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तुला राशि में मंगल – किसके लिये मंगल किसका करेंगें अमंगल?


तुला राशि में मंगल – किसके लिये मंगल किसका करेंगें अमंगल?

युद्ध और ऊर्जा के कारक मंगल माने जाते हैं। स्वभाव में आक्रामकता मंगल की देन मानी जाती है। पाप ग्रह माने जाने वाले मंगल अनेक स्थितियों में मंगलकारी परिणाम देते हैं तो बहुत सारी स्थितियां ऐसी भी होती हैं जिनमें मंगल को अमंगल के लिये जाना जाता है। इस कारण ज्योतिषशास्त्र में मंगल की प्रत्येक गतिविधि काफी मायने रखती है। 30 नवंबर 2017 को मंगल का परिवर्तन कन्या राशि से तुला में हो रहा है जहां बृहस्पति पहले से गोचर कर रहे हैं। मंगल और गुरु का साथ आपके हालात कैसे बदलेगा आइये जानते हैं।

मेष - मेष राशि वालों के लिये मंगल का परिवर्तन सातवें स्थान में हो रहा है। सप्तम भाव में मंगल व गुरु की युति होने से अविवाहित जातकों के लिये विवाह के प्रस्ताव आ सकते हैं। परिवार में विवाह या किसी मांगलिक कार्य के आयोजन के योग भी बन रहे हैं। रोमांटिक जीवन भी काफी अच्छा रहने के आसार हैं। शादीशुदा जातक भी दांपत्य जीवन का आनंद ले सकते हैं।  गुरु व मंगल की युति के साथ ही केंद्र में चंद्रमा के होने से गजकेसरी व राजयोग भी निर्मित हो रहे हैं जिससे कामकाजी जीवन भी अच्छा रहने के आसार हैं।

वृषभ – वृषभ राशि वालों के लिये मंगल छठे घर में प्रवेश कर रहे हैं। छठे घऱ में मंगल व गुरु के साथ होने से विपक्षियों, शत्रुओं पर तो आप हावि रह सकते हैं लेकिन हो सकता है आपकी अपनी सेहत आपका साथ न दे। विशेषकर रक्त संबंधि दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। उदर संबंधि परेशानी भी महसूस कर सकते हैं। स्वास्थ्य को लेकर आपके खर्चे बढ़ने के आसार भी हैं।

मिथुन – आपकी राशि से मंगल पंचम भाव में आ रहे हैं। विद्यार्थियों के लिये शानदार समय रहने के आसार हैं। जो जातक प्रतियोगी परीक्षाओं में हिस्सा ले रहे हैं या कहीं साक्षात्कार देने जा रहे हैं तो तैयारी के साथ जायें परिणाम सकारात्मक मिल सकते हैं। उच्च शिक्षा पाने के इच्छुक जातकों के लिये भी समय बढ़िया है प्रयास सफल हो सकते हैं। गुरु व मंगल की युति से आपका रोमांटिक जीवन भी काफी अच्छा रहने की उम्मीद कर सकते हैं। हालांकि संतान को लेकर आप थोड़ा चिंतित अवश्य हो सकते हैं।

कर्क – कर्क राशि से मंगल का परिवर्तन सुख भाव में हो रहा है। चतुर्थ स्थान में मंगल व गुरु का एक साथ होना व केंद्र में चंद्रमा का विचरण करना गजकेसरी व राजयोग का निर्माण कर रहा है जो कि बहुत ही कल्याणकारी योग हैं। इस समय आपको बड़े बुजूर्गों का पूरा साथ मिलेगा। भूमि संबंधी लेन-देन में आपको लाभ मिल सकता है। हालांकि इस समय आपके स्वभाव में क्रोध की प्रवृति बढ़ सकती है जिससे आपको बचने की आवश्यकता है।

सिंह – आपकी राशि से मंगल तृतीय स्थान में गोचर करेंगें। पराक्रम भाव में मंगल व गुरु की युति आपके पराक्रम को बढ़ाने का काम कर सकती है। भाई-बहनों से आपके संबंध भी मधुर रहेंगें। यह समय आपके लिये भाग्योन्नति का समय भी कहा जा सकता है। इस समय शत्रुओं पर भी आपको विजय प्राप्ति हो सकती है। व्यावसायिक, राजनैतिक प्रतिद्वंदियों पर भी आप हावि रह सकते हैं। रोमांटिक जीवन की बात करें तोय यह समय आपके लिये खुशियां प्रदान करने वाला कहा जा सकता है।

कन्या – आपकी राशि से ही मंगल परिवर्तन कर रहे हैं। दूसरे स्थान में मंगल व गुरु के साथ-साथ होने से आपके लिये धनवृद्धि के योग बन रहे हैं। इस समय आपको पैतृक संपत्ति से भी लाभ मिलने के आसार हैं। छोटी मोटी यात्राओं के योग भी आपके लिये बन रहे हैं। रोमांटिक जीवन की बात करें तो आपको थोड़ा संभल कर चलने की आवश्यकता रहेगी। साथी के साथ मतभेद बढ़ने के आसार हैं। इस समय आप प्यार में धोखा भी खा सकते हैं इसलिये सोच समझकर ही आगे बढ़ें।

तुला – मंगल का परिवर्तन आपकी ही राशि में हो रहा है। यह समय आपके मान सम्मान में वृद्धि करने वाला रह सकता है। मंगल व गुरु की युति होने व गुरु व मंगल से केंद्र में चंद्रमा के आमने सामने होने से गुरु चंद्रमा जहां गजकेसरीय योग बना रहे हैं वहीं मंगल व चंद्रमा राजयोग निर्मित कर रहे हैं। साक्षात्कार आदि में यह समय सफलता देने वाला हो सकता है। माता पिता के लिये भी शुभ समय है। हालांकि आपके स्वभाव में क्रोध की प्रवृति बढ़ सकती है जिसका नकारात्मक प्रभाव आपके दांपत्य जीवन पर पड़ सकता है। जहां तक संभव हो साथी के साथ वाद-विवाद करने से बचें व संयंम से काम लें।

वृश्चिक – आपकी राशि से मंगल व्यय भाव में आ रहे हैं। 12वें भाव में मंगल व गुरु आपके लिये दूरस्थ क्षेत्र की यात्रा के योग बना रहे हैं। आपके खर्चों में बढ़ोतरी होने के आसार हैं। पराक्रम के स्तर भी आपके लिये यह समय लाभकारी रहने के आसार हैं। संतान पक्ष की ओर से भी यह समय खुशियां देने वाला रहने के आसार हैं। हालांकि स्वास्थ्य के मामले में आपको नेत्र व मस्तिष्क संबंधी पीड़ाओं से दो चार होना पड़ सकता है।

धनु – आपकी राशि से मंगल लाभ स्थान में प्रवेश कर रहे हैं। 11वें भाव में मंगल व गुरु की युति आपके लिये आक्समिक लाभ प्राप्ति के योग बना रही है। इस दौरान यात्राओं से भी आपको लाभ मिलने के आसार हैं। रोमांटिक जीवन में भी आपके लिये यह समय काफी शानदार रहने के आसार हैं। जो जातक अभी तक अपने साथी से अपने दिल की बात नहीं कह पाये हैं उनके लिये यह समय शुभ संकेत कर रहा है। विवाहित जातकों को संतान संबंधी शुभ समाचार मिल सकता है। परिजनों का पूरा सहयोग आपको मिलने के आसार हैं विशेषकर बड़े भाई का साथ आपको मिल सकता है।

मकर – आपकी राशि से मंगल दसवें स्थान यानि कर्मभाव में आ रहे हैं। कर्मस्थान में मंगल व गुरु का एक साथ होना आपके लिये कार्योन्नति के संकेत कर रहा है। धन लाभ के आसार भी बन रहे हैं। स्वास्थ्य में भी आपको लाभ मिलेगा, अपने आप को शारीरिक तौर पर तंदुरुस्त महसूस कर सकते हैं। यदि लंबे समय से घर या गाड़ी के लिये प्रयासरत हैं तो सफलता मिल सकती है। नई यात्राओं के योग भी आपके लिये बन रहे हैं। किसी पुराने दोस्त से भी मुलाकात हो सकती है।

कुंभ – आपकी राशि से मंगल भाग्य स्थान में आ रहे हैं। नवम भाव में मंगल व गुरु की युति आपके लिये भाग्योदय के संकेत कर रही है। इस समय आपको अतीत में किये गये कार्यों में सफलता दिला सकती है। अतीत में ही यदि किसी परियोजना में निवेश किया है तो इस समय धन लाभ की पूरी संभावनाएं आपके लिये बन रही हैं। किसी शुभ कार्य में धन खर्च भी हो सकता है। आपकी सेहत भी इस दौरान अच्छी रहने के आसार हैं।

मीन – मीन राशि के जातकों के लिये यह समय थोड़ा संभल कर रहने का है। दरअसल आपकी राशि से मंगल आठवें भाव में आ रहे हैं। हालांकि अष्टम मंगल को मंगलकारी माना जाता है लेकिन राशि स्वामी गुरु के साथ होने से यह समय आपके लिये सतर्क रहने का है। इस दौरान आपके आत्म-सम्मान को ठेस पंहुच सकती है। अग्नि एवं शस्त्रादि से भय भी आपके मन में बना रह सकता है। यदि संभव हो तो इस समय अपनी यात्रा स्थगित रखें क्योंकि यात्रा के दौरान आपको हानि उठानी पड़ सकती है। संचित धन में भी व्यय होने के योग आपके लिये बन रहे हैं।

यह राशिफल सामान्य ज्योतिषीय आकलन के आधार पर लिखा गया है। अपनी कुंडली के अनुसार मंगल व नीच शुक्र की युति आपको किस तरह प्रभावित करेगी जानने के लिये एस्ट्रोयोगी पर देश के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्यों से परामर्श करें। अभी बात करने के लिये यहां क्लिक करें।

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