पितरों के मोक्ष प्राप्ति के लिए रखें चैत्र अमावस्या व्रत

bell icon Tue, Dec 28, 2021
टीम एस्ट्रोयोगी टीम एस्ट्रोयोगी के द्वारा
चैत्र अमावस्या 2022 – चैत्र अमावस्या का महत्व व व्रत पूजा विधि

हिंदू पंचांग में नए चंद्रमा के दिन को अमावस्या(amavasya) कहते हैं। इस दिन सूरज और चंद्रमा एक साथ होते हैं। पंडितजी का कहना है कि वैसे तो हर महीने अमावस्या होती है लेकिन चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या का अपना ही एक अलग महत्व (importance of amavasya) है इसे चैत्री अमावस्या(chaitra amavasya) या देवपितृकार्य चैत्र मास अमावस्या भी कहते हैं। इस बार चैत्र अमावस्या 1 अप्रैल 2022 को पड़ रही है। इस दिन सुख, सौभाग्य और धन संपत्ति की प्राप्ति के लिए कुछ खास उपाय भी किए जाते हैं। 

 

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चैत्र अमावस्या 2022 का शुभ मुहूर्त

इस बार चैत्री अमावस्या 1 अप्रैल 2022 शुक्रवार को है।

अमावस्या तिथि आरंभ – दोपहर 12 बजकर 22 मिनट से (31 मार्च 2022)

अमावस्या तिथि समाप्त – सुबह 11 बजकर 53 मिनट तक (01 अप्रैल 2022)

 

चैत्र अमावस्या का महत्व

चैत्र अमावस्या (chaitra amavasya) में पितरों की पूजा करने का विधान है। माना जाता है कि इस दिन व्रत करने से पितरों को मोक्ष प्राप्त होता है। दरअसल गरुड़ पुराण के अनुसार इस अमावस्या के दिन पितर अपने वंशजों से मिलने धरती पर आते हैं। यदि इस दिन व्रत रखकर पवित्र नदी गंगा में स्नान करके पितरों का निमित्त तर्पण और दान किया जाए तो वे प्रसन्न हो जाते हैं और आपको पारिवारिक कष्टों से मुक्ति दिलाते हैं साथ ही आपके घर को धन-संपदा से भर देते हैं। कहा जाता है कि अमावस्या के दिन प्रेत आत्माएं काफी सक्रिय होती हैं इसलिए इस दिन धार्मिक कार्यों तथा पूजा पाठ का काफी महत्व होता है। साथ ही इस दिन कालसर्प दोष निवारण की पूजा करना भी उपयुक्त माना जाता है। वहीं इस अमावस्या को विक्रमी संवत का आखिरी दिन भी कहा जाता है। चैत्र अमावस्या के अगले दिन से ही चैत्र नवरात्र शुरू हो जाती है औ हिंदू नववर्ष की भी शुरुआत हो जाती है। 

 

चैत्र अमावस्या पूजा विधि

  • चैत्र अमावस्या के दिन पितरों की पूजा करना सर्वश्रेष्ठ माना गया है। ऐसा करने से पितरों को मुक्ति मिलती है। 

  • इस दिन प्रातकाल जागकर नित्यक्रिया करने के पश्चात पवित्र नदी गंगा में स्नान करना चाहिए और स्नानादि के बाद गंगा में तिल प्रवाहित करना चाहिए। 

  • तत्पश्चात तांबे के बर्तन में लाल चंदन, गंगाजल, शुद्ध जल मिलाकर 3 बार ऊँ पितृभ्य: नम:  मंत्रोच्चार करना चाहिए। इससे गरीबी और दरिद्रता दूर हो जाती है। 

  • इसके बाद सफेद वस्त्र धारण करके दक्षिणाभिमुख होकर अपने पितरों का स्मरण करते हुए उनका तर्पण करें। 

  • यदि हो सके तो पितरों की फोटो के सामने देसी घी का दीपक प्रज्जवलित करें। उनकी तस्वीर पर सफेद रंग का तिलक लगाएं और उन्हें सफेद रंग का पुष्प अर्पित करें। 

  • तत्पश्चात पूर्वजों को स्मरण करते हुए पितृस्त्रोत या पितृसूक्त का पाठ करें। प्रसाद के रूप में खीर और पूरी का भोग लगाएं। इसके बाद भूलचूक होने पर क्षमा मांग लें। 

  • अपनी सामर्थ्य के अनुसार किसी ब्राह्मण को भोजन कराएं और उन्हें दान-दक्षिणा अवश्य दें। अंत में पूर्वजों को भोग लगाई पूरी और खीर को गाय को खिला दें। 

  • तत्पश्चात पूरे परिवार के साथ प्रसाद ग्रहण करें। 

 

अमावस्या के दिन बरतें सावधानी

  • भूलकर भी अमावस्या की रात को किसी सुनसान जगह पर जाने से बचना चाहिए खासतौर पर श्मशान की तरफ तो कभी नहीं जाना चाहिए। माना जाता है कि भूत-प्रेम, पितृ, पिशाच, निशाचर, जीव-जंतु और दैत्य ज्यादा सक्रिय रहते हैं।

  • यदि आपको देर तक सोने की आदत है तो अमावस्या के दिन सुबह जल्दी उठे। इस दिन सुबह जल्दी उठना चाहिए और स्नान करने के बाद सूर्य देवता को जल चढ़ाए।

  • अमावस्या के दिन पारिवारिक कलह से बचना चाहिए। अगर आप घऱ में अमावस्या के दिन विवाद करते हैं तो आपके पितर नाराज हो जाते हैं और कृपा नहीं बरसाते हैं। इस दिन घर में शांति का वातावरण बनाए रखना चाहिए।

  • अमावस्या पर तामसिक चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए साथ ही इस दिन किसी भी प्रकार का नशा भी नहीं करना चाहिए।

  • अमावस्या के दिन संबंध बनाने से बचना चाहिए। गरुण पुराण के अनुसार इस दिन संबंध बनाने से पैदा हुई संतान का जीवन कष्टकारी बना रहता है।

 

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