विदेश जाने का योग - जानिए क्या है आपकी हथेली में यह योग?

क्या आपको पता है कि आपके विदेश जाने राज आपके हथेली में छुपा है? क्या आप इस बात को मानते है कि हमारे हथेलियों की लकीर में छिपा है हमारे किस्मत का राज? यदि जवाब हां में है तो ठीक यदि ना में है तो आप आज इस कथन पर विश्वास करने वाले हैं। परंतु आपके मन में यह प्रश्न जरूर होगा कि हथेली पर बने लकीर का संबंध विदेश जाने से कैसे हो सकता है? तो हम आपको बता दें कि इसका कनेक्शन है आपके वो भी प्रत्यक्ष रूप से। जी बिलकुल सही पढ़ा आपने ऐसा है। जिसके बारे में आप आगे विस्तार से जानेंगे।

 

विदेश योग व हस्त शास्त्र

जिस तरह से आपकी कुंडली में ग्रहों के संयोग से विदेश जाने के योग बनते हैं। वैसे ही हथेली पर भी कुछ ऐसी रेखाएं मौजूद होती हैं जिनसे आपके बारे में बहुत कुछ जाना जा सकता है। हस्त शास्त्र भी ज्योतिष शास्त्र का एक अंग है। इस विधा के माध्यम से हस्त विद् किसी भी जातक के जीवन में घटने वाले महत्वपूर्ण घटनाओं को जान सकते हैं। यहां तक की आपके जीवन में आपको कब सफलता मिलेगी। इसके साथ ही आपको कम परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। इसकी भी जानकारी हमारी हथेली की रेखाएं देती हैं। इसी तरह विदेश जाने के योग हाथ में हैं या नहीं यह एक अनुभवी हस्त रेखा विद् बता सकता है। इसलिए यदि आपके कुंडली में विदेश जाने के योग न हो परंतु आपकी हथेली पर हो तो ऐसे में आपकी विदेश यात्रा की संभावना बढ़ जाती है। क्या आपकी हथेली में विदेश जाने की रेखा? जानने के लिए अभी बात करें, देश के विख्यात हस्त ज्योतिषाचार्यों से।

 

कैसे पता करें हथेली में है विदेश योग?

हथेली पर विदेश जाने का योग या रेखा है कि नहीं इसकी जानकारी केवल हस्त ज्योतिष विद् ही दे सकते हैं। क्योंकि हथेली पर ऐसे कई रेखाएं होती हैं। जिनका विश्लेषण करने पर ही यह ज्ञात हो पाता है। हस्त विदों का कहना है कि रेखा कहीं पर भी बन सकती है। परंतु रेखा हथेली के किस स्थान पर बना है यह भी काफी मायने रखता है। जिस तरह कुंडली में ग्रह की स्थिति के हिसाब उसका परिणाम मिलता है ठीक उसी तरह रेखा किस स्थान पर बना है उसके आधार पर भी इसका फलित होना या न होना तय होता है। वैसे तो हथेली पर तीन प्रमुख रेखाओं को माना गया है। इसके साथ ही चार पर्वत हैं। इन पर बने या इनसे जुड़े रेखाओं का भी अपना महत्व होता है। हस्त शास्त्र के बारे में विस्तार से जानने के लिए यहां क्लिक करें।

 

हस्त शास्त्र में रेखाएं व पर्वत का महत्व

हस्त शास्त्र में भी रेखाएं व पर्वत हैं। जिनकी विस्तृत जानकारी हस्त ज्योतिष शास्त्रियों के पास है। हस्त विदों के अनुसार हथेली पर मष्तिष्क रेख, हृदय रेखा व जीवन रेखा महत्वपूर्ण हैं। परंतु एक और रेखा है जिसे भाग्य रेखा के नाम से जाना जाता है। ज्यादातर विश्लेषण इन्हीं के आधार पर किया जाता है। इसके साथ ही इन रेखाओं से निकलने वाली रेखाओं को भी देखा जाता है। बात पर्वतों की करें तो सूर्य पर्वत, चंद्र पर्वत, शुक्र पर्वत व शनि पर्वत हैं। इसके अलावा हथेली पर बुध व बृहस्पति पर्वत भी मौजूद हैं। जिसका भी अपना ही प्रभाव व महत्व है। यहां जानिए क्या आपकी कुंडली में हैं विदेश जाने के योग?

 

विदेश जाने की रेखा कैसे बनती है?

हस्त ज्योतिषियों का कहना है कि जीवन रेखा व मणिबंध रेखा के बीच में यदि वाई (Y)  अक्षर बना है तो यह विदेश जाने का संकेत देता है यानी की जातक को जीवन में कभी न कभी विदेश जाने का मौका जरूर मिलेगा। इसके साथ ही जीवन रेखा निकलकर यदि कोई रेखा चंद्र पर्वत की ओर जाती है तो यह भी विदेश यात्रा करवाती है। जातक विदेश में कार्य व व्यापार के लिए यात्राएं करता है। इसके साथ ही कई अन्य रेखाएं व स्थिति हैं। जिनका विश्लेषण करने से भी विदेश योग के बारे में जानकारी मिलती है। इसके लिए आपको योग्य व अनुभवी हस्त विद् से परामर्श करने की आवश्यकता है। ऐसे में आप एस्ट्रोयोगी पर देश के जाने माने हस्त विद् से परामर्श ले सकते हैं। अभी परामर्श लेने के लिए यहां क्लिक करें।  

एस्ट्रो लेख

चंद्र ग्रहण 202...

चंद्र ग्रहण और सूर्य ग्रहण के बारे में प्राथमिक शिक्षा के दौरान ही विज्ञान की पुस्तकों में जानकारी दी जाती है कि ये एक प्रकार की खगोलीय स्थिति होती हैं। जिनमें चंद्रमा, पृथ्वी के औ...

और पढ़ें ➜

चंद्र ग्रहण का ...

साल 2020 का दूसरा चंद्रग्रहण(chandra grahan 2020) इस बार 5 जून शुक्रवार को पड़ेगा। चंद्र ग्रहण 05 जून रात 11:15 बजे से शुरू होगा और 06 जून 02:34 बजे तक रहेगा। यह चंद्र ग्रहण वृश्चि...

और पढ़ें ➜

ज्येष्ठ पूर्णिम...

वैसे तो प्रत्येक माह की पूर्णिमा का हिंदू धर्म में बड़ा महत्व माना जाता है लेकिन ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा तो और भी पावन मानी जाती है। धार्मिक तौर पर पूर्णिमा को स्नान दान का बहुत अध...

और पढ़ें ➜

निर्जला एकादशी ...

हिंदू पंचांग के अनुसार वर्ष में 24 एकादशियां आती हैं। लेकिन अधिकमास की एकादशियों को मिलाकर इनकी संख्या 26 हो जाती है। सभी एकादशियों पर हिंदू धर्म में आस्था रखने वाले भगवान विष्णु क...

और पढ़ें ➜