Skip Navigation Links
राखी का त्यौहार है भद्रा और ग्रहण से ग्रस्त जानें कब बांधे राखी


राखी का त्यौहार है भद्रा और ग्रहण से ग्रस्त जानें कब बांधे राखी

वर्ष 2017 में रक्षा बंधन 7 अगस्त, सोमवार को मनाया जाएगा। भारत में यह त्यौहार भाई-बहन के अटूट प्रेम को समर्पित है और इस त्यौहार का प्रचलन सदियों पुराना बताया गया है। इस दिन बहनें अपने भाई की कलाई पर राखी बाँधती हैं और भाई अपनी बहनों की रक्षा का संकल्प लेते हुए अपना स्नेहाभाव दर्शाते हैं।

कब तक रहेगी भद्रा

पिछले साल रक्षाबंधन के पर्व को भद्रा की नजर नहीं लगी थी क्योंकि भद्रा सूर्योदय से पहले समाप्त हो गई थी लेकिन इस बार रक्षा बंधन के इस पावन पर्व को भद्गा की नजर लगी हुई है।  जिस कारण 11 बजकर 4 मिनट के बाद ही कलाई बांधने की रस्म शुरु होगी। भद्रा को चूंकि शुभ कार्य के लिये अशुभ माना जाता है इसलिये भद्रा के समाप्त होने के पश्चात ही राखी बांधने की परंपरा को शुरु करना शुभ फलदायी रहेगा।

क्या है भद्रा

शास्त्रों की मान्यता के अनुसार भद्रा का संबंध सूर्य और शनि से होता है। हिन्दू धर्म शास्त्रों में, भद्रा भगवान सूर्य देव की पुत्री और शनिदेव की बहन है। शनि की तरह ही इसका स्वभाव भी क्रूर बताया गया है। इस उग्र स्वभाव को नियंत्रित करने के लिए ही भगवान ब्रह्मा ने उसे कालगणना या पंचाग के एक प्रमुख अंग करण में स्थान दिया। जहां उसका नाम विष्टी करण रखा गया। भद्रा की स्थिति में कुछ शुभ कार्यों, यात्रा और उत्पादन आदि कार्यों को निषेध माना गया। इसलिये इस बार भद्रा का साया समाप्त होने पर ही रक्षाबंधन अनुष्ठान किया जा सकेगा।

इसलिये भी खास है इस बार राखी

रक्षाबंधन का यह पवित्र त्यौहार इस बार सोमवार को होगा जोकि इसके खास होने कि एक वजह है। आप सोचते होगे कि सोमवार में ऐसा क्या खास है। दरअसल यह साधारण सोमवार नहीं बल्कि सावन माह का पावन और अंतिम सोमवार है। सावन सोमवार होने के कारण यह दिन बहुत सौभाग्यशाली है और भोलेनाथ की कृपा भी इस दिन बनी रहती है। हालांकि रक्षाबंधन के संबंध में यह मान्यता जुड़ी हुई है कि देवताओं के गुरु बृहस्पति ने ही देवराज इंद्र को असुरों पर विजय पाने के लिये रक्षा बंधन का सुझाव दिया था जिसके बाद इस त्यौहार को मनाने का चलन शुरु हुआ।

राखी पर लगेगा ग्रहण

7 अगस्त 2017 को मनाये जा रहे रक्षाबंधन पर चंद्र ग्रहण भी लग रहा है। हालांकि ग्रहण रात्रि 10 बजकर 52 मिनट पर शुरु होगा लेकिन ग्रहण का सूतक दोपहर बाद 1 बजकर 52 मिनट से ही आरंभ हो जायेगा जो रात्रि के 12 बजकर 49 मिनट तक रहेगा। इसलिये एस्ट्रोयोगी ज्योतिषाचार्यों की सलाह है कि इस वर्ष रक्षाबंधन का अनुष्ठान भद्रा समाप्ति के पश्चात यानि 11 बजकर 4 मिनट से चंद्रग्रहण के सूतक लगने से पहले यानि 1 बजकर 52 मिनट तक कर लेना चाहिये।

शुभ महूर्त

रक्षा बंधन तिथि - 07 अगस्त 2017,सोमवार

अनुष्टान समय - 11:04 से 21:12 (07 अगस्त 2017)

अपराह्न मुहूर्त - 13:46 से 16:24 (07 अगस्त 2017)

प्रदोष समय रक्षा बंधन मुहूर्त - 19:03 बजे से 21:12 (07 अगस्त 2017)

पूर्णिमा तिथि प्रारंभ - 22:28 बजे (06 अगस्त 2017)

पूर्णिमा तिथि समाप्त - 23:40 बजे (07 अगस्त 2017)

भद्रा समाप्ति समय - 11:04 बजे  (07 अगस्त 2017)

चंद्र ग्रहण सूतक - 13:52 बजे (07 अगस्त 2017)

एस्ट्रोयोगी की तरफ से सभी पाठकों को रक्षा बंधन की हार्दिक शुभकामनाएं और हम आशा करते है कि आप के बीच यूँही प्रेम, स्नेह बना रहें।

रक्षाबंधन पर ज्योतिषीय परामर्श करने के लिये यहां क्लिक करें

यह भी पढ़ें

विश्वास और प्यार का एक पवित्र बंधन - रक्षा बंधन   |   रक्षाबंधन – क्या है धार्मिक महत्व   |   सावन पूर्णिमा को लगेगा चंद्र ग्रहण राशिनुसार जानें क्या होगा असर

अन्य त्यौहारों के बारे में महत्वपूर्णजानकारियां और लेख पढ़ने के लिये यहां क्लिक करें   |   




एस्ट्रो लेख संग्रह से अन्य लेख पढ़ने के लिये यहां क्लिक करें

हरियाली तीज 2017 - जानें श्रावणी तीज की व्रत कथा व पूजा विधि

हरियाली तीज 2017 -...

श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को “श्रावणी तीज” कहते हैं। परन्तु ज्यादातर लोग इसे हरियाली तीज के नाम से जानते हैं। यह त्यौहार मुख्य रूप स...

और पढ़ें...
नाग पंचमी 2017 - भगवान शिव और नागों की पूजा का दिन है

नाग पंचमी 2017 - भ...

नाग पंचमी एक  हिन्दू पर्व है जिसमें नागों और सर्पों की पूजा की जाती है। श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि में यह पर्व पूरे देश में पूर्ण...

और पढ़ें...
शुक्र राशि परिवर्तन – किसको मिलेगा लाभ किसको होगी हानि जानें राशिफल

शुक्र राशि परिवर्त...

किसी भी जातक की कुंडली में लाभ, सुख-समृद्धि आदि के कारक शुक्र माने जाते हैं इसलिये शुक्र का गोचर भी ज्योतिषीय दृष्टिकोण से खास अहमियत रखता है...

और पढ़ें...
राशिनुसार कैसे करें शिव की पूजा

राशिनुसार कैसे करे...

शिव भक्तों के लिये सावन माह सभी महीनों में सबसे पवित्र माह होता है। इसलिये इस माह को भगवान शिव की उपासना के लिये सर्वोत्तम भी माना जाता है। इ...

और पढ़ें...
श्रावण सोमवार 2017 - जानें सावन सोमवार की व्रतकथा व पूजा विधि

श्रावण सोमवार 2017...

सावन माह का नाम आते ही हमारे मन में भी बादल घुमड़ने लगते हैं, ठंडी हवाओं के झौंके सुकून देने लगते हैं, तपती ज्येष्ठ और आषाढ़ में गरमी से बेहा...

और पढ़ें...