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गुड फ्राइडे 2017 – जानिये कैसे मनाते हैं गुड फ्राइडे


गुड फ्राइडे 2017 – जानिये कैसे मनाते हैं गुड फ्राइडे

गुड फ्राइडे के नाम में भले ही गुड यानि किसी अच्छे की अनुभूति हो लेकिन इस दिन का इतिहास दुखदायी है दर्दनाक है त्रसादीपूर्ण है क्योंकि यही वो दिन है जब दुनिया को मानवता का उपदेश देने वाला, सहनशीलता का पाठ पढ़ाने वाला, क्षमा करने की प्रेरणा देने वाला वो शख्स जिन्हें ईसाई ईश्वर का पुत्र मानते हैं। वही ईसा मसीह, जीसस क्राइट जिन्हें उनके मानवीय और प्रेम के संदेश देने के बदले में तत्कालीन धार्मिक कट्टरपंथियों, कर्मकांडियों ने अपने लिये ख़तरा समझा और रोम के शासक से शिकायत कर उसे सूली पर टंगवाया। लेकिन ईश्वर के इस पुत्र ने तब भी प्रभु से यही प्रार्थना की कि हे ईश्वर इन्हें माफ करना ये नहीं जानते कि ये क्या कर रहे हैं। उन्हीं के बलिदान का दिवस है गुड फ्राइडे।

गुड फ्राइडे ईस्टर रविवार से दो दिन पहले मनाया जाने वाला पर्व है। इसे होली फ्राइडे, ब्लैक फ्राइडे या ग्रेट फ्राइडे इत्यादि नामों से भी जाना जाता है।

कैसे होता है गुड फ्राइडे का निर्धारण

हिंदू कैलेंडर के चंद्र मास की तरह ही गिरजाघर संबंधी चंद्र मास भी होता है जो नये चंद्रमा यानि प्रतिपदा से ही आरंभ होता है। 8 मार्च से 5 अप्रैल के बीच जो नव चंद्रमा दिखाई देता है उससे पास्का विषयक चंद्र मास का आरंभ होता है। इसी मास के तीसरे रविवार को ईस्टर यानि ईसा के पुनरोत्थान यानि पुन: जीवित होने का पर्व मनाया जाता है जो लगभग 40 दिनों तक मनाया जाता है। ईस्टर से पहले पड़ने वाले शुक्रवार को ही गुड फ्राइडे कहा जाता है।

2017 में कब है गुड फ्राइडे

2017 में गुड फ्राइडे का पर्व ग्रेगोरियन कैलेंडर यानि कि जिसे आम तौर पर दुनिया भर में माना जाता है जो 1 जनवरी से लेकर 30 दिसंबर तक होता है के अनुसार 14 अप्रैल को पड़ेगा। यह पास्का विषयक चंद्र मास की पूर्णिमा जो अक्सर 21 मार्च से 18 अप्रैल के बीच पड़ती है के बाद ही आता है।

कैसे मनाते हैं गुड फ्राइडे

गुड फ्राइडे ईसाई धर्म के अनुयायियों का बहुत ही खास पर्व है। इस दिन लोग उपवास भी रखते हैं। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण कार्य ईसा के उपदेशों का स्मरण करना उन्हें अपने जीवन में धारण करने का होता है। ईसा मसीह को परमेश्वर का पुत्र माना जाता है। उन्हें यीशु के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन उन्हें मानने वाले उनके उपदेशों को सुनते हैं। उनके बताये प्रेम, सत्य और विश्वास के मार्ग पर चलने का प्रण लेते हैं। चर्चों में प्रार्थनाओं का आयोजन होता है। अधिकतर जगहों पर इस दिन अवकाश भी घोषित होता है। कुछ स्थानों पर लोग काले कपड़े धारण कर यीशु के बलिदान दिवस पर शोक भी व्यक्त करते हैं। 

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