आरती श्री वैष्णो देवी

आरती श्री वैष्णो देवी

जय वैष्णो माता, मैया जय वैष्णो माता।
भक्तों के संकट, पल में हर जाती॥

त्रिकुटा पर्वत पर, तेरा भवन निराला।
तीन पिंडियों में वास, महिमा है निराला॥

शेरों वाली मैया, भक्तों की रखवाली।
जो भी द्वार पे आए, भर दे झोली खाली॥

सच्चे मन से जो भी, तेरा नाम ध्यावे।
दुख दरिद्र मिटाकर, सुख संपत्ति पावे॥

लाल चुनरिया तेरी, शोभा मन भाए।
देखे जो एक बार, बार-बार आए॥

आरती तेरी जो कोई, प्रेम से गावे।
कहे दास — सब कष्ट, पल में मिट जावे॥

जय वैष्णो माता, मैया जय वैष्णो माता।
भक्तों के संकट, पल में हर जाती॥

बोलो — सच्चे दरबार की जय!  जय माता दी! जय माता दी! जय माता दी!

॥आरती श्री वैष्णो देवी 2॥

जय वैष्णवी माता, मैया जय वैष्णवी माता।

हाथ जोड़ तेरे आगे, आरती मैं गाता॥

शीश पे छत्र विराजे, मूरतिया प्यारी।

गंगा बहती चरनन, ज्योति जगे न्यारी॥

ब्रह्मा वेद पढ़े नित द्वारे, शंकर ध्यान धरे।

सेवक चंवर डुलावत, नारद नृत्य करे॥

सुन्दर गुफा तुम्हारी, मन को अति भावे।

बार-बार देखन को, ऐ माँ मन चावे॥

भवन पे झण्डे झूलें, घंटा ध्वनि बाजे।

ऊँचा पर्वत तेरा, माता प्रिय लागे॥

पान सुपारी ध्वजा नारियल, भेंट पुष्प मेवा।

दास खड़े चरणों में, दर्शन दो देवा॥

जो जन निश्चय करके, द्वार तेरे आवे।

उसकी इच्छा पूरण, माता हो जावे॥

इतनी स्तुति निश-दिन, जो नर भी गावे।

कहते सेवक ध्यानू, सुख सम्पत्ति पावे॥

॥आरती श्री वैष्णो देवी 3॥

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशिदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥

मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को।
उज्ज्वल से दोउ नैना, चंद्रवदन नीको॥

कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजे।
रक्त पुष्प गल माला, कंठन पर साजे॥

केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी।
सुर-नर मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी॥

कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती।
कोटिक चंद्र दिवाकर, सम राजत ज्योति॥

शुम्भ निशुम्भ विदारे, महिषासुर घाती।
धूम्र विलोचन नैना, निशिदिन मदमाती॥

चंड मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे।
मधु कैटभ दोऊ मारे, सुर भयहीन करे॥

ब्रह्माणी रुद्राणी, तुम कमला रानी।
आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी॥

चौंसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरों।
बाजत ताल मृदंगा, अरु बाजत डमरू॥

तुम हो जग की माता, तुम ही हो भर्ता।
भक्तन की दुख हर्ता, सुख संपत्ति करता॥

भुजा चार अति शोभित, वर मुद्रा धारी।
मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी॥

कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।
श्री मालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योति॥

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशिदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥


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