक विशेष आयोजन होता है जिसमें आठ मठों के बीच पूजा की ज़िम्मेदारी बदलती रहती है। यह परंपरा दिखाती है कि किस तरह यह मंदिर सदियों से अपनी सांस्कृतिक धरोहर को संभाले हुए है।
सुझाव
यहां जाने की योजना बना रहे हैं तो उडुपी का प्रसिद्ध शाकाहारी भोजन जरूर चखें। यह भोजन मंदिर की शुद्धता और साधापन को दर्शाता है और कई लोगों के लिए यात्रा का यादगार हिस्सा बन जाता है।
अगर आप श्री कृष्ण को प्रसन्न करने के लिए कोई खास उपाय करना चाहते हैं या कोई अन्य ज्योतिषीय उपाय ढूंढ रहे हैं तो आप एस्ट्रोयोगी के विशेषज्ञ ज्योतिषियों से संपर्क कर सकते हैं.