Skip Navigation Links
रंग पंचमी 2018  – रंग पंचमी होली  पर रंगों में रमे होते हैं देवता


रंग पंचमी 2018 – रंग पंचमी होली पर रंगों में रमे होते हैं देवता

रंग पंचमी होली का ही एक रूप है जो देश के कई क्षेत्रों में चैत्र मास की कृष्ण पंचमी को मनाया जाता है। दरअसल होली का जश्न कई दिनों तक चलता है और इसकी तैयारियां होली के दिन यानि फाल्गुन पूर्णिमा से लगभग एक महीने पहले शुरू हो जाती है। फाल्गुन पूर्णिमा को होलिका दहन के पश्चात अगले दिन सभी लोग उत्साह में भरकर रंगों से खेलते हैं। रंगों का यह उत्सव चैत्र मास की कृष्ण प्रतिपदा से लेकर पंचमी तक चलता है। इसलिये इसे रंग पंचमी कहा जाता है। रंग पंचमी कोकण क्षेत्र का खास त्यौहार है महाराष्ट्र में तो होली को ही रंग पंचमी कहा जाता है। इसके पिछे की मान्यता यह है कि इस दिन जो भी रंग इस्तेमाल किये जाते हैं जिन्हें एक दूसरे पर लगाया जाता है हवा में उड़ाया जाता है उससे विभिन्न रंगों की ओर देवता आकर्षित होते हैं। साथ ही मान्यता है कि इससे ब्रह्मांड में सकारात्मक तंरगों का संयोग बनता है व रंग कणों में संबंधित देवताओं के स्पर्श की अनुभूति होती है।


महाराष्ट्र में रंग पंचमी

रंगवाली होली यानि धुलंडी से लेकर पंचमी तिथि तक यहां जमकर होली खेली जाती है। रंग पंचमी इस पर्व का अंतिम दिन होता है। माना जाता है कि यह मछुआरों के लिये भी बहुत खास होता है इस दिन सब नाचने गाने में मस्त होते हैं। रंग पंचमी पर एक विशेष प्रकार का मीठा पकवान भी घरों में बनाया जाता है जिसे पूरनपोली कहा जाता है। जगह-जगह पर दही-हांडी की प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं जिसमें महिलाएं मटकी फोड़ने वालों पर रंग फेंकती हैं ताकि वे अपने उद्देश्यों में सफल न हो सकें। जो भी मटकी फोड़ने में कामयाब होता है उसे पुरस्कार से नवाज़ा जाता है और वह होली किंग ऑफ द ईयर कहलाता है।

असल में रंग पंचमी के जरिये एक प्रकार से तेजोमय सगुण स्वरूप का रंगों के माध्यम से आह्वान भी किया जाता है। रंगपंचमी अनिष्टकारी शक्तियों पर विजय प्राप्ति का उत्सव भी है मान्यता है कि रज-तम के विघटन से दुष्टकारी या कहें पापकारी शक्तियों का उच्चाटन भी इस दिन होता है।


इंदौर में रंगपंचमी

महाराष्ट्र ही नहीं मध्य प्रदेश के इंदौर में रंगपंचमी को पारंपरिक रूप से मनाया जाता है। इस दिन पूरे शहर में रंगारंग जुलूस निकाले जाते हैं। यहां होली के पश्चात रंग पंचमी के दिन पुन: एक दूसरे पर रंग उड़ेले जाते हैं। गाजे-बाजे के साथ जुलूस की शक्ल में लोग निकलते हैं इस जुलूस को गेर कहा जाता है। इसमें सभी धर्म व जातियों के लोग शामिल होते हैं। पूरा इंदौर इस दिन विभिन्न रंगों में रंगा नजर आता है और सांस्कृतिक उत्सवों की धूम मची रहती है।

इसके अलावा देश के अन्य हिस्सों में भी इस दिन धार्मिक सांस्कृतिक उत्सव आयोजित किये जाते हैं। 


2018 में कब है रंग पंचमी

रंगपंचमी 2018 में अंग्रेजी कलैंडर के अनुसार 6 मार्च को है। यह होली के पर्व का अंतिम दिन भी मानी जाता है।


एस्ट्रोयोगी को बनाएं अपनी लाइफ का GPS और इंडिया के बेस्ट एस्ट्रोलॉजर्स की गाइंडेंस से अपने जीवन में भरें खुशियों के रंग। पंडित जी से अभी बात करने के लिये यहां क्लिक करें।


संबंधित लेख

होली 2018   |   होलिका दहन - होली की पूजा विधि और शुभ मुहूर्त   |   क्यों मनाते हैं होली पढ़ें पौराणिक कथाएं   |   ब्रज की होली - बरसाने की लठमार होली

क्या है होली और राधा-कृष्ण का संबंध   |   होली और रंग - जानें राशिनुसार किस रंग से खेलें होली   |   फाल्गुन पूर्णिमा – व्रत कथा व पूजा विधि

फाल्गुन – फाल्गुन मास के व्रत व त्यौहार   |   राधावल्लभ मंदिर वृंदावन – यहां हैं राधा में कृष्ण कृष्ण में राधा




एस्ट्रो लेख संग्रह से अन्य लेख पढ़ने के लिये यहां क्लिक करें

कार्तिक पूर्णिमा – बहुत खास है यह पूर्णिमा!

कार्तिक पूर्णिमा –...

हिंदू पंचांग मास में कार्तिक माह का विशेष महत्व होता है। कृष्ण पक्ष में जहां धनतेरस से लेकर दीपावली जैसे महापर्व आते हैं तो शुक्ल पक्ष में भी गोवर्धन पूजा, भैया दूज ...

और पढ़ें...
वृश्चिक सक्रांति - सूर्य, गुरु व बुध का साथ! कैसे रहेंगें हालात जानिए राशिफल?

वृश्चिक सक्रांति -...

16 नवंबर को ज्योतिष के नज़रिये से ग्रहों की चाल में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव हो रहे हैं। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार ग्रहों की चाल मानव जीवन पर व्यापक प्रभाव डालती है। इस द...

और पढ़ें...
शुक्र मार्गी - शुक्र की बदल रही है चाल! क्या होगा हाल? जानिए राशिफल

शुक्र मार्गी - शुक...

शुक्र ग्रह वर्तमान में अपनी ही राशि तुला में चल रहे हैं। 1 सितंबर को शुक्र ने तुला राशि में प्रवेश किया था व 6 अक्तूबर को शुक्र की चाल उल्टी हो गई थी यानि शुक्र वक्र...

और पढ़ें...
देवोत्थान एकादशी 2018 - देवोत्थान एकादशी व्रत पूजा विधि व मुहूर्त

देवोत्थान एकादशी 2...

देवशयनी एकादशी के बाद भगवान श्री हरि यानि की विष्णु जी चार मास के लिये सो जाते हैं ऐसे में जिस दिन वे अपनी निद्रा से जागते हैं तो वह दिन अपने आप में ही भाग्यशाली हो ...

और पढ़ें...
तुलसी विवाह - कौन हैं आंगन की तुलसी, कैसे बनीं पौधा

तुलसी विवाह - कौन ...

तुलसी का पौधा बड़े काम की चीज है, चाय में तुलसी की दो पत्तियां चाय का स्वाद तो बढ़ा ही देती हैं साथ ही शरीर को ऊर्जावान और बिमारियों से दूर रखने में भी मदद करती है, ...

और पढ़ें...