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चैत्र मास - पर्व व त्यौहार


चैत्र मास - पर्व व त्यौहार

चैत्र मास का हिंदू धर्म में धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से बहुत अधिक महत्व है। क्योंकि फाल्गुन और चैत्र ये दो मास प्रकृति के बहुत ही खूबसूरत मास माने जाते हैं। भारत की छह ऋतुओं में से ऋतुराज मानी जाने वाली बसंत ऋतु इन्हीं दो महीनों की होती है। इसलिये इन महीनों में प्रकृति भी खिली-खिली चहकती हुई नजर आती है। जन-जीवन में भी एक नई ऊर्जा, उत्साह व उल्लास का संचार होता है। तो आइये जानते हैं चैत्र मास के बारे में। अंग्रेजी कलैंडर के अनुसार 2018 में चैत्र मास का आरंभ 2 मार्च से होगा जो कि 31 मार्च को चैत्र पूर्णिमा तक रहेगा।


संवत्सर का पहला मास चैत्र

फाल्गुन जो कि हिंदू वर्ष का अंतिम मास होता है। इसके तुरंत बाद ही लगता है चैत्र का महीना। इसी महीने से होती है हिंदू नववर्ष की शुरूआत। जिसे संवत्सर कहा जाता है। हिंदू वर्ष का पहला मास होने के कारण चैत्र की बहुत ही अधिक महता होती है। अनेक पावन पर्व इस मास में मनाये जाते हैं। चैत्र मास की पूर्णिमा चित्रा नक्षत्र में होती है इसी कारण इसका महीने का नाम चैत्र पड़ा। मान्यता है कि सृष्टि के रचयिता भगवान ब्रह्मा ने चैत्र मास की शुक्ल प्रतिपदा से ही सृष्टि की रचना आरंभ की थी। वहीं सतयुग की शुरुआत भी चैत्र माह से मानी जाती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इसी महीने की प्रतिपदा को भगवान विष्णु के दशावतारों में से पहले अवतार मतस्यावतार अवतरित हुए एवं जल प्रलय के बीच घिरे मनु को सुरक्षित स्थल पर पंहुचाया था। जिनसे प्रलय के पश्चात नई सृष्टि का आरंभ हुआ।


चैत्र मास के पर्व-त्यौहार

हिंदू नववर्ष – चैत्र मास बहुत ही शुभ मास माना जाता है। क्योंकि इसी से हिंदू नव वर्ष या कहें संवत्सर की शुरुआत होती है। मान्यता है कि इस दिन की शुरुआत सूर्य देवता को अर्घ्य देकर सूर्यपूजा से करनी चाहिये व साथ ही धार्मिक स्थलों पर जाकर स्नान दान करना चाहिये।

पापमोचिनी एकादशी – चैत्र मास की कृष्ण एकादशी बहुत ही शुभ मानी जाती है। मान्यता है कि इस एकादशी का उपवास करने से सभी प्रकार के पापों का शमन होता है।

चैत्र अमावस्या – चूंकि यह संवत्सर की पहली अमावस्या होती है इसलिये इसे पितृ कर्म के लिये बहुत ही शुभ फलदायी माना जाता है। अपने पितरों की शांति के लिये इस दिन तर्पण करना चाहिये।

चैत्र नवरात्र – चैत्र मास का विशेष आकर्षण होते हैं मां की उपासना के नौ दिन शुक्ल प्रतिपदा से लेकर नवमी तक माता के विभिन्न रूपों की पूजा की जाती है।

राम नवमी – चैत्र शुक्ल नवमी को प्रभु श्री राम की जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। मान्यता है कि रामलला का जन्म इसी दिन हुआ था। इसलिये यह दिन बहुत ही शुभ माना जाता है।

कामदा एकादशी – चैत्र शुक्ल एकादशी को कामदा एकादशी कहा जाता है। इस दिन भगवान श्री हरि यानि विष्णु भगवान की पूजा की जाती है।

चैत्र पूर्णिमा – संवत्सर की पहली पूर्णमासी होती है। इसलिये यह पूर्णिमा उपवास दान-पुण्य आदि धार्मिक कार्यों के लिये बहुत ही शुभ होती है। 

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