सोमवार को मौनी अमावस्या - सौभाग्यशाली है यह महासंयोग

वैसे तो माघ मास का हर दिन पवित्र माना जाता है लेकिन इस महीने में मौनी अमावस्या का विशेष महत्व होता है। अंग्रेजी कलेंडर के अनुसार 4 फरवरी को मौनी अवास्या है। लेकिन इतना ही नहीं अमावस्या का दिन सोमवार होने से, मौनी व सोमवती अमावस्या का यह महासंयोग और भी भाग्यशाली हो गया है। तीन-चार साल में एक बार ही मौनी व सोमवती अमावस्या का यह महासंयोग होता है। इससे पहले 8 फरवरी 2016 को यह महासंयोग हुआ था व भविष्य में लगभग 17 साल बाद 2036 को यह सौभाग्यशाली संयोग बनेगा। हालांकि 2022 में भी माघ मास की अमावस्या तिथि सोमवार के दिन आरंभ हो रही है लेकिन दोपहर बाद शुरु होने के कारण अमावस्या तिथि अगले दिन यानि मंगलवार को मानी जायेगी। इस लिहाज से मौनी अमावस्या व सोमवती अमावस्या का यह संयोग बहुत ही सौभाग्यशाली है।

आप अपनी शंकाओं के समाधान के लिए भारत के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्यों से भी बातचीत कर सकते हैं। एस्ट्रोयोगी एस्ट्रोलॉजर्स से बात करने के लिये यहां क्लिक करें।


क्या है मौनी अमावस्या?

माघ मास की अमावस्या को मौनी अमावस्या कहते हैं। इस दिन मौन व्रत धारण कर मुनियों सा आचरण किया जाता है इसलिए इसे मौनी अमावस्या कहते है।

एक अन्य मान्यता के अनुसार इस दिन मनु ऋषि का जन्म हुआ था, इसलिए भी इसे मौनी अमावस्या कहते हैं।


क्या है मान्यता?

शास्त्रों के अनुसार इस महासंयोग में दान-पुण्य करने से कई गुणा अधिक फल प्राप्त होता है। इस दिन पवित्र नदियों विशेषकर तीर्थराज प्रयाग में संगम व हरिद्वार, काशी आदि किसी भी क्षेत्र में गंगा स्नान का विशेष पुण्य मिलता है। मान्यता यह भी है कि इस दिन गंगा का पानी अमृत के समान हो जाता है।

यदि गंगा या प्रयाग में जाना संभव न हो तो जिस भी तीर्थ स्थल पर स्नान करें वहां प्रयागराज का ध्यान करें व गंगा माता की स्तुति करें।


मौनी अमावस्या की कथा

एक समय की बात है कि कांचीपुरी में देवस्वामी नाम के एक ब्राह्मण रहते थे। उनके सात पुत्र व एक पुत्री थी। पुत्रों के विवाह के बाद जब पुत्री के विवाह की बात चली तो उसकी कुंडली में दोष था कि विवाह होते ही सप्तपदी होते-होते वह विधवा हो जाएगी। पंडितों ने बताया कि सिहंलद्वीप की एक धोबिन सोमा का पूजन करने से इसका वैधव्य दोष दूर होगा। ब्राह्मण ने अपने छोटे पुत्र के साथ पुत्री गुणवती को सोमा से प्रार्थना करने भेज दिया। लेकिन गुणवती व उसका भाई समुद्र किनारे पहुंच कर उसे पार न कर पाने पर दुखी होकर एक वृक्ष के नीचे बैठ गए। उनकी इस हालत पर वृक्ष पर रह रहे गिद्ध के बच्चों को तरस आ गया। उन्होंनें अपनी माता से उनकी मदद करने की कही। माता गिद्ध ने उन्हें सिंहलद्वीप पर पंहुचा दिया। अब दोनों भाई बहन सोमा के यहां पंहुच कर उसके घर का काम काज करने लगे। थोड़े दिनों बाद जब सोमा को पता चला तो वह उनकी मदद के लिए तैयार हो गई। गुणवती के विवाह के बाद जब उसके पति की मृत्यु हुई तो सोमा ने अपने तप से उसे जिवित कर दिया। लेकिन उसके खुद के पति, पुत्र व दामाद की मृत्यु हो गई। रास्ते में उसने पीपल की छाया में भगवान विष्णु की पूजा की व 108 परिक्रमाएं की जिसके बाद उसके परिवार के मृतक जन भी जिवित हो गए।


व्रत की विधि

इस दिन मौन रहकर या मुनियों जैसा आचरण करते हुए स्नान-दान करें। इस दिन त्रिवेणी या गंगा तट पर स्नान-दान की भी बहुत ज्यादा मान्यता है। स्नान के बाद तिल के लड्डू, तिल का तेल, आंवला, वस्त्रादि का दान करना चाहिए। इस अवसर पर स्नान-दान का फल भी मेरू के समान मिलता है। इस दिन तर्पण करने से पितर भी प्रसन्न होते हैं।


माघी सोमवतीअमावस्या 2019 तिथि व मुहूर्त

अमावस्या तिथि - सोमवार, 4 फरवरी 2019

अमावस्या तिथि आरंभ - 23:52 बजे से (3 फरवरी 2019)

अमावस्या तिथि समाप्त - 02:33 बजे (5 फरवरी 2019)

 एस्ट्रोयोगी के अन्य ज्ञानवर्धक लेख पढ़ने के लिए यहां पर क्लिक करें।

एस्ट्रो लेख

पितृपक्ष के दौर...

भारतीय परंपरा और हिंदू धर्म में पितृपक्ष के दौरान पितरों की पूजा और पिंडदान का अपना ही एक विशेष महत्व है। इस साल 13 सितंबर 2019 से 16 दिवसीय महालय श्राद्ध पक्ष शुरु हो रहा है और 28...

और पढ़ें ➜

श्राद्ध विधि – ...

श्राद्ध एक ऐसा कर्म है जिसमें परिवार के दिवंगत व्यक्तियों (मातृकुल और पितृकुल), अपने ईष्ट देवताओं, गुरूओं आदि के प्रति श्रद्धा प्रकट करने के लिये किया जाता है। मान्यता है कि हमारी ...

और पढ़ें ➜

श्राद्ध 2019 - ...

श्राद्ध साधारण शब्दों में श्राद्ध का अर्थ अपने कुल देवताओं, पितरों, अथवा अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा प्रकट करना है। हिंदू पंचाग के अनुसार वर्ष में पंद्रह दिन की एक विशेष अवधि है...

और पढ़ें ➜

भाद्रपद पूर्णिम...

पूर्णिमा की तिथि धार्मिक रूप से बहुत ही खास मानी जाती है विशेषकर हिंदूओं में इसे बहुत ही पुण्य फलदायी तिथि माना जाता है। वैसे तो प्रत्येक मास की पूर्णिमा महत्वपूर्ण होती है लेकिन भ...

और पढ़ें ➜