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Chandraghanta Chalisa: चंद्रघंटा चालीसा देवी दुर्गा के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा को समर्पित एक पवित्र स्तुति है। मां चंद्रघंटा अपने मस्तक पर अर्धचंद्र के आकार की घंटा धारण करने के कारण इस नाम से जानी जाती हैं। उनका स्वरूप शक्ति, साहस और दिव्य संरक्षण का प्रतीक माना जाता है।
चंद्रघंटा चालीसा का पाठ करने से मन में आत्मविश्वास बढ़ता है और भय व नकारात्मक ऊर्जा दूर होने लगती है। मान्यता है कि सच्चे मन से मां चंद्रघंटा की आराधना करने से जीवन में शांति, साहस और संतुलन प्राप्त होता है।
नवरात्रि के दौरान मां चंद्रघंटा की पूजा और चालीसा का पाठ विशेष फलदायी माना जाता है। नियमित रूप से इस चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति को मानसिक शक्ति, सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक उन्नति का अनुभव हो सकता है।
चंद्रघंटा मां कल्याणी पावन है शुभ नाम
गौरा गिरजा रूप है
तीसरा सुन लो ज्ञान
चंद्रघंटा माता कल्याणी।
ममतामई माता वरदानी।।
गिरजा का ही रूप कहावे।
मैया भक्तों को अति भावे।।
साहस सब में देवी भरती।
संत जनों की रक्षा करती।।
देवों को विपदा से बचाया।
हाथों में था शस्त्र उठाया।।
वाहन सिंह की करे सवारी।
रौद्र रूप की महिमा भारी।।
कर में चक्र सुदर्शन धारी।
पापी रण में सकल पछाड़े।।
दुर्गा का भी रूप कहावे।
भक्तों की रक्षा को आवे।।
रण में भरती मा हुंकारा।
बल जग में है जिसका न्यारा।।
त्रेता में जब संकट छाया।
रौद्र रूप तब तुमने दिखाया।।
इंद्र सिंहासन असुरन छीना।
सोर बहुत सब हीने कीन्हा।।
महिषासुर दानव एक भारी।
देवों की सेना थी पछाड़ी।।
देवों ने तब ध्यान लगाया।
शिव ने शक्ति पुंज बनाया।।
गौरा ने तब रूप था धारा।
दुर्गा का कीन्हा विस्तारा।।
कर में तब घंटी थी सुहाई।
चंद्र घंटा मां तब कहलाई।।
घंटा रण में मात बजाया।
असुरन को तब मार गिराया।।
देवी ने हुंकार भरी थी।
साहस की ललकार भरी थी।।
महिषासुर का मर्दन कीन्हा।
मैया ने संकट हर लीन्हा।।
धर्म ध्वजा जग में लहरावे।
देवता सार थे हरसावे।।
चंद्रघंटा देवी थी कहावे।
दुर्गा बनके शक्ति दिखावे।।
रण में सारे असुर पछाड़े।
अस्त्र शस्त्र से दानव मारे।।
ग्रंथ कहे ऐसी भी कहानी।
संतो मुनियों ने है जानी।।
शिव जो हिमालय नगरी आए।।
भूत प्रेत और गण भी लाए।
अति भयंकर रूप विशाला।।
कोई मोटा और कोई काला।
देख के मुर्च्छित हो गई मैना।
भय से व्याकुल रोते नैना।।
देवी को ढंग समझ ना आया।
गौरा धारी थी तब काया।।
गौरा ने तब शक्ति दिखाई।
चंद्र घंटा तब बनी महामाई।।
घंटा भारी तब था बजाया।
शिव के गणों को डरा भगाया।।
शिव ने जब था रूप निहारा।
जाना शक्ति सकल पसारा।।
तब देवी चंद्रघंटा कहावे।
वार इनका सुहावे।।
कर में घंटी शोभित इनकी।
रूप पे सब है मोहित जिनकी।।
सिंह सवारी मात को प्यारी।
शोभित वृषभ की भी है सवारी।।
तीसरे दिन जो व्रत को धारे।
मैया सारे काज संवारे।।
देवी दुर्गा मात कहावे।
अभय मुद्रा में बड़ी सुहावे।।
जन-जन चोला लाल चढ़ावे।
मैया से आशीष भी पावे।।
फल फूलों से सजता द्वारा।
लगता द्वारा सबसे न्यारा।।
चंद्र घंटा देवी कल्याणी।
सुख से भरती मां वरदानी।।
मैया मंगल करने वाली।
सुख से झोली भरने वाली।।
करती सबकी पूर्ण आशा।
मन में भरती है विश्वासा।।
चालीसा जो इनका गाता।
वो जन तो भव से तर जाता।।
देवी सबके दुखड़े हरती।
सुख से सबकी झोलियां भरती।।
चंद्र घंटा चालीसा का इतना ही है सारय
प्रेम से जो पड़ता जन है मैया कर भव से पार।।
मां चंद्रघंटा नवदुर्गा का तीसरा स्वरूप हैं। इनकी पूजा से साहस और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। यह चालीसा नकारात्मक शक्तियों और भय को दूर करने में सहायक मानी जाती है। नियमित पाठ से मन में शांति और संतुलन बना रहता है।
चंद्रघंटा चालीसा का पाठ करने से पहले मन और वातावरण को शांत और पवित्र रखना आवश्यक माना जाता है। सही विधि से पाठ करने से भक्त अधिक श्रद्धा और एकाग्रता के साथ मां की आराधना कर पाते हैं।
सबसे पहले पूजा स्थान को साफ करें और मां चंद्रघंटा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
चालीसा पाठ के दौरान कुछ सामान्य नियमों का पालन करना शुभ माना जाता है।
चालीसा का पाठ सुबह सूर्योदय के समय या ब्रह्ममुहूर्त (सुबह लगभग 4 से 6 बजे के बीच) करना शुभ माना जाता है।
नवरात्रि के तीसरे दिन या पूरे नवरात्रि में प्रतिदिन चालीसा पढ़ना विशेष फलदायक माना जाता है।
पाठ से पहले स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
पूजा स्थान को साफ और पवित्र रखें।
मां चंद्रघंटा को फूल, दीपक, अगरबत्ती और नैवेद्य अर्पित करें।
पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके आसन पर बैठना शुभ माना जाता है।
पाठ शुरू करने से पहले मन में मां चंद्रघंटा का ध्यान करें और तीन बार “ॐ देवी चंद्रघंटायै नमः” मंत्र का जाप कर सकते हैं।
जब जीवन में भय, असुरक्षा या मानसिक तनाव बढ़ने लगे, तब मां चंद्रघंटा की आराधना विशेष लाभकारी मानी जाती है। चंद्रघंटा चालीसा का पाठ भक्तों को साहस, शांति और आत्मविश्वास प्रदान करने में सहायक माना जाता है।
मां चंद्रघंटा का स्वरूप दुष्ट शक्तियों के विनाश और भक्तों की रक्षा का प्रतीक है। उनकी आराधना से व्यक्ति के मन से भय और नकारात्मक विचार कम हो सकते हैं।
चालीसा का नियमित पाठ मन को शांत करने और जीवन में संतुलन बनाए रखने में सहायक माना जाता है।
मां चंद्रघंटा की भक्ति से व्यक्ति में आत्मबल और कठिन परिस्थितियों से लड़ने की शक्ति बढ़ती है।
नवरात्रि का तीसरा दिन मां चंद्रघंटा को समर्पित होता है। इस दिन चालीसा का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
श्रद्धा और विश्वास के साथ चंद्रघंटा चालीसा का पाठ करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा और शांति का वातावरण बनता है।
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